Last Modified: रायपुर ,
बुधवार, 5 नवंबर 2008 (12:23 IST)
गया अँगूठा छाप का जमाना
विधायकों की शैक्षणिक योग्यता का आकलन करें तो 90 में से 39 प्रतिशत विधायक स्नातक हैं। इनमें ज्यादातर कला संकाय के हैं। साथ ही 54 प्रतिशत विधायक स्नातकोत्तर भी हैं। विधानसभा के दो सदस्य मानद उपाधि से सम्मानित हैं, वहीं तीन सदस्यों के पास व्यावसायिक कोर्स का अनुभव है और पाँच सदस्य चिकित्सीय उपाधिधारी हैं। सिर्फ 10.5 प्रतिशत विधायक ही ऐसे हैं, जो हाईस्कूल तक की ही शिक्षा ले पाए हैं। एकमात्र विधायक ही निरक्षर हैं। पाँच सदस्य विधि स्नातक और दास सदस्य स्नातकोत्तर व विधि स्नातक दोनों हैं।
विधानसभा किसी राज्य की सबसे बड़ी पंचायत होती है, जहाँ हर कोई पहुँचना चाहता है। विधायक बनने के लिए शैक्षणिक योग्यता की अर्हता नहीं है। केवल 25 वर्ष की आयु पूर्ण करना और राज्य का नागरिक होना आवश्यक है। संसदीय लोकतंत्र में विधायिका कानून बनाने के साथ ही कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का निर्वहन करती है। विधायक जनहित से जुड़े मुद्दों को सदन में उठाकर सरकार का ध्यानाकर्षित करते हैं।
इस दृष्टि से यदि कोई शिक्षित व्यक्ति जनप्रतिनिधि निर्वाचित होता है, तो निरक्षर की तुलना में अपेक्षाकृत अपने क्षेत्र की जनता के लिए वह अच्छे से काम कर सकता है। इस मामले में छत्तीसगढ़ की जनता काफी जागरूक नजर आ रही है। अगले चुनाव में भी अधिक से अधिक शिक्षित उम्मीदवार ही निर्वाचित हो सकते हैं। विभिन्न राजनीतिक पार्टियाँ भी प्रत्याशियों के चयन में जीतने योग्य के साथ ही शैक्षणिक योग्यता को महत्वपूर्ण मापदंड मान रही हैं।