गुजरात सरकार का बड़ा फैसला, क्लास-1 अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए कड़े नियम
Class-1 officer action rules in Gujarat: गुजरात सरकार ने क्लास-1 अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई को लेकर एक महत्वपूर्ण और कड़ा निर्णय लिया है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, अब सेवानिवृत्ति (रिटायरमेंट) के बिल्कुल अंतिम दिनों में कार्रवाई के प्रस्ताव भेजने की प्रथा पर रोक लगा दी गई है। मुख्यमंत्री स्तर से स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि रिटायरमेंट के समय होने वाली प्रशासनिक उलझनों और कानूनी पेचीदगियों से बचने के लिए अब नियमों का सख्ती से पालन करना होगा।
सेवानिवृत्ति के एक महीने पहले भेजना होगा प्रस्ताव
सरकारी नए नियमों के तहत, यदि किसी वर्ग-1 अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करनी है, तो उसका प्रस्ताव अधिकारी की सेवानिवृत्ति से कम से कम एक महीने पहले भेजना अनिवार्य होगा। इस कदम का मुख्य उद्देश्य अंतिम क्षणों में की जाने वाली जल्दबाजी और तकनीकी खामियों को रोकना है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि अब आखिरी समय में फाइलें भेजने की परंपरा को स्वीकार नहीं किया जाएगा, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
... तो जिम्मेदारी विभागीय अधिकारी की
सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि यदि कार्रवाई शुरू करने या प्रस्ताव भेजने में देरी होती है, तो इसकी सीधी जिम्मेदारी संबंधित विभाग के अधिकारियों की होगी। देरी के कारण यदि सरकार को किसी कानूनी मुसीबत का सामना करना पड़ता है या कार्रवाई रुक जाती है, तो दोषी अधिकारियों के खिलाफ जांच की जाएगी। प्रशासनिक जवाबदेही तय करने के लिए यह एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
पांच दिन पहले मुख्यमंत्री की मंजूरी लेना जरूरी
विशेष और आपातकालीन स्थितियों में, जहां समय पर प्रस्ताव भेजना संभव न हो, वहां सेवानिवृत्ति से कम से कम पांच दिन पहले मुख्यमंत्री की मंजूरी लेना आवश्यक होगा। इसके अलावा, यदि किसी मामले में मंत्री और विभाग प्रमुख के विचारों में मतभेद होता है, तो ऐसे मामले को सीधे मुख्यमंत्री के पास निर्णय के लिए भेजा जाएगा। इस निर्णय से सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन और अन्य लाभों को लेकर होने वाले विवादों में कमी आने की उम्मीद है।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala
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