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Last Updated : शुक्रवार, 23 जनवरी 2026 (15:03 IST)

Border 2 Movie Review: इमोशन में डूबी वॉर फिल्म

border 2 movie review sunny deol war emotional film hindi
गदर 2 की ऐतिहासिक कामयाबी के बाद सनी देओल एक बार फिर चर्चाओं के केंद्र में आ गए और उनकी इस सफलता ने ‘बॉर्डर’ बनाने वालों की आंखों में भी नई चमक भर दी। 1997 में रिलीज हुई बॉर्डर सनी देओल के करियर की मील का पत्थर मानी जाती है और अब करीब 29 साल बाद बॉर्डर 2 दर्शकों के सामने है। खास बात यह है कि 68 वर्षीय सनी देओल एक बार फिर लीड रोल में हैं और पूरी फिल्म अपने कंधों पर उठाए हुए नजर आते हैं।
 
रिलीज से पहले बॉर्डर 2 की कहानी को लेकर ज्यादा खुलासा नहीं किया गया था। फिल्म 1971 के भारत-पाक युद्ध की पृष्ठभूमि पर आधारित है और बैटल ऑफ बसंतसर और अन्य घटनाओं से भी प्रेरणा लेती है। दरअसल यह फिल्म भारतीय सेना, एयरफोर्स और नेवी को एक ट्रिब्यूट के तौर पर पेश की गई है, जो तमाम विपरीत परिस्थितियों में भी देश की रक्षा के लिए हमेशा मुस्तैद रहते हैं।
 
निर्देशक अनुराग सिंह ने बॉर्डर वाले पुराने और आजमाए हुए टेम्पलेट को ही चुना है और बिना घुमाए-फिराए सीधे दिल की बात कहने पर भरोसा किया है। आज के दौर की तेज-तर्रार, हाई-टेक और स्टाइलिश वॉर फिल्मों के बजाय बॉर्डर 2 ओल्ड-स्कूल फिल्ममेकिंग की तर्ज पर चलती है। यह फिल्म दिमाग से ज्यादा दिल से बनाई गई महसूस होती है और यही इसकी सबसे बड़ी ताकत भी बनती है।
 
करीब तीन घंटे 19 मिनट की इस फिल्म का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा सैनिकों के आपसी भाईचारे, पत्नी और बच्चों से रिश्ते, मां की ममता, पिता की शान, भारत माता पर कुर्बान होने के जज्बे और हर मुश्किल में हार न मानने वाली जिद को समर्पित है। यही वजह है कि फिल्म बार-बार इमोशन से जुड़ती है और दर्शकों को भावनात्मक रूप से बांधने की कोशिश करती है।
 
फिल्म में सनी देओल लेफ्टिनेंट फतेह सिंह कालेर, वरुण धवन मेजर होशियार सिंह दहिया, दिलजीत दोसांझ फ्लाइंग ऑफिसर निर्मल जीत सिंह सेखों और अहान शेट्टी लेफ्टिनेंट कमांडर एमएस रावत की भूमिका में नजर आते हैं। ये किरदार अलग-अलग फोर्स से हैं और कहानी इन्हें एक साझा मिशन के तहत साथ लाती है।
 
कहानी के मुताबिक एक आर्मी प्रोग्राम के तहत सेना, एयरफोर्स और नेवी के अधिकारी फतेह सिंह के नेतृत्व में साथ आते हैं ताकि आपसी तालमेल और समझ बढ़ाई जा सके। शुरुआत में होशियार सिंह, सेखों और रावत के बीच नहीं बनती, लेकिन धीरे-धीरे तीनों के बीच दोस्ती गहराती है। इन तीनों की नोकझोंक, आपसी चुहलबाजी और बार-बार सजा पाने वाले सीन मनोरंजक हैं।

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अनुराग सिंह ने हर कलाकार के लिए एक दमदार एंट्री सीन बुना है, जिनमें खास तौर पर सनी देओल और वरुण धवन के सीक्वेंस प्रभावशाली बन पड़े हैं। इसके बाद तीनों युवा कलाकारों के जरिये सेना की बॉन्डिंग और आपसी भरोसे को दिखाया गया है, जो फिल्म की भावनात्मक रीढ़ बनता है।
 
बॉर्डर की तरह ही यहां भी सैनिकों के परिवार को खास अहमियत दी गई है। वरुण धवन एक ऐसे फौजी का बेटा बने हैं, जिनके पिता शहीद हो चुके हैं। दिलजीत दोसांझ का शादी के लिए लगातार मना करते-करते आखिरकार हां कहना और वरुण का शादी के बाद पहली बार पत्नी का चेहरा देखना, ऐसे कई छोटे-छोटे पल फिल्म में बड़ी सादगी और संवेदनशीलता के साथ पेश किए गए हैं। यही सादगी इन दृश्यों को बनावटी नहीं, बल्कि दिल से जुड़ा हुआ बनाती है। सनी देओल के परिवार से जुड़ी कहानी तो दर्शकों को खास तौर पर इमोशनल कर देती है।
 
इन चारों प्रमुख किरदारों के जरिये सेना के परिवारों के जीवन की झलक दिखाई गई है। मां, बहन और पत्नियों के किरदारों को भी उभारा गया है, जो बहादुरी के साथ देश की रक्षा में लगे अपने बेटों, भाइयों और पतियों पर गर्व करती हैं। फिल्म यह भी जताती है कि इन परिवारों का त्याग भी किसी बलिदान से कम नहीं है।
 
