ग्वादर पर गदर, मोदी का दोहरे मोर्चे पर लड़ाई का इरादा

Last Updated: सोमवार, 22 अगस्त 2016 (14:51 IST)
एक ऐसा इलाका है जहां कभी पाकिस्तानी सरकार की चली ही नहीं। यह कभी पाक के कब्जे में रहा ही नहीं, यहां पाक सरकार की नहीं बल्कि कबीलाई सरदारों की चलती है। धूल भरी आंधी, बंजर जमीन, रेतीला इलाका और बर्बर लड़ाकू कबीले बलूचिस्तान की असली तस्वीर है। 1947 के बाद से ये कबीले पाक से आजादी के लिए लड़ रहे हैं।
बलूचिस्तान क्षेत्रफल में पाकिस्तान का सबसे बड़ा राज्य है। लेकिन उसकी जनसंख्या सबसे कम है। वे वहां की जनजातियों में शुमार किए जाते हैं। उनकी भाषा फारसी है। इसका कारण यह है कि बलोच जनता का बहुत बड़ा भाग ईरानी संस्कृति से जुड़ा हुआ है। बलूचिस्तान के अनेक भाग समय-समय पर ईरान की सीमाओं से भी जुड़े रहे हैं।
 
बलूचिस्तान पर भारत को अपना कोई कदम काफी सोच विचार कर रखना होगा। बलोच, अफगानिस्तान से लेकर ईरान की सीमा तक फैले हुए हैं। भारत पर सामरिक दबाव बनाने और चीन की कुटिल चालों में भारत को घेरने के लिए पाकिस्तान ने सामरिक महत्व वाला ग्वादर बंदरगाह चीन की एक कंपनी को सौंप दिया है। गहरे समुद्र में स्थित और भारतीय सीमा से नजदीक होने के कारण बंदरगाह चीन की कंपनी को सौंपे जाने का समझौता भारत के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। भारतीय सीमा से केवल 460 किमी दूर स्थित इस पोर्ट से भारत पर निगरानी रखी जाना बेहद आसान है और चीन यहां अपनी नौसेना तैनात कर सकता है।
 
पाकिस्तान जहां पश्चिमी छोर पर बलूचिस्तान से जूझ रहा है तो पूर्वी छोर पर पीओके में गिलगित-बाल्टिस्तान उसके लिए चुनौती बने हुए हैं। पाकिस्तान के गिलगित-बाल्टिस्तान में विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। यहां प्रदर्शनकारियों ने 'पाकिस्तान वापस जाओ' के नारे लगाने शुरू कर दिए हैं। बीते दिनों एक्टिविस्ट बाबा जॉन की रिहाई की मांग को लेकर विरोध की तस्वीरें दुनिया ने देखीं। बाबा जॉन को पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने 40 साल की सजा सुनाई है। साथ ही एंटी-टेररिस्ट लॉ के तहत पांच लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है।
 
जनवरी 2010 में भूस्‍खलन होने के चलते पहाड़ का एक हिस्सा टूटकर हुंजा नदी में गिर गया। इससे गिलगित-बाल्टिस्तान के कई गांव बह गए थे और एक हजार से ज्यादा लोग बेघर हो गए थे। इसको लेकर बाबा जान की अगुआई में यहां के लोगों ने आंदोलन चलाया और पाकिस्तान से बेघर हुए लोगों के लिए मुआवजे की मांग की। इसको लेकर कई प्रदर्शन किए गए। इन लोगों ने हिंसक प्रदर्शन किए। इसके बाद अगस्त 2011 में पाकिस्तान ने एंटी-टेररिज्म एक्ट के तहत बाबा जान और उनके साथियों को गिरफ्तार कर लिया।
 
जम्मू-कश्मीर के उत्तर में यह पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर और गिलगित-बलूचिस्तान का हिस्सा है। पश्चिम की ओर जाती जमीन की पट्टी में मीरपुर-मुजफ्फराबाद है। पीओके के बारे में बातचीत ज्यादातर मीरपुर-मुजफ्फराबाद के इर्द-गिर्द घूमती है। जबकि भारत ने हमेशा से ही गिलगित-बलूचिस्तान की स्वायत्तता को लेकर पाकिस्तान के रुख और उसके दिखावे का कड़ा विरोध किया है।
 
साठ के दशक में बने हाइवे से जुड़े पाक और गिलगिट-बलूचिस्तान क्षेत्र का सामरिक रूप से काफी महत्व है। चीन के साथ जुड़े होने के कारण यह भारत के लिए काफी अहम है। चीन ने 60 के दशक में गिलगित-बलूचिस्तान में होते हुए काराकोरम तक हाइवे बनाया था। इस हाइवे के कारण इस्लामाबाद और गिलगिट जुड़ गए थे। इससे आगे यह हाइवे चीन के जियांगजिंग प्रांत के काशगर शहर तक भी जाता है। चीन, जियांगजिंग को एक हाइवे द्वारा बलूचिस्तान के ग्वादर बंदरगाह से जोडऩे की योजना बना रहा है। चीन के राष्ट्रपति ने पाकिस्तान में विभिन्न योजनाओं के लिए 46 बिलियन डॉलर के निवेश का वादा किया है।
 
मोदी ने शिया बहुत गिलगित-बलूचिस्तान क्षेत्र में गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों का भी जिक्र किया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने कहा कि गिलगिट-बलूचिस्तान सहित पूरा जम्मू-कश्मीर ही भारत का अभिन्न अंग है। गिलगित-बलूचिस्तान में भारत के समर्थन और पाक-विरोधी रैलियां हो रही हैं। मोदी चाहते हैं कि विदेश मंत्रालय विदेश में रहने वाले पीओके के परिवारों से संपर्क करे।
 
