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Written By पुष्पा परजिया

हिन्दी कविता : जीवन की राहें...

Poem in Hindi
क्यूं होती पथरीली जीवन की राहें,
क्यूं न मिलते कोमल फूल यहां।
क्यूं होती खुशी के लम्हों के बाद,
जलते से जीवन की राहें यहां।
 

 
मालिक तूने क्यों न दिया,
सदा का हर्षोल्लास यहां।
 
इतना तो तू कर सकता था, 
जीवन को खुशियों से भर सकता था।
होते न आंसू अगर जीवन में, 
रंजोगम का नामोनिशां न होता। 
 
इतनी सुन्दर सृष्टि रचकर,
क्यों दुःख का दाग लगाया तुमने।
दी सुगंध फूलों को तुमने,
और दिए रंग भी तुमने।
 
देकर कड़ी धूप फिर उसको, 
मुरझा भी दिया तुमने।
सुन्दर सृष्टि में सुख की,
नदियां भी बहाईं तुमने।
 
इतनी सुन्दर रचना करके, 
दुखों का दाह क्यों दिया तुमने?

 
लेखक के बारे में
पुष्पा परजिया