फिल्म का अंतिम घंटा पूरी तरह युद्ध पर आधारित है और हमारे सैनिकों के शौर्य को समर्पित है। इसमें नेवी, एयरफोर्स और आर्मी की बहादुरी को दिखाया गया है और यह बताया गया है कि कैसे संख्या बल और संसाधनों में कमी के बावजूद हमारे जवान अपने जज्बे के दम पर लड़ाई लड़ते हैं। सनी देओल का शिवाजी और भगत सिंह वाले जज्बे का डायलॉग सैनिकों का मनोबल बढ़ाता है और आखिर में सनी देओल की पावरफुल इमेज के मुताबिक एक ऐसा सीन भी रखा गया है, जिसमें वह दुश्मनों की धज्जियां उड़ा देते हैं।
 
फिल्म सिर्फ मनोरंजन ही नहीं करती, बल्कि सेना के प्रति सम्मान की भावना को भी मजबूत करती है। ‘फौजी घर जरूर आता है, चाहे जीत कर आए या याद बन कर’ जैसे संवाद समय-समय पर फिल्म के इमोशनल ग्राफ को और ऊंचा कर देते हैं। हालांकि कुछ दर्शकों को फिल्म की लंबाई खल सकती है। खास तौर पर अहान शेट्टी वाला ट्रैक कमजोर लगता है और इसे थोड़ा छोटा किया जा सकता था।

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अनुराग सिंह ने पारंपरिक युद्ध फिल्मों वाला ही रास्ता चुना है — युद्ध से पहले आपसी मस्ती, पारिवारिक इमोशन और अंत में बड़ा युद्ध। लेकिन जिस तरह से उन्होंने इन रंगों को मिलाया है, वह बॉर्डर 2 की अपील को बढ़ाता है। फिल्म को जरूरत से ज्यादा ड्रामैटिक या दुश्मनों के खिलाफ जरूरत से ज्यादा आक्रामक होने से भी बचाया गया है। फोकस भारत के बहादुर जवानों पर ही रखा गया है।
 
कुछ इमोशनल सीन बेहद प्रभावशाली बन पड़े हैं। जैसे दो सैनिक चिट्ठी पढ़ते हैं — एक को मां के गुजरने की खबर मिलती है और दूसरे के यहां बेटी के जन्म की खुशखबरी आती है। इसी तरह सनी देओल का अपने बेटे का लिखा खत पत्नी को सुनाना और फिर बुरी खबर का आ जाना, ऐसे सीन फिल्म को भावनात्मक रूप से और मजबूत बनाते हैं।
 
68 वर्ष की उम्र में भी सनी देओल लीड रोल निभा रहे हैं, जबकि उनके समकालीन कलाकार कब के कैरेक्टर रोल में चले गए हैं। सनी ने एक्शन दृश्यों में दौड़-भाग भी की है और दुश्मनों को ललकार भी लगाई है। शुरुआती दृश्यों में उनका उच्चारण थोड़ा अजीब लगता है, लेकिन बतौर हीरो उन्होंने पूरी फिल्म का भार मजबूती से संभाला है।
 
वरुण धवन को रिलीज से पहले काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था, लेकिन उन्होंने अपने किरदार को संतुलित तरीके से निभाया है। हरियाणवी लहजा उनसे कई बार फिसलता है, लेकिन अभिनय के स्तर पर वह ठीक रहते हैं। दिलजीत दोसांझ अपने स्क्रीन प्रेजेंस और एक्टिंग के दम पर छा जाते हैं। अपनी होने वाली पत्नी से मिलने वाला सीन खास तौर पर देखने लायक है। अहान शेट्टी कमजोर कड़ी साबित होते हैं और उनके हिस्से में करने के लिए भी बहुत कुछ नहीं है। मोना सिंह, मेधा राणा, अन्या सिंह और सोनम बाजवा को सीमित स्क्रीन टाइम मिला है, लेकिन जो भी मौके मिले, उन्होंने उन्हें ठीक-ठाक तरीके से निभाया है।
 
फिल्म के गानों के बोल दमदार हैं। ‘घर कब आओगे’, ‘हिंदुस्तान मेरी जान’ और ‘मिट्टी के बेटे’ जैसे गाने सुनने लायक हैं और कहानी के साथ भावनात्मक रूप से जुड़ते हैं। युद्ध के सीन तकनीकी रूप से बहुत ऊंचे दर्जे के नहीं हैं, लेकिन निराश भी नहीं करते। वैसे भी फिल्म में तकनीक से ज्यादा इमोशन और जज्बे पर फोकस किया गया है।
 
कुल मिलाकर बॉर्डर 2, बॉर्डर की ही लकीर पर चलती है और कोई बिल्कुल नई बात नहीं कहती, लेकिन देशप्रेम, भावना और सैनिकों की बहादुरी को जिस sincerity के साथ पेश किया गया है, वह इसे प्रभावी बनाता है। यही वजह है कि यह फिल्म अपने पुराने फॉर्मूले के बावजूद दर्शकों के दिल तक पहुंचने में कामयाब रहती है।
 
  • BORDER 2 (2026)
  • निर्देशक: अनुराग सिंह  
  • गीत: जावेद अख्तर, मनोज मुंतशिर, कौसर मुनील, कुमार, अनुराग सिंह 
  • संगीत: अनु मलिक, मिथुन, सचेत-परम्परा, विशाल मिश्रा, गुरमोह 
  • कलाकार: सनी देओल, वरुण धवन, दिलजीत दोसांझ, अहान शेट्टी, मोना सिंह 
  • सेंसर सर्टिफिकट : UA16 * 3 घंटे 19 मिनट 7 सेकंड
  • रेटिंग : 3/5 
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