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Corona Jammu Kashmir Update : मई के 25 दिनों में 1379 ने गंवाई जान जम्मू कश्मीर में
जम्मू। जम्मू कश्मीर में भले ही कोरोना संक्रमितों की संख्या कम हुई हो लेकिन मौतों का आंकड़ा हैरान करने वाला है। पिछले 14 दिनों में प्रदेश में कोरोना संक्रमितों की संख्या में 50 परसेंट कमी आने का सरकारी दावा किया जाने लगा है। प्रदेश में होने वाली मौतों में से 37 परसेंट सिर्फ इस महीने के 25 दिनों में ही हुई हैं।
पिछले महीने तक मरने वालों की संख्या 2283 ही थी। पर अब यह आज सुबह तक 3662 को पार कर चुकी थी। अर्थात मई महीने के पहले 25 दिनों के दौरान 1379 मरीजों ने दम तोड़ा था।
केंद्रीय अधिकारियों को मुहैया करवाए गए सरकारी आंकड़ों में प्रदेश के मुख्य सचिव ने दावा किया था कि पिछले दो हफ्तों में प्रतिदिन आने वाले 5500 मामलों में अब लगातार गिरावट आ रही है जिस कारण यह संख्या अब प्रतिदिन 2200 औसतन तक सिमट कर रह गई है।
पर मौत के आंकड़े कम नहीं हो रहे हैं। कल भी 53 लोगों की मौत हुई थी तो सबसे अधिकतम 73 लोग एक दिन में दम तोड़ चुके हैं। मरने वालों के आंकाड़ों के प्रति खास बात यह थी कि मई महीने में इसमें जम्मू संभाग में मरने वाले सबसे ज्यादा थे जबकि कुल मौतों में अभी भी कश्मीर संभाग बढ़त लिए हुए हैं।
अधिकारियों के मुताबिक, जम्मू संभाग में बाहरी प्रदेशों से आने वालों का दौर अभी रूका नहीं है। जिस कारण मौतें ज्यादा हुई हैं। हालांकि कई एनजीओ संस्थाएं इसके लिए बदतर स्वास्थ्य सेवाओं को दोषी करार देते हुए आरोप लगाती थीं कि कश्मीर में स्वास्थ्य सेवाएं बहुत ही बेहतर स्थिति में हैं।
इसे यूं भी समझा जा सकता है कि कश्मीर में ब्लैक फंगस के मामले कई सालों से सामने आ रहे थे और उनमें से कईयों का सफल इलाज भी किया जा चुका था पर जम्मू में मात्र दो मामले सामने आने से ही चिकित्साधिकारियों के हाथ पांव फूल गए हैं क्योंकि इससे निपटने का उनके पास न ही अनुभव है और न ही कोई इलाज।
पिछले महीने तक मरने वालों की संख्या 2283 ही थी। पर अब यह आज सुबह तक 3662 को पार कर चुकी थी। अर्थात मई महीने के पहले 25 दिनों के दौरान 1379 मरीजों ने दम तोड़ा था।
केंद्रीय अधिकारियों को मुहैया करवाए गए सरकारी आंकड़ों में प्रदेश के मुख्य सचिव ने दावा किया था कि पिछले दो हफ्तों में प्रतिदिन आने वाले 5500 मामलों में अब लगातार गिरावट आ रही है जिस कारण यह संख्या अब प्रतिदिन 2200 औसतन तक सिमट कर रह गई है।
अधिकारियों के मुताबिक, जम्मू संभाग में बाहरी प्रदेशों से आने वालों का दौर अभी रूका नहीं है। जिस कारण मौतें ज्यादा हुई हैं। हालांकि कई एनजीओ संस्थाएं इसके लिए बदतर स्वास्थ्य सेवाओं को दोषी करार देते हुए आरोप लगाती थीं कि कश्मीर में स्वास्थ्य सेवाएं बहुत ही बेहतर स्थिति में हैं।
इसे यूं भी समझा जा सकता है कि कश्मीर में ब्लैक फंगस के मामले कई सालों से सामने आ रहे थे और उनमें से कईयों का सफल इलाज भी किया जा चुका था पर जम्मू में मात्र दो मामले सामने आने से ही चिकित्साधिकारियों के हाथ पांव फूल गए हैं क्योंकि इससे निपटने का उनके पास न ही अनुभव है और न ही कोई इलाज।
