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व्याकरण का प्रथम ग्रंथ अष्टाध्यायी

Sanskrit grammar texts
संस्कृत भाषा को संसार की प्रथम भाषा और ऋग्वेद को प्रथम ग्रंथ माना जाता है। दुनिया की प्रथम भाषा का पहली बार किसी ने सुव्यवस्थित व्याकरण ग्रंत लिखा था तो वह थे महर्षि पाणिनि। उन्होंने अष्टाध्यायी नामक ग्रंथ लिया। आओ जानते हैं इस ग्रंथ के बारे में।
 
 
1. पाणिनि द्वारा रचित दुनिया की प्रथम भाषा का प्रथम व्याकरण ग्रंथ अष्टाध्यायी (500 ई.पू.) है। 
 
2. इसमें आठ अध्याय हैं इसीलिए इसे अष्टाध्यायी कहा गया है। 
 
3. इस ग्रंथ का दुनिया की हर भाषा पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ा है। इसी ग्रंथ को आधार बनाकर अरबी, फारसी, अंग्रेजी आदी के हर्फ और व्याकरण का विकास हुआ।
 
4. अष्टाध्यायी में कुल सूत्रों की संख्या 3996 है। इन सभी सूत्रों को समझने के बाद आपको जिस ज्ञान की प्राप्त होगी वह दुनिया की अन्य किसी व्याकरण की किताब में नहीं मिलेगा। यह शुद्ध ज्ञान है।
 
5. पाणिनि के इस ग्रंथ पर महामुनि कात्यायन का विस्तृत 'वार्तिक' ग्रन्थ है।
 
7. इसी तरह पतंजलि (150 ईसापूर्व) ने इस ग्रंथ पर विशद विवरणात्मक ग्रन्थ 'महाभाष्य' लिखा है। पतंजलि या पातं‍जलि ने योग पर योगसूत्र नामक ग्रंथ भी लिथा है। 
लेखक के बारे में
अनिरुद्ध जोशी
पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों से साहित्य, धर्म, योग, ज्योतिष, करंट अफेयर्स और अन्य विषयों पर लिख रहे हैं। वर्तमान में विश्‍व के पहले हिंदी पोर्टल वेबदुनिया में सह-संपादक के पद पर कार्यरत हैं। दर्शनशास्त्र एवं ज्योतिष: मास्टर डिग्री (Gold Medalist), पत्रकारिता: डिप्लोमा। योग, धर्म और ज्योतिष में विशेषज्ञता।.... और पढ़ें
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