नक्सलियों का खतरनाक एजेंडा, 2050 तक लोकतंत्र का खात्मा...

संदीपसिंह सिसोदिया|
आसानी से इंटरनेट पर उपलब्ध इस नक्सली साहित्य में क्रांति और युद्ध की रणनीति तथा तौर तरीकों के बारे में कामरेड माओ, लेनिन, कार्ल मार्क्स जैसे प्रसिद्ध विचारकों के लेख सहित ऐसी कई सामग्री है जो भारत जैसे बड़े लोकतांत्रिक देश में लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुई सरकार के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष छेड़ने के लिए प्रेरित करती है।

यही नहीं इस दस्तावेज में भारत में रहने वाले गरीबों से लेकर मध्यम वर्ग, उच्च मध्यम वर्ग और उच्च वर्ग के बारे में जानकारी देते हुए उनसे समर्थन जुटाने और उनकी सहानुभूति हासिल करने तथा युद्ध के तरीके सुझाए गए हैं।

इस दस्तावेज से पता चलता है कि कैसे नक्सली पिछड़े इलाकों को आधार-भूमि बनाते है। यह दस्तावेज दर्शाता है कि किस तरह नक्सलवादी सामाजिक, वैचारिक तरीके से अपने लक्ष्य के लिए स्वयंसेवी, मानवाधिकारवादी संगठनों को अपने समर्थन में ला सकते हैं। कई जानकारियों के मुताबिक आशंका है कि कुछ पूर्व सैनिक भी माओवादियों को हिंसक कार्यवाइयों को अंजाम देने में मदद कर रहे हैं। देश को गृहयुद्ध में झोंकने की तैयारी... आगे पढ़ें...



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