Vada Raha...I Promise Movie Preview | वादा रहा... आई प्रॉमिस
बैनर : इरोज़ एंटरटेनमेंट, नेक्सट जेन
निर्माता : समीर कर्णिक, सुनील ए. लुल्ला
निर्देशक : समीर कर्णिक
संगीत : मोंटी शर्मा, तोशी साबरी, शरीब साबरी, बब्बू मन, गौरव दासगुप्ता, राहुल सेठ, सेंडी, संजय चौधरी
कलाकार : बॉबी देओल, कंगना, द्विज यादव, मोहनीश बहल, शरत सक्सेना
ड्यूक चावला (बॉबी देओल) एक प्रसिद्ध डॉक्टर है। वह कैंसर जैसी बीमारी पर रिसर्च कर रहा है। उसके हँसमुख स्वभाव के कारण जूनियर्स और मरीज उसे काफी पसंद करते हैं। जटिल से जटिल ऑपरेशन ड्यूक सरलता से कर देता है। उसके साथी जब इस बारे में पूछते हैं तो वह कहता है कि आशा और उम्मीद के कारण वह कठिन काम भी कर जाता है। वह आशावादी होने के फायदे अक्सर अपने दोस्तों को गिनाता है।
ड्यूक की जिंदगी में सब कुछ बेहतर चल रहा है। नलिनी (कंगना) को वह बेहद चाहता है। फिलहाल दोनों करियर पर ध्यान दे रहे हैं, लेकिन भविष्य को लेकर उनके कुछ सपने हैं। अमेरिकी संस्थानों ने कैंसर पर ड्यूक के रिसर्च को मान्यता दे दी है।
अचानक सब कुछ बदल जाता है। एक दुर्घटना घटती है और ड्यूक को लकवे का असर हो जाता है। ड्यूक की जिंदगी अस्पताल के कमरे तक सिमट जाती है क्योंकि वह चलने-फिरने के काबिल नहीं है।
नलिनी भी उसका साथ छोड़ देती है। ये हादसे ड्यूक को चिड़चिड़ा बना देते हैं और वह कुंठित हो जाता है। उसे लगता है कि ऐसी जिंदगी से मर जाना ही बेहतर है। आशावादी ड्यूक निराशावादी हो जाता है।
एक दिन रोशन (द्विज यादव) नामक किशोर ड्यूक की जिंदगी में आता है। वह थोड़ा शैतान लेकिन बड़ा ही प्यारा लड़का है। पूरे अस्पताल में सभी उसे चाहते हैं। ड्यूक पहले तो उससे चिढ़ता है, लेकिन धीरे-धीरे दोनों दोस्त बन जाते हैं। रोशन की बहन को कैंसर है और वह मौत से लड़ रही है।
ड्यूक के कमरे की खिड़की के पास बैठकर रोशन उसे बाहरी दुनिया के हाल सुनाता है। उसका वर्णन सुनकर ड्यूक को बेहद खुशी मिलती है। रोशन उन लोगों के बारे में बताता है जो कई कठिनाइयों के बावजूद अंत में विजयी हुए हैं और जिंदगी के प्रति आशावादी हैं। इन लोगों के बारे में सुनकर ड्यूक में भी आशा का संचार होता है। वह रोशन की बहन को बचाने की सोचता है और अपना रिसर्च फिर शुरू करता है। रोशन उसका लगातार उत्साह बढ़ाता है।
ड्यूक के हाथ और पैर ठीक होने लगते हैं। एक दिन डॉक्टर्स की सहायता से वह चलता भी है। ड्यूक उस खिड़की के बाहर देखना चाहता है, जहाँ से रोशन ने बाहर की दुनिया का हाल सुनाया और उसके जीवन में फिर से आशा का संचार हुआ। जैसे ही रोशन खिड़की से परदा हटाता है उसे बाहर एक दीवार दिखाई देती है।
रोशन जब इस बारे में पूछता है तो उसे पता चलता है कि दीवार वहाँ पर तीन वर्ष से है। रोशन की बहन के बारे में ड्यूक डॉक्टर्स से पूछता है तो उसे जवाब मिलता है कि उसकी बहन नहीं बल्कि खुद रोशन कैंसर से पीडि़त है।
