निर्भय भई भाजपा, आप भई भयभीत

Author ओंकारेश्वर पांडेय|
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने आयरन लेडी किरण बेदी को दिल्ली के मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर एक तीर से दो नहीं कई निशाने साध लिए हैं। पहला निशाना तो निश्चित रूप से आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी है। दूसरा निशाना दिल्ली की महिला और युवा मतदाता हैं। और तीसरा, दिल्ली में आए दिन होने वाली निर्भया कांड जैसी घटनाओं को रोकने के लिए एक दमदार पूर्व पुलिस अधिकारी को दिल्ली के मुख्यमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट कर भाजपा ने कानून-व्यवस्था को लेकर उठने वाले सवालों का सबसे कारगर जवाब पेश कर दिया है।
इससे आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल की दिल्ली पुलिस को दिल्ली सरकार के हवाले करने की मांग की हवा भी निकाल दी है। मुख्‍यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित होने के बाद इसीलिए किरण बेदी ने साफ कहा कि 'मेरी प्राथमिकता महिलाएं भी हैं। अब कोई यह बहाना नहीं कर सकता कि दिल्ली पुलिस मेरे अधीन नहीं है। दिल्ली के नागरिकों की सुरक्षा मेरी प्राथमिकता होगी।' अरविंद केजरीवाल ने 49 दिन जिस तरह सख्ती से शासन करके रिश्वतखोरी कम करने की कोशिश की, ठीक उसी तरह किरण बेदी एक सख्त पुलिस अफसर के तौर पर पहचान रखती हैं। 
 
भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने सोमवार की शाम किरण बेदी को मुख्यमंत्री पद का प्रत्याशी बनाने के मुद्दे पर केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह को समझाने मनाने के लिए किरण की इसी उपयोगिता का हवाला दिया और फिर राजनाथ सिंह तैयार हो गए। प्रधानमंत्री मोदी ने केजरीवाल के खिलाफ किरण अस्त्र का इस्तेमाल कर भाजपा निर्भय और आम आदमी पार्टी को भयभीत कर दिया है। लेकिन ये भी सच है कि किरण बेदी को मुख्यमंत्री पद का प्रत्याशी घोषित करने से दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष सतीश उपाध्याय समेत तमाम बड़े नेता मायूस हो गए हैं।
 
गौरतलब है कि सतीश उपाध्याय को पार्टी ने अबतक टिकट तक नहीं दिया है और कार्यकर्ता सड़कों पर उतरकर उन्हें टिकट देने की मांग कर रहे हैं। दरअसल आप नेता अरविंद केजरीवाल द्वारा सतीश उपाध्याय पर बिजली कंपानियों से साठगांठ का आरोप लगाए जाने से तिलमिलाई भाजपा ने सतीश को दरकिनार कर किरण बेदी को सामने कर दिया।
 
किरण बेदी केजरीवाल को करारा जवाब देने के लिए दिल्ली की सभी 70 विधानसभा क्षेत्रों में जनसभाएं कर रही हैं। बीजेपी में मनमुटाव की खबरों के बीच किरण ने जोरदार तरीके से रोड शो शुरू कर यह जता दिया कि बीजेपी आलाकमान ने उन्हें मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाकर सही चाल चली है।
 
भाजपा नेतृत्व को विश्वास है कि 7 फरवरी को जब दिल्ली में वोटिंग होगी, तब दिल्ली के कुल 1,30,85,251 वोटरों में से 58,24,618 महिला वोटरों के लिए मुख्यमंत्री पद के तौर पर चुनने के लिए किरण बेदी से बेहतर उम्मीदवार कोई और नहीं होगा। दिल्ली के कुल मतदाताओं में से 72,60,633 पुरुष मतदाता हैं। इस बार कुल 1.72 लाख नए मतदाता भी मतदान में हिस्सा लेंगे, जिनमें युवा पुरुष और महिलाएं हैं और महिला मुद्दे पर संवेदनशील भी हैं। 
 
गौरतलब है कि निर्भया कांड के बाद दिल्ली में महिला अपराध की घटनाओं में ढाई गुना बढ़ोतरी दर्ज की गई है। समूचे देश को शर्मसार करने वाली निर्भया कांड की घटना वाले साल में जहां रोजाना महिलाओं के खिलाफ हुए अपराध को लेकर 17 मामले दर्ज होते थे, वहीं बीते साल 2014 में यह आंकड़ा बढ़कर 43 की संख्या तक पहुंच गया। दिसंबर 2012 में जब दिल्ली में एक छात्रा के साथ सामूहिक बलात्कार की घटना सामने आई तो महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों को लेकर व्यापक जन-आक्रोश पैदा हुआ। धरना प्रदर्शन हुए और तब इसके दबाव में आनन-फानन कदम उठाते हुए सरकार ने यौन हिंसा से संबंधित कानूनों को सख्त करने के साथ ही महिलाओं की सुरक्षा के लिए कई उपाय किये। लेकिन महिलाओं के खिलाफ अपराध की घटनाएं कम नहीं हुईं।   
दिल्ली में 2014 में रेप के कितने मामले दर्ज हुए... पढ़ें अगले पेज पर....
 



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