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आजा नच ले !
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देवेंद्र
राजनीति में आ के, जनता का धन खा के, भ्रष्टाचार के बड़े-बड़े रिकॉर्ड तू रच ले.... आजा नच ले... ईमानदारी से भाई, होगी क्या ख़ाक कमाई, चाहे जितना बहा पसीना मर, खप, पच ले... आजा नच ले... माता-पिता का जूस, बेटा, जमकर चूस, आए जब तेरे फ़र्ज की बारी मुँह फेरे ले, बच ले... आजा नच ले... मेरी ये बकवास, नहीं है कोई ख़ास, फिर भी तूने पढ़ी तो 'थैंक्यू वेरी मच ले'... आजा नच ले... !