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ईस्टर संडे : क्यों खास माना गया है यह पर्व, जानिए महत्व एवं 6 खास बातें

शनिवार,अप्रैल 20, 2019
Easter
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दुनियाभर में ईसाई समुदाय के लोग प्रभु यीशु के जी उठने की याद में ईस्टर संडे (रविवार) मनाते हैं।
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ईस्टर फेस्टिवल वसंत ऋतु में पड़ता है। ईस्टर ईसाइयों का सबसे बड़ा पर्व है। महाप्रभु ईसा मसीह मृत्यु के तीन दिनों बाद इसी दिन फिर जी उठे थे, जिससे लोग हर्षोल्लास से झूम उठे।
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'तुम एक-दूसरे को प्रेम करो, जैसे मैंने तुमसे प्रेम किया है। यदि तुम आपस में प्रेम रखोगे तो इसी से सब जानेंगे कि तुम मेरे शिष्य हो।'
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ईसाई समाज में गुड फ्रायडे का दिन बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। गुड फ्रायडे का अर्थ है शुभ शुक्रवार।
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इस वर्ष शुक्रवार, 19 अप्रैल 2019 को गुड फ्राइडे मनाया जा रहा है। गुड फ्राइडे एकमात्र ऐसा दिन है जिसका निर्धारण यहूदी करते हैं। यहूदी फरवरी माह में चांद देखकर इस दिन का निर्धारण करते हैं
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ईसा मसीह ने विरोध और यातनाएं सहते हुए अपने प्राण त्याग दिए उन्हीं की आराधना और वचनों के माध्यम से इंसानियत की राह पर चलने का ज्ञान देने वाला दिन है गुड फ्राइडे।
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यीशु का संपूर्ण जीवन एक ईश्वरीय योजना को पूरा करने के लिए था। उन्हें सलीब पर चढ़ाया जाना कोई अपवाद नहीं है। यीशु को तो पहले से ही ज्ञात था कि ईश्वर की इच्छा क्या है।
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रविवार, 14 अप्रैल 2019 को पाम संडे मनाया जा रहा है। पाम संडे यानी खजूर रविवार को ईसाई धर्म के अनुयायियों के प्रमुख त्योहारों में से एक त्योहार मनाया जाएगा।
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ईसा मसीह के बारे में कई तरह की बातें वक्त-वक्त पर सामने आती रही हैं। उनमें से कुछ को विवादित माना गया और कुछ पर अभी भी शोध जारी है। हालांकि इन बातों के सच होने का दावा हम नहीं करते। आओ जानते हैं ऐसी ही 10 रहस्यमयी बातों के संबंध में जानकारी। उक्त ...
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योरप के विभिन्न भागों में हंसी-खुशी के विभिन्न अवसरों पर वृक्षों को सजाने की प्राचीन परंपरा थी। जर्मनी में 24 दिसंबर को एक पर्व मनाया जाता था और उसी दिन एक रहस्यात्मक नाटक भी खेला जाता था- 'अदन का वृक्ष'। संभव है इन परंपराओं ने क्रिसमस वृक्ष की ...
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सम्राट आगस्ट्स के हुक्म से रोमन जगत की मर्दुमशुमारी हो रही थी। उसमें शामिल होने के लिए यूसुफ नाम का यहूदी बढ़ई नाजरेत नगर से वेथलहम के लिए रवाना हुआ। वहीं पर उसकी पत्नी मरियम (मेरी) के गर्भ से ईसा का जन्म हुआ।
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मानवता को लेकर प्रभु ईसा ने पांच आदेश दिए। उन्होंने कहा,
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जिस तरह स्वयं से प्रेम करते हैं वैसा ही सबसे किया जाना चाहिए। इस संदर्भ में 'पड़ोसी' के उल्लेख का अर्थ यही हो सकता है कि परिवार के बाद यदि जीवन में पहला व्यवहार किसी से होता है तो
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ईसाई धर्म के संस्थापक ईसा मसीह हैं जिनका जन्म बेथलेहम में हुआ था। भारत में ईसाइयों की संख्या लगभग 2.78 करोड़ है। कब ईसाई धर्म का भारत में प्रवेश हुआ और कैसे ईसाई धर्म भारत में फैला इस संबंध में संक्षिप्त जानकारी।
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दुनियाभर में ईसाई समुदाय के लोग प्रभु यीशु के जी उठने की याद में ईस्टर संडे (Easter Sunday) मनाते हैं। यह दिन भाईचारा, स्नेह, क्षमा और प्यार का प्रतीक माना जाता है। आइए जानें ईस्टर संडे (रविवार) के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी...
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पूरे विश्व में गुड फ्रायडे की तैयारी में 40 दिन का शोक मनाया जाता है। जिसमें करोड़ों मसीह यीशु के अनुयायी निराहार उपवास करते हैं। यीशु मसीह के दुखों को स्मरण करके
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ईसाई धार्मिक ग्रंथों के अनुसार मृत्यु के तीन दिनों बाद प्रभु यीशु पुनर्जीवित हो गए थे। ईसा मसीह के जी उठने की याद में दुनिया भर के ईसाई समुदाय इस दिन 'ईस्टर संडे' मनाते हैं।
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ईस्टर ईसाइयों का सबसे बड़ा पर्व है। यह वसंत ऋतु में पड़ता है। महाप्रभु ईसा मसीह मृत्यु के तीन दिनों बाद इसी दिन फिर जी उठे थे, जिससे लोग हर्षोल्लास से झूम उठे। इसी की स्मृति में यह पर्व संपूर्ण ईसाई-जगत्‌ में प्रतिवर्ष बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है।
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ईसाई धर्म में मुख्यतया दो पर्व हैं क्रिसमस व ईस्टर। दोनों प्रमुख हैं ईस्टर अर्थात ख्रीस्त का जी उठना। क्रिसमस के दिन यीशु ख्रीस्त का जन्म हुआ था।
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