1. खबर-संसार
  2. »
  3. चुनाव
  4. »
  5. दिल्ली

हाथी मिला न हाथ

चुनाव 2008
नई दिल्ली। न खुदा ही मिला और विसाल-ए-सनम। हाथ थामने की चाहत में हाथी को अलविदा कहा था। हाथी आँखों से ओझल हो गया और हाथ का सहारा नहीं मिला। बहुजन समाज पार्टी छोड कांग्रेस में शामिल हुए पूर्व प्रदेशाध्यक्ष जागेराम भाटी और उनके समर्थक अपने फैसले पर पछता रहे हैं।

बसपा दिल्ली नगर निगम चुनाव में 17 सीट जीतकर तीसरे मोर्चे के रूप में उभरी। उसने विधानसभा चुनाव के लिए सबसे पहले 66 प्रत्याशी भी घोषित कर दिए। मगर अगस्त में 12 लोगों के टिकट काटकर अन्य लोगों के दे दिए गए। चुनाव में राजनीतिक गणित बिगड़ने की आशंका से परेशान कांग्रेस के कुछ नेताओं ने भाटी से संपर्क किया और उन्हें कांग्रेस में शामिल करा दिया। भाटी कहते हैं कि मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने उन्हें पार्टी में सम्मानजनक स्थान व किसी बोर्ड में अध्यक्ष बनाने का वायदा किया था। मगर अब इस विषय में कोई चर्चा तक नहीं की जा रही है।

कांग्रेस में शामिल होने के फैसले को वह अपनी गलती मान रहे हैं। उधर, पार्टी में अगस्त माह में बदले गए पार्टी प्रत्याशियों के बाद वर्तमान पार्टी प्रत्याशी भी असमंजस में हैं। सूत्र कहते हैं कि पार्टी के करीब एक दर्जन प्रत्याशी और बदलने की चर्चा चल रही है। यही वजह है कि घोषणा के बाद भी कुछ प्रत्याशी चुनाव प्रचार पर ज्यादा ध्यान नहीं दे रहे हैं। मगर पार्टी के प्रदेश महासचिव कंवर सिंह तंवर कहते हैं कि आरोप निराधार हैं। प्रत्याशी को नहीं बदला जाएगा। (नईदुनिया)
लेखक के बारे में
ND