क्रांतिदूत चे गेवारा के घर में

-ओम थानवी

बताते हैं, चे ने जोर देकर अपने लिए वही घर चुना। बाकी मंत्री बड़े बंगले में रहते थे। शायद इसका एक कारण सुरक्षा रहा होगा। पर चे ने सुरक्षाकर्मी तक साथ रखने से इंकार कर दिया था। बाद में फिदेल के कहने पर सुरक्षाकर्मी लिए, लेकिन अनपढ़ और गरीब किसान, जिन्हें उन्होंने खुद प्रशिक्षण दिया। आखिर सियरा-माएस्त्रा के दुर्गम पहाड़ों-जंगलों में रहते हुए फिदेल के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आततायी फुलहेंसियो बातीस्ता के खिलाफ जो लड़ाई लड़ी, उसमें उन्हें किसानों का ही सहयोग मिला था।
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लेकिन वह चे का घर नहीं था। घर ठीक सामने सड़क के दूसरी तरफ था। औपनिवेशिक युग के ठाठदार बंगलों के बीच, पीले रंग का एक छोटा मकान। नीली दुछत्ती वाला। > > घर के भीतर लासारो नाम के जिस युवक ने हमारा स्वागत किया, उसने हमारी हथेली पर अपना नहीं चे के बेटे का कार्ड रखा : कामीलो गेवारा मार्श। लासारो की ठुड्डी पर दाढ़ी थी। मैंने कल्पना की, शायद कामीलो भी दाढ़ी रखता हो! फिदेल, चे और कामीलो सिएनफ्वेगोस- क्रांति के बाद जिसकी एक विमान दुर्घटना में मृत्यु हो गई- की तिकड़ी ने दाढ़ी को बड़ी इज्जत बख्शी। सियरा-माएस्त्रा के ये लड़ाके ‘बार्बूदोस’ (दढ़ियल) कहलाते थे। पहाड़ों से उतर कर वे सत्ता में आए, तब भी उनका वह रूप कायम रहा। कार्ल मार्क्स की जमी-जमाई अभिजात दाढ़ी से बहुत अलग उलझी, बिखरी, कामकाजी दाढ़ी। बाद में दूसरे देशों में छात्रों से लेकर तेज-तर्रार युवा नेताओं तक में यह शैली खूब पनपी।
बहरहाल, लासारो ने पहले संस्थान की गतिविधियों की कुछ जानकारी हमें दी। पता चला कि संस्थान में चे की बड़ी बेटी अलीदा गेवारा मार्श - जो पेशे से बच्चों की डॉक्टर है- की मेहनत से चे की अब जानी-मानी हो चुकी कृतियां ‘मोटर साइकिल डायरीज’, ‘बोलिवियन डायरी’, ‘बैक ऑन द रोड’, ‘अफ्रीकन ड्रीम’ और ‘वार इन कोंगो’ छप पाई हैं। चे के जीते जी सिर्फ वह निर्देशिका (गुरिल्ला वारफेयर) छपी थी जो उन्होंने सरकार के गठन के बाद सैन्य प्रशिक्षण के लिए अपने अनुभवों के आधार पर तैयार की थी। अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति जॉन कैनेडी ने बड़े कुतूहल से उसका अंग्रेजी में तर्जुमा करवाया था।

मैंने चे का घर देखने की गुजारिश की। मुश्किल यह है कि सामने नई इमारत बनने के बावजूद संस्थान का दफ्तर अब भी यहीं चलता है। कागज, कंप्यूटर, फैक्स, फोटोकापी की मशीनें। लेकिन इन सबके बीच कमरों- जिन्हें तोड़ा-फोड़ा नहीं गया है- को देखकर रहन-सहन की सादगी का अंदाजा सहज लग जाता है। बैठक के बाद दो कमरे हैं, एक सीधा लंबा गलियारा, पीछे बैठक-जैसा एक और ठिकाना। बैठक के सामने ऊपर जाती सीढ़ियां हैं। वहां दो कमरे और हैं। बस। यह उस व्यक्ति का बसेरा था, जिसकी तस्वीर देश के हर स्कूल-दफ्तर-अस्पताल में नुमाया है, जो दुनिया में क्यूबा का सबसे चर्चित चेहरा था, देश की मुद्रा उसके हस्ताक्षर से चलती थी और अमेरिकी पत्रिका ‘टाइम’ के मुताबिक जो बीसवीं सदी के सौ महारथियों में एक था।

इसी घर में चे की दूसरी पत्नी अलीदा मार्श ने चार बच्चों को जन्म दिया। चे विनोदी स्वभाव के थे। अक्सर मजाक करते, फुटबॉल की नहीं तो (नौ सदस्यों वाली) बेसबॉल की टीम जरूर बनाऊंगा! अलीदा और कामीलो के अलावा छोटा बेटा अर्नेस्तो भी हवाना में रहता है। चौथी संतान शीला ने इस साल जनवरी में अर्जेंटीना की नागरिकता ले ली है।



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