1947 में कश्मीर के महाराजा ने भारत और पाकिस्तान में शामिल ना होकर, आजाद ही रहने का फैसला किया था। उन्होंने सोचा कि उनकी मुस्लिम बहुल प्रजा भारत के साथ जुडऩे का विरोध करेगी। नेहरू ने गिलगित-बलूचिस्तान क्षेत्र से पाकिस्तानी फौजों को हटाने जाने पर जोर दिया। 31 अक्टूबर 1947 को जब पाकिस्तानी सेना ने कबाइलियों के साथ मिलकर जम्मू-कश्मीर पर हमला किया और यह बारामूला तक घुस आई, तो महाराजा हरिसिंह परेशान हो गए। उन्होंने भारत से मदद मांगी और भारत के साथ मिलने के समझौते पर दस्तखत कर दिए। भारत ने हवाई रास्ते ने वहां अपनी फौज भेजी।
 
पूर्व कश्मीर रियासत का हिस्सा है पीओके : भारत का कहना है कि पीओके कश्मीर रियासत का ही हिस्सा है। ऐसे में भारत उसे अपना अभिन्न अंग कहता है। जिस हिस्से को भारत पीओके कहता है, वह पूर्व कश्मीर रियासत का ही वह हिस्सा है जो कि 22 अक्टूबर 1947 से ही पाकिस्तान के कब्जे में है। पाकिस्तान समर्थित कबाइलियों द्वारा जम्मू-कश्मीर पर हमला किए जाने के बाद से ही उस पर पाक ने कब्जा जमाया हुआ है।
 
विवादित क्षेत्र है गिलगित-बलूचिस्तान : गिलगित-बलूचिस्तान का 72 हजार 500 स्क्वेयर किलोमीटर का क्षेत्र ज्यादातर पहाड़ी इलाका है। इसी हिस्से में विश्व की दूसरी सबसे ऊंची चोटी के-2 है। नंगा पर्वत भी इसी हिस्से में है। गिलगित-बलूचिस्तान को पाकिस्तान विवादित क्षेत्र कहता है। पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह दावा करता है कि वह इस क्षेत्र के लोगों की आजादी का समर्थन करता है, लेकिन असलियत यह है कि गिलगित-बलूचिस्तान पर पाकिस्तान ने कब्जा किया हुआ है। जीबी ऑर्डर 2009 के द्वारा मीरपुर-मुजफ्फराबाद की व्यवस्था की ही तरह यहां भी व्यवस्था कायम कर दी गई है। 
 
पाकिस्तान कश्मीर को लेकर भारत में दहशत फैलाता रहता है। आजादी के नाम पर कश्मीरियों के युवाओं को हिंसा के रास्ते पर लाना और बेकसूर लोगों की हत्या के लिए उकसाना पाकिस्तान की नीयत में शामिल है, लेकिन बलूचिस्तान से पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। आजादी के लिए आंदोलन कर रहे बलोच नेताओं ने पाकिस्तान के इस्लामाबाद और लाहौर जैसे शहरों पर सीधे हमले की धमकी दी है। बलूची आंदोलनकारियों ने कहा कि अब पाकिस्तान जंग का मैदान बनेगा।
 
बलूचिस्तान के लोगों ने अब पाकिस्तान को सीधी धमकी दी है कि अब वह आत्मरक्षा की बजाय आक्रमण की नीति पर चलेंगे तो बलोच सेना अब पाकिस्तान को घर में घुसकर मारेगी। बलोच आंदोलनकारियों की बड़ी नेता नायला बलूच ने कहा है कि अब तक बलोच पाकिस्तान पर सीधे हमला नहीं करते थे और हम पाकिस्तानी हमले से खुद को बचाते रहते थे, लेकिन अब बलोच लोग और ज्यादा इंतजार नहीं कर सकते। बलोचस्तान में आंदोलन कर रहे नेता भारत से भी इस आंदोलन में समर्थन चाहते हैं। 
 
तीन संगठनों ने दी धमकी : बलूचिस्तान के लोगों का आरोप है कि पाकिस्तान की सेना ने उनकी जिंदगी नर्क से भी बदतर बना दी है। इस नर्क से निकलने के लिए अब उनका पाकिस्तान पर हमला करना जरूरी हो गया है। अब अपने आंदोलन को और तेज करने के लिए बलूच आंदोलनकारियों की उम्मीद तीन संगठनों पर टिकी है। बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट, बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी, बलूचिस्तान रिपब्लिकन आर्मी ने पाकिस्तान पर हमले की धमकी दी है। पाकिस्तान ने इन तीनों ही संगठनों पर प्रतिबंध लगाया हुआ है। इन संगठनों ने पाकिस्तान को धमकी दी है कि अगर उन्होंने अब बलूचिस्तान के महत्वपूर्ण इलाके ग्वादर में अपना दखल बढ़ाया तो खैर नहीं होगी।
 
चीन निवेश कर लूटना चाहता है : इन संगठनों ने आरोप लगाया है कि ग्वादर में चीन जो भी निवेश कर रहा है उसका असली मकसद बलूचिस्तान को लूटना है। बलूचिस्तान के प्रतिबंधित संगठनों ने धमकी दी है कि चीन समेत दूसरे देश ग्वादर में अपना पैसा बर्बाद न करें। दूसरे देशों को बलूचिस्तान की प्राकृतिक संपदा को लूटने नहीं दिया जाएगा। इन संगठनों ने बलूचिस्तान में काम कर रहे चीनी इंजीनियरों पर भी हमले बढ़ा दिए हैं।
 
अगले पन्ने पर दूसरा बांग्लादेश बन जाएगा बलूचिस्तान....
 



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