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Action Replayy Movie Preview | एक्शन रिप्ले

एक्शन रिप्ले
निर्माता-निर्देशक : विपुल शाह
संगीत : प्रीतम
कलाकार : अक्षय कुमार, ऐश्वर्या राय, नेहा धूपिया, किरण खेर, ओम पुरी, आदित्य राय कपूर
रिलीज डेट : 5 नवंबर 2010
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बात 1965 की है जब किशन (अक्षय कुमार) अपने पिता के सूर्यप्रकाश भोजनालय पर घंटों काम करता था। 2010 में वह एक प्रसिद्ध बॉलीवुड कैफे का मालिक है, लेकिन काम अभी भी उसे उतना ही करना पड़ता है। घंटों वह सस्ती सब्जी खरीदने के लिए बाजार में घूमता रहता है और कैफे को संभालती है उसकी पत्नी माला (ऐश्वर्या राय)। माला बहुत गुस्सैल है। कपड़ों से लेकर उसकी हँसी तक सभी लाउड है। टॉमबॉय की तरह वह रहती है और उसके दोस्तों में ज्यादातर मर्द हैं। खर्चीली तो वह इतनी है कि यदि उसकी कार का स्टीरियो खराब हो जाए तो वह नया स्टीरियो नहीं बल्कि नई कार ही खरीद लेती है। इसीलिए उसे ‘खर्चवती’ भी कहा जाता है।


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माला और किशन की शादी को कई वर्ष हो गए हैं, लेकिन उनमें प्यार बिलकुल नहीं है। आए दिन दोनों सिर्फ झगड़ते रहते हैं। उनके झगड़ों से सबसे ज्यादा परेशान है उनका बेटा बंटी (आदित्य रॉय कपूर)। बंटी की गर्लफ्रेंड है तान्या (सुदीपा सिंह), जो उससे शादी करना चाहती है। लेकिन अपने माता-पिता की हालत देख शादी से ही बंटी को डर लगता है। वह चाहता है कि उसके मम्मी-पापा आपस में अच्छा व्यवहार करें तभी वह तान्या से शादी कर उसे अपने घर लाए। इसी बीच तान्या के दादा प्रोफेसर एंथनी गोंज़ाल्विस बंटी को अंतिम चेतावनी देकर कहते हैं कि या तो वह तान्या से शादी करे या फिर उससे दूर रहे।


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बंटी ने अपने माता-पिता की शादी की 35 वीं वर्षगाँठ पर एक शानदार पार्टी दी और उस दिन भी वे आपस में खूब झगड़े। इससे बंटी को बेहद दु:ख हुआ। बंटी ने तय किया कि वह घड़ी की सुइयों को विपरीत दिशा में घुमाकर किशन और माला की अरेंज मैरिज को लव मैरिज में तब्दील करेगा ताकि वे प्रेमपूर्वक रहें। और वह यह काम कैसे करेगा? एक प्रोफेसर की टाइम मशीन चुराकर।


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इस टाइम मशीन के जरिये बंटी उस समय में पहुँच जाता है जब किशन और माला की शादी नहीं हुई थी। उस समय किशन के पिता राजा बहादुर और माला की माँ बोली देवी एक दूसरे के जानी दुश्मन थे। बंटी के लिए सबसे मुश्किल काम था कि उसके पापा और मम्मी एक-दूसरे से मोहब्बत करें। उसके बाद अपने दादा-दादी और नाना-नानी को लव मैरिज के लिए राजी करना। बंटी कामयाब होता है या नहीं, जानने के लिए देखना होगी ‘एक्शन रिप्ले’।


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निर्देशक के बारे में :

गुजराती थिएटर में अभिनय और निर्देशन के बाद विपुल ने टीवी धारावाहिक ‘एक महल हो सपनों का’ निर्देशित किया और हिंदी फिल्मों की दुनिया में कदम रखा। विपुल शाह को बड़े बजट की फिल्में बनाना पसंद है। अब तक वे आँखें (2002), वक्त (2005), नमस्ते लंदन (2007), लंदन ड्रीम्स (2009) निर्देशित कर चुके हैं। सिंह इज किंग (2008) के वे निर्माता हैं। अक्षय कुमार और उनके बीच खास संबंध है, इसीलिए उनकी फिल्मों में ज्यादातर अक्षय ही हीरो रहे हैं।

लेखक के बारे में
समय ताम्रकर
समय ताम्रकर फिल्म समीक्षक हैं, जो फिल्म, कलाकार, निर्देशक, बॉक्स ऑफिस और फिल्मों से जुड़े पहलुओं पर गहन विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं।.... और पढ़ें