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Written By WD

अंतमलन संस्कार

अंतमलन संस्कार
एक बार शिकागो के एक सरकारी अस्पताल में पुरोहित को बुलाने के विषय को लेकर कर्मचारियों की बैठक में विचार-विमर्श हो रहा था। उस समय मस्तिष्क का ऑपरेशन करने वाले एक प्रसिद्ध सर्जन ने ये बातें कहीं- 'मैं काथलिक नहीं हूँ, फिर भी में हमेशा पुरोहित को बुलाता हूँ। उसके आने पर मैं आश्वस्त हो जाता हूँ कि रोगी को बेहोशी की दवा मिलने के पहले वह सब कुछ मिलेगा, जो पुरोहित को उसे देना चाहिए। मैं नहीं जानता हूँ कि पुरोहित उसे क्या देता है, परन्तु वह जो कुछ हो, वह रोगी के ऑपरेशन में बेहतर साबित होता है।'

हाँ, इस संस्कार का प्रभाव अकसर लाभप्रद होता है। रोगी के लिए इस संस्कार का उल्लेख धर्मग्रंथ में सुस्पष्ट रूप से किया गया है। संत याकूब के पत्र में हम पढ़ते हैं कि 'आपके बीच कोई बीमार है? तो वह गिरजा के स्थविरों को बुलावे कि वे उसको प्रभु के नाम में तेल से मलते हुए उस पर प्रार्थना करें। वह विश्वासपूर्ण प्रार्थना रोगी को बचा लेगी और प्रभु उसको फिर स्वस्थ्य बना देंगे। इसके अतिरिक्त यदि उसने पाप किए हैं तो उसे उनकी भी क्षमा मिल जाएगी।' (याकूब 5:15-16)

अंतमलन का यह संस्कार किसी भी ऐसे रोगी को दिया जाना चाहिए, जो गंभीर बीमारी से पीड़ित है, जैसे टी.बी., हृदय रोग पीड़ित, बुढ़ापा, निमोनिया, गंभीर दुर्घटना आदि।

यह आवश्यक नहीं है कि व्यक्ति वास्तव में मर रहा हो। साधारण प्रक्रिया यह है, पुरोहित बीमार व्यक्ति का पाप स्वीकार सुनता है, उसे परमप्रसाद देता है और तब पवित्र तेल से अभ्यंजित करते हुए कहता है, 'इस पवित्र तेल के अभ्यंजन द्वारा, प्रभु अपने प्रेम और दया में पवित्रात्मा की कृपा से तुम्हारी सहायता करें... और जो प्रभु तुम्हें पाप से मुक्त करता है, तुम्हारी रक्षा करें और उद्धार करें।'

और जाने से पहले, पुरोहित वह विशेष आशीष देता है, जो अपने साथ पूर्ण दंडामोचन लाता है, जिसका अर्थ है पापों की सजा पूरी तरह से क्षमा, बशर्ते पापों के लिए सच्चा पश्चाताप किया गया हो।

'अचानक मृत्यु' की दशा में- जैसे दिल के दौरे या दुर्घटना के कारण, कैसे भी हो पुरोहित को बुलाओ, क्योंकि चिकित्सा विज्ञान से हम जानते हैं कि कभी-कभी व्यक्ति उसके हृदय की धड़कन बंद होने के बावजूद भी जीवित रह सकता है। ऐसी दशा में पुरोहित शर्तानुसार अभ्यंजन करता है... सिर्फ उसी अवस्था में जब वह जीवित रहता है।

बीमार व्यक्ति के साथ बारम्बार प्रार्थना करो और यदि वह लंबी प्रार्थनाओं का अनुसरण नहीं कर सके तो छोटी-छोटी प्रार्थनाएँ करने में उसकी सहायता करो, जैसे- 'मेरे येसु, दया कर।' 'मेरे प्रभु, मेरे ईश्वर', 'येसु मेरी सहायता करो' 'मरिया, मेरे लिए प्रार्थना पर।'

गैर काथलिक अस्पताल में भर्ती होने से पहले रोगी को पाप स्वीकार और पवित्र परमप्रसाद के लिए जाना चाहिए और यदि यह अस्पताल में लंबी अवधि तक रुकना है, मान लिया एक महीने के लिए तो अपने संबंधियों एवं दोस्तों से पूछो कि वे तुम्हारे पुरोहित से पवित्र परमप्रसाद लाने को कहें और अपनी नर्स से कहो कि जब तुम्हारी हालत गंभीर हो जाए या मृत्यु का भय रहे तो वे पुरोहित को बुलाएँ।
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