रविवार, 12 अप्रैल 2026
  1. लाइफ स्‍टाइल
  2. नन्ही दुनिया
  3. क्या तुम जानते हो?
  4. Facts about Martyrs of Jallianwala Bagh
Written By WD Feature Desk

Jallianwala Bagh Day: जलियांवाला बाग दिवस पर जानिए इस घटना की 5 खास बातें

जलियांवाला बाग दिवस की फोटो
Jallianwala Bagh massacre: जलियांवाला बाग हत्याकांड भारत के इतिहास की सबसे दर्दनाक घटनाओं में से एक है। हर साल 13 अप्रैल को इसे याद किया जाता है। इस दिन 1919 में जलियांवाला बाग में निहत्थे लोगों पर गोलियां चलाई गई थीं। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया और महात्मा गांधी के नेतृत्व में आजादी की लड़ाई को एक नया मोड़ मिला।ALSO READ: Jyotiba Phule: ज्योतिबा फुले कौन थे, सामाजिक सुधार में उनका क्या योगदान था?

1. बैसाखी का दिन और शांतिपूर्ण सभा
2. जनरल डायर का क्रूर आदेश
3. 'खूनी कुआं' और शहीदों की गाथा
4. आंकड़ों का विवाद
5. क्रांति की नई लहर और उधम सिंह का बदला
जलियांवाला बाग हत्याकांड-FAQs
 

इस क्रूर और अमानवीय हत्याकांड तथा हृदयविदारक घटना की 5 सबसे प्रमुख बातें यहां दी गई हैं:

 

1. बैसाखी का दिन और शांतिपूर्ण सभा

13 अप्रैल 1919 को बैसाखी का पावन पर्व था। अमृतसर के जलियांवाला बाग में हजारों लोग जमा हुए थे। यह सभा दो स्थानीय नेताओं, डॉ. सैफुद्दीन किचलू और डॉ. सत्यपाल की गिरफ्तारी के विरोध में और रोलेट एक्ट (काला कानून) के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के लिए आयोजित की गई थी। इस भीड़ में बुजुर्गों और युवाओं के साथ बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे।
 

2. जनरल डायर का क्रूर आदेश

जब सभा चल रही थी, तब ब्रिटिश सैन्य अधिकारी जनरल एडवर्ड डायर अपने सैनिकों के साथ वहां पहुंचा। उसने बिना किसी चेतावनी के बाग के एकमात्र संकरे निकास द्वार को घेर लिया और निहत्थी भीड़ पर अंधाधुंध गोलियां चलाने का आदेश दे दिया। सैनिकों ने तब तक गोलियां चलाईं जब तक कि उनका गोला-बारूद खत्म नहीं हो गया।
 

3. 'खूनी कुआं' और शहीदों की गाथा

गोलियों से बचने के लिए लोग इधर-उधर भागने लगे, लेकिन बाहर निकलने का रास्ता बंद था। कई लोगों ने अपनी जान बचाने के लिए बाग के अंदर स्थित एक कुएं में छलांग लगा दी। आज भी उस कुएं को 'शहीद कुआं' कहा जाता है, जिससे बाद में सैकड़ों शव निकाले गए थे। बाग की दीवारों पर आज भी गोलियों के निशान उस बर्बरता की गवाही देते हैं।
 

4. आंकड़ों का विवाद

ब्रिटिश सरकार के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार इस घटना में 379 लोग मारे गए और लगभग 1500 लोग गंभीर रूप से घायल हुए। हालांकि, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की जांच समिति के अनुसार मरने वालों की संख्या 1,000 से अधिक थी। इस घटना ने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया था।

 

5. क्रांति की नई लहर और उधम सिंह का बदला

इस नरसंहार के विरोध में रवींद्रनाथ टैगोर ने अपनी 'नाइटहुड' (Knighthood) की उपाधि त्याग दी थी। इसी घटना ने महात्मा गांधी को ब्रिटिश शासन के खिलाफ 'असहयोग आंदोलन' शुरू करने के लिए प्रेरित किया। इस नरसंहार का बदला लेने के लिए क्रांतिकारी उधम सिंह ने 21 साल बाद, 13 मार्च 1940 को इस घटना के समय पंजाब के लेफ्टिनेंट गवर्नर रहे माइकल ओ'डायर की लंदन जाकर वहां के कैक्सटन हॉल में गोली मारकर हत्या कर दी थी।
 
'शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले, वतन पर मरने वालों का यही बाकी निशां होगा।'
 
जलियांवाला बाग की मिट्टी आज भी हमें उन वीरों के बलिदान की याद दिलाती है जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए।
 

जलियांवाला बाग हत्याकांड-FAQs

 
Q. जलियांवाला बाग हत्याकांड क्या था?
A. यह 13 अप्रैल 1919 को जलियांवाला बाग में हुआ एक नरसंहार था, जहां ब्रिटिश सेना ने निहत्थे भारतीयों पर गोलियां चलाईं।
 
Q. यह घटना कब और कहां हुई थी?
A. यह घटना 13 अप्रैल 1919 को अमृतसर (पंजाब) में हुई थी।
 
Q. गोली चलाने का आदेश किसने दिया था?
A. ब्रिटिश अधिकारी रेजिनाल्ड एडवर्ड डायर ने बिना चेतावनी गोली चलाने का आदेश दिया था।
 
Q. लोग वहां क्यों इकट्ठा हुए थे?
A. लोग बैसाखी मनाने और शांतिपूर्ण विरोध सभा के लिए वहां जमा हुए थे।

अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।ALSO READ: Ambedkar Jayanti 2026: बाबासाहेब अंबेडकर का जीवन परिचय और 10 उल्लेखनीय कार्य