बूढ़ों ने जवानों को पछाड़ा
खाटी राजनीतिज्ञ या अनुभवी ही राजनीति में कामयाब होते हैं। राजनीति की एबीसीडी नहीं जानने वाले युवाओं को चुनाव जीतकर विधानसभा तक का सफर तय करने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। इसका उदाहरण छत्तीसगढ़ विधानसभा में देखा जा सकता है। सदन में अभी भी युवा विधायकों का अभाव है। वर्तमान में मात्र 20 विधायक हैं, जिनकी उम्र 45 वर्ष से कम हैं। सिर्फ एक ही विधायक की उम्र 30 वर्ष है।90
सदस्यीय छत्तीसगढ़ विधानसभा में विधायकों की औसत आयु 51 वर्ष है। दो विधायक काफी बुजुर्ग और अनुभवी हैं, उनकी उम्र 75 वर्ष से अधिक ही है। 46 से 50 वर्ष की उम्र के 22 विधायक हैं। 28 विधायक 51 से 60 वर्ष की आयु वाले हैं। 11 विधायक रिटायरमेंट की उम्र सीमा से ऊपर हैं, यानी 61 से 75 वर्ष के बीच के। राजनीतिक दलों के लिहाज से देखें तो भाजपा के विधायकों की औसत आयु 49.5 वर्ष है, जबकि कांग्रेस की 55.7 वर्ष है। इस आधा पर हम कह सकते हैं कि भाजपा की टीम कांग्रेस के मुकाबले थोड़ी युवा है। आज सभी राजनीतिक दलों में युवाओं को अधिक से अधिक टिकट देने की माँग उठने लगी है। प्रदेश की प्रमुख पार्टियाँ कांग्रेस व भाजपा की युवा विंग इसके लिए अपने हाईकमान पर दबाव भी बना रही हैं। युवा वर्ग शिक्षित होने के साथ ही उनमें राजनीतिक जागरूकता भी अधिक है। कुल मतदाताओं में से 50 फीसदी से अधिक युवा हैं। टिकट के लिए युवा काफी सक्रिय हैं। छात्र नेता भी चुनाव मैदान में उतरने उतावले नजर आ रहे हैं। कुछ तो टिकट नहीं मिलने पर निर्दलीय चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं। आमतौर पर चुनाव में जीत-हार का गणित अलग ही होता है। माना जा रहा है कि इस विधानसभा चुनाव में पार्टियाँ युवाओं पर दाँव लगा सकती हैं। आने वाला समय ही बताएगा कि इनमें से कितने युवा अपनी पार्टी और क्षेत्र का प्रतिनिधित्व विधानसभा में कर पाते हैं। (नईदुनिया)