अनिल कुंबले : कैसा रहेगा कल
भारतीय क्रिकेट टेस्ट टीम के कप्तान इस समय तीन टेस्टों की श्रंखला के लिए श्रीलंका दौरे पर हैं। उन्होंने अब तक टीम को बेहतरीन सेवाएँ दी हैं। खिलाड़ी के रूप में वे दुनिया के तीसरे सर्वाधिक विकेट लेने वाले गेंदबाज हैं। देखें उनका आने वाला कल कैसा रहेगा?अनिल कुंबले का जन्म जिस समय हुआ उस समय सूर्य जिस स्थान पर विराजमान थे, उसके प्रभाव से जातक प्रकृति से क्रोधी स्वभाव और पर्यटक होता है एवं उच्च पद पर पहुँचता है। मंगल की स्थिति के कारण प्रबल पराक्रमी होते हुए भी पारिवारिक तथा अन्य कार्यों की विफलता के कारण दु:खी रहता है। परंतु राहु अनिल को बली और साहसी बनाता है वह उन्हें उच्च शिखर की ओर पहुँचाने में सहायक है।
बुध की स्थिति के कारण अन्य ग्रह भी अच्छे परिणाम देते हैं और इनके भाग्य से दूसरे का भाग्य भी प्रबल हो जाता है। अनिल की कुंडली में गुरु जिस स्थान पर विराजमान हैं, उसी के प्रभाव से अनिल श्रीलंका में भारतीय क्रिकेट टेस्ट टीम की कप्तानी संभाल रहे हैं। कुंडली में तुला का गुरु विराजमान है। ऐसे जातक की कुंडली सुखी, धनवान तथा प्रशंसा दिलाने वाली होती है। जो अनिल कुंबले के भाव हैं। परंतु इसका विपरीत प्रभाव यह होता है कि व्यक्ति सब कुछ पाने के बाद भी संतुष्ट नहीं हो पाता है। शुक्र के प्रभाव से स्त्री व परिवार से सुख होते हुए भी संतुष्ट न रहने की प्रवृत्ति होती है। शुक्र के प्रभाव से जातक धनदान देने में और युद्ध (झगड़ा) करने में रुचि नहीं रखता। वर्तमान में साहस से आगे बढ़ते रहें, भाग्य आपके साथ है।विरोधी पक्ष भी गुप्त रूप से आपकी प्रशंसा करेंगे। सितंबर मध्य से अक्टूबर अंत तक सोच-समझकर आगे कदम बढ़ाना हितकर होगा। विरोधी पक्ष प्रगति में रुकावट ला सकता है। अनिल का जन्म सूर्य महादशा में हुआ। वर्तमान में राहु की महादशा है जो 28 सितंबर 1992 से प्रारंभ हुई थी। यह 28 सितंबर 2009 तक चलेगी।
राहु की महादशा के अंतर्गत चंद्र दशा 10 सितंबर 2009 तक रहेगी। कार्य में शीतलता आ सकती है। अत: श्वेत वस्त्र, चावल, श्वेत पुष्प, घी, शंख, दही, मोती, कपूर का दान करना चाहिए। राहु की शांति के लिए भी जाप कराना चाहिए। 28 सितंबर 2010 से 29 सितंबर 2026 तक गुरु की महादशा चलेगी। अनिल के लिए बुधवार का दिन भाग्यशाली है, परंतु मंगलवार को लंबी यात्रा न करें। हीरा, मोती पहनें। अनिल कुंबले को अपना विश्वास बनाए रखने के लिए प्रयास करते रहना चाहिए क्योंकि अक्टूबर अंत में विश्वासपात्र व्यक्ति से विश्वासघात करने का योग बनता है। अक्टूबर अंत से दिसंबर मध्य के बीच विशिष्ट प्रगति के योग बनते हैं। गणमान्य व्यक्ति आपके गुणों की प्रशंसा करेंगे। सोचा हुआ कार्य होने से मन प्रफुल्लित रहेगा। दिसंबर मध्य से फरवरी के बीच विरोध व संघर्ष का सामना करना पड़ सकता है। आशा-निराशा का दौर रहेगा। अत: नया कदम उठाने से पहले पूर्ण विचार कर लें। फरवरी से मार्च के अंत में लंबी यात्रा शुभ रहेगी। इस समय शुभ अवसर आएगा। अत: इसका लाभ अवश्य उठाएँ। शुभ कार्य में खर्च होने के योग हैं।
लेखक के बारे में
पं. सुरेन्द्र बिल्लौरे