ड्यूक के जीवन का अंधकार दूर कर रोशन उसे रोशनी से भर देता है। वह चाहता है कि ड्यूक अपना रिसर्च पूरा करे और कई रोशन की जिंदगी को बचाए। वह ड्यूक को उसका आशावादी दृष्टिकोण लौटा देता है, जो जिंदगी के लिए बहुत जरूरी होता है।
निर्माता : समीर कर्णिक, सुनील ए. लुल्ला
निर्देशक : समीर कर्णिक
संगीत : मोंटी शर्मा, तोशी साबरी, शरीब साबरी, बब्बू मन, गौरव दासगुप्ता, राहुल सेठ, सेंडी, संजय चौधरी
कलाकार : बॉबी देओल, कंगना, द्विज यादव, मोहनीश बहल, शरत सक्सेना
ड्यूक चावला (बॉबी देओल) एक प्रसिद्ध डॉक्टर है। वह कैंसर जैसी बीमारी पर रिसर्च कर रहा है। उसके हँसमुख स्वभाव के कारण जूनियर्स और मरीज उसे काफी पसंद करते हैं। जटिल से जटिल ऑपरेशन ड्यूक सरलता से कर देता है। उसके साथी जब इस बारे में पूछते हैं तो वह कहता है कि आशा और उम्मीद के कारण वह कठिन काम भी कर जाता है। वह आशावादी होने के फायदे अक्सर अपने दोस्तों को गिनाता है।
ड्यूक की जिंदगी में सब कुछ बेहतर चल रहा है। नलिनी (कंगना) को वह बेहद चाहता है। फिलहाल दोनों करियर पर ध्यान दे रहे हैं, लेकिन भविष्य को लेकर उनके कुछ सपने हैं। अमेरिकी संस्थानों ने कैंसर पर ड्यूक के रिसर्च को मान्यता दे दी है।
अचानक सब कुछ बदल जाता है। एक दुर्घटना घटती है और ड्यूक को लकवे का असर हो जाता है। ड्यूक की जिंदगी अस्पताल के कमरे तक सिमट जाती है क्योंकि वह चलने-फिरने के काबिल नहीं है।
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एक दिन रोशन (द्विज यादव) नामक किशोर ड्यूक की जिंदगी में आता है। वह थोड़ा शैतान लेकिन बड़ा ही प्यारा लड़का है। पूरे अस्पताल में सभी उसे चाहते हैं। ड्यूक पहले तो उससे चिढ़ता है, लेकिन धीरे-धीरे दोनों दोस्त बन जाते हैं। रोशन की बहन को कैंसर है और वह मौत से लड़ रही है।
ड्यूक के कमरे की खिड़की के पास बैठकर रोशन उसे बाहरी दुनिया के हाल सुनाता है। उसका वर्णन सुनकर ड्यूक को बेहद खुशी मिलती है। रोशन उन लोगों के बारे में बताता है जो कई कठिनाइयों के बावजूद अंत में विजयी हुए हैं और जिंदगी के प्रति आशावादी हैं। इन लोगों के बारे में सुनकर ड्यूक में भी आशा का संचार होता है। वह रोशन की बहन को बचाने की सोचता है और अपना रिसर्च फिर शुरू करता है। रोशन उसका लगातार उत्साह बढ़ाता है।
ड्यूक के हाथ और पैर ठीक होने लगते हैं। एक दिन डॉक्टर्स की सहायता से वह चलता भी है। ड्यूक उस खिड़की के बाहर देखना चाहता है, जहाँ से रोशन ने बाहर की दुनिया का हाल सुनाया और उसके जीवन में फिर से आशा का संचार हुआ। जैसे ही रोशन खिड़की से परदा हटाता है उसे बाहर एक दीवार दिखाई देती है।
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ड्यूक के जीवन का अंधकार दूर कर रोशन उसे रोशनी से भर देता है। वह चाहता है कि ड्यूक अपना रिसर्च पूरा करे और कई रोशन की जिंदगी को बचाए। वह ड्यूक को उसका आशावादी दृष्टिकोण लौटा देता है, जो जिंदगी के लिए बहुत जरूरी होता है।

