एलोपैथी चिकित्सा के फायदे और नुकसान, जरूर जानिए


अधिकतर रोग उदर से प्रारंभ होते हैं अत: यदि वहां पर ही अंकुश लगाया जा सके तो कई रोगों का निदान स्वत: हो सकता है। मनुष्य अधिकतर स्वस्थ और निरोग रह सकता है। डॉक्टरों के पास एक ही अस्त्र है कि वे एंटीबायोटिक दवाई देते हैं, जो लाभ कम और हानि अधिक करती है। इन दवाइयों का उदर पर सीधा दुष्प्रभाव पड़ता है और व्यक्ति की पाचन क्रिया उलट-पुलट हो जाती है। यदि वह उस दवाई को शीघ्र ही बंद न कर दे तो दूसरी व्याधियां उग्र रूप ले लेती हैं। 
 
इस चिकित्सा पद्धति में औषधि से अधिक शल्य चिकित्सा सफल हो पाई है। यहां तक कि जिन रोगों का अथवा यूनानी या होम्योपैथिक चिकित्सा में औषधियों से उपचार हो जाता है, वहां भी एलोपैथी शल्य चिकित्सा का सहारा लेती है। दूसरे शब्दों में यह पद्धति शल्य चिकित्सा पर अधिक आधारित होती जा रही है। इससे यह चिकित्सा अन्य चिकित्सा पद्धतियों से महंगी भी होती जा रही है और साधारण व्यक्ति की पहुंच से बाहर होती जा रही है। 
 
एलोपैथी में यह भी देखने में आया है कि कई रोग ऐसे हैं जिनका कोई कारण डॉक्टरों की समझ में नहीं आता। वे उसका नाम 'एलर्जी' दे देते हैं। इसका उनके पास कोई उपचार नहीं है। डॉक्टर लोग इस 'एलर्जी' के उपचार के विषय में सतत प्रयत्नशील हैं, परंतु अभी तक उन्हें विशेष सफलता नहीं मिल पाई है। इस कथित रोग के विशेषज्ञ भी हो गए हैं, परंतु परिणाम कोई विशेष नहीं मिल पाया है। 
 
यह कहा जा सकता है कि एलोपैथिक चिकित्सा से लाभ सीमित हैं, परंतु इससे हानियां अधिक हैं। इसलिए आज संसार के जिन देशों में केवल इसी चिकित्सा प‍द्धति का अनुसरण हो रहा है, वे भी दूसरी चिकित्सा पद्धतियों की ओर आ‍कर्षित हो रहे हैं। यूरोप के कुछ देश होम्योपैथिक अथवा प्राकृतिक चिकित्सा की ओर आकर्षित हो रहे हैं, जबकि अमेरिका के लोग अब आयुर्वेद की ओर विशेष आकर्षित हो रहे हैं। वहां उस विषय में अनुसंधान भी तेजी से किए जा रहे हैं, इसके उदाहरण हैं कि कुछ आयुर्वेदिक औषधियां अमेरिका से भारत आ रही हैं और वे सफलतापूर्वक प्रयोग में लाई जा रही हैं।
 
यह तथ्‍य तो सही है कि एलोपैथिक चिकित्सा वैज्ञानिक कसौटी पर खरी उतरी है इसलिए इसका प्रचार-प्रसार भी अधिक हो सका, परंतु मेरे विचार से यह चिकित्सा पद्धति अपने आप में पूर्ण नहीं है। आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति अपने आप में पूर्ण है, परंतु इसका अधिक प्रचार नहीं हो पाया। इसमें हमारी मानसिकता विदेशी पद्धति श्रेष्ठ है, भी एक मुख्य हेतु है। आयुर्वेदिक चिकित्सा में विश्वास बढ़ाना हम सबका कर्तव्य होना चाहिए; क्योंकि यह श्रेष्ठ, सफल एवं पूर्ण चिकित्सा पद्धति है।
उषा किरण अग्रवाल
संदर्भ : कल्याण

 

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