घोंचूजी (कब्र के पास रोते हुए बोले) - तुम क्यों चले गए? तुम्हें नहीं जाना चाहिए था। तुम्हारे जाने से मेरी जिंदगी कितने कष्टों से भर गई है, तुम कभी समझ नहीं पाओगे। पास ही खड़े पोंचूजी बोले - यार, हौसला रखो। सभी को एक न एक दिन यहीं आना पड़ता है। यह तो संसार का नियम है। वैसे, यह किसकी कब्र है? तुम्हारे माता या पिता की? घोंचूजी - उसकी, जिसने अब तक मुझे संभाल रखा था। मेरी बीवी के पहले पति की।