लू क्यों लगती है...जानिए कैसे बचें 'हीट स्ट्रोक' से
इन दिनों जबकि गर्मी अपना प्रचंड रूप दिखा रही है और चारों तरफ से सन स्ट्रोक यानी लू लगने से मरने वालों की खबरें आ रही है, बेहद जरूरी है कि हम अपनी सेहत का खास ख्याल रखें। लू लगना वास्तव में होता क्या है, यह किन लोगों को अधिक प्रभावित करती है और क्या है इससे बचने के आसान उपाय, आइए जानें-
गर्मियों के इस मौसम में लू चलना आम बात है। 'लू' गर्मी के मौसम की बीमारी है। 'लू' लगने का प्रमुख कारण शरीर में नमक और पानी की कमी होना है। पसीने के रूप में नमक और पानी का बड़ा हिस्सा शरीर से निकलकर खून की गर्मी को बढ़ा देता है।
सिर में भारीपन मालूम होने लगता है। नाड़ी की गति बढ़ने लगती है। खून की गति भी तेज हो जाती है। सांस की गति भी ठीक नहीं रहती तथा शरीर में ऐंठन-सी लगती है। बुखार काफी बढ़ जाता है। हाथ और पैरों के तलुओं में जलन-सी होती रहती है। आंखें भी जलती हैं। इससे अचानक बेहोशी व अंततः रोगी की मौत भी हो सकती है।
अगले पेज पर जानिए, लू क्यों लगती है...
हमारे शरीर में तापमान का उतार-चढाव सहन करने की पर्याप्त क्षमता होती है लेकिन यह एक तय सीमा तक ही हो पाता है। जब बहुत अधिक गर्मी में शरीर वातावरण के अनुकूल अपने को एडजस्ट नहीं कर पाता है तो व्यक्ति लू का शिकार हो जाता है।
ज्यादा देर तक गर्मी में खड़े रहने से, तेज धूप में निकलने से व धूप में मेहनत करने से लू लग जाती है।
शरीर में जरूरी जल और नमक की कमी हो जाने पर रक्तसंचार में बाधा पहुंचने लगती है बस यही सबसे अहम वजह है लू लगने की।
हर व्यक्ति समान रूप से लू से प्रभावित नहीं होता है। यह व्यक्ति के शारीरिक शक्ति, उम्र और प्रतिरोधक क्षमता निर्भर करता है।
लू सबसे ज्यादा किसे परेशान करती है-
लू के चपेट में कौन आ सकता है -
* एक ऐसे व्यक्ति को लू लगने का खतरा अधिक होता है जो मौसम के अनुसार खुद को ढाल नहीं पाता। गर्मियां आते ही तेज एसी में बैठता है। ऐसे व्यक्तियों का शरीर इतना कच्चा हो जाता है कि वे स्वाभाविक ताममान के साथ तालमेल नहीं बैठा पाते। दूसरी तरफ जब एसी की ठंडक से तत्काल वह 42 या 44 डिग्री में आते हैं तो शरीर को घुटन होती है और लू को अवसर मिल जाता है अटैक करने का।
लू उन लोगों को भी अधिक लगती है जिन्हें अक्सर त्वचा के रोग होते हैं और जो मधुमेह जैसे रोग से पीड़ित हैं।