एक : द पॉवर ऑफ वन
निर्माता : के सेरा सेरा, धरम फिल्म्स्
निर्देशक : संगीथ सिवन
कलाकार : बॉबी देओल, श्रेया सरन, नाना पाटेकर, चंकी पांडे
बॉबी देओल की फिल्में भले ही बॉक्स ऑफिस पर कोई खास कमाल नहीं दिखा पा रही हों, लेकिन निर्माता-निर्देशकों के बीच उनकी मांग बनी हुई हैं। जून-जुलाई और अगस्त के महीने में उनकी चार-पाँच फिल्में प्रदर्शित होने वाली है। उनकी आने वाली फिल्म ‘एक - द पॉवर ऑफ वन’ की कहानी कुछ इस प्रकार है।
नंदू (बॉबी देओल) एक अच्छा इंसान है। लेकिन परिस्थितियों का मारा है। उस पर एक नेता की हत्या का आरोप लग जाता है जो उसने की ही नहीं होती। वह पुलिस से बचता-फिरता रहता है।
एक दिन पुलिस उसके पीछे लगी रहती है और वह उनसे बचते हुए एक रेल में चढ़ जाता है। रेल में उसकी मुलाकात शेखर नामक शख्स से होती है। शेखर अपने रिश्तेदार की शादी में शामिल होने के लिए करीब चौदह वर्ष बाद अपने घर वापस लौटने वाला होता है। शेखर अपने और अपने परिवार के बारे में सारी जानकारियाँ नंदू को देता है।
अचानक रेल में पुलिस आ जाती है और नंदू को देख लेती है। नंदू भागता है तो पुलिस गोली चलाती है। नंदू और गोली के बीच शेखर आ जाता है। नंदू की जान तो बच जाती है लेकिन शेखर मारा जाता है। नंदू को इससे बेहद दु:ख पहुँचता हैं। वह शेखर का सारा सामान लेकर उसके गाँव जाता है ताकि यह दु:ख भरी खबर वह उसके घर वालों को सुना सकें।
शेखर के परिवार वाले नंदू को ही शेखर समझ लेते हैं। वह उसके साथ अपनी सारी खुशियाँ बांटते हैं। नंदू की हिम्मत नहीं होती है कि वह उनको शेखर के बारे में बता सकें।
गाँव की लड़की प्रीत (श्रेया सरन) भी नंदू को शेखर समझकर प्यार करने लगती है। इसी बीच नंदू को पकड़ने का जिम्मा सीबीआई इंसपेक्टर राने (नाना पाटेकर) को दिया जाता है। राने अत्यंत ही होशियार व्यक्ति है।
क्या राने नंदू को पकड़ पाएगा?
क्या नंदू शेखर के परिवार को उसकी मौत के बारे में बता पाएगा?
क्या नंदू असली हत्यारे को पकड़ पाएगा?
प्रीत का क्या होगा जब उसे पता चलेगा कि जिसे वह शेखर समझ रही थी, वह शेखर नहीं नंदू है?
इन सारे सवालों का जवाब मिलेगा ‘एक - द पॉवर ऑफ वन’ में।
निर्देशक : संगीथ सिवन
कलाकार : बॉबी देओल, श्रेया सरन, नाना पाटेकर, चंकी पांडे
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नंदू (बॉबी देओल) एक अच्छा इंसान है। लेकिन परिस्थितियों का मारा है। उस पर एक नेता की हत्या का आरोप लग जाता है जो उसने की ही नहीं होती। वह पुलिस से बचता-फिरता रहता है।
एक दिन पुलिस उसके पीछे लगी रहती है और वह उनसे बचते हुए एक रेल में चढ़ जाता है। रेल में उसकी मुलाकात शेखर नामक शख्स से होती है। शेखर अपने रिश्तेदार की शादी में शामिल होने के लिए करीब चौदह वर्ष बाद अपने घर वापस लौटने वाला होता है। शेखर अपने और अपने परिवार के बारे में सारी जानकारियाँ नंदू को देता है।
अचानक रेल में पुलिस आ जाती है और नंदू को देख लेती है। नंदू भागता है तो पुलिस गोली चलाती है। नंदू और गोली के बीच शेखर आ जाता है। नंदू की जान तो बच जाती है लेकिन शेखर मारा जाता है। नंदू को इससे बेहद दु:ख पहुँचता हैं। वह शेखर का सारा सामान लेकर उसके गाँव जाता है ताकि यह दु:ख भरी खबर वह उसके घर वालों को सुना सकें।
शेखर के परिवार वाले नंदू को ही शेखर समझ लेते हैं। वह उसके साथ अपनी सारी खुशियाँ बांटते हैं। नंदू की हिम्मत नहीं होती है कि वह उनको शेखर के बारे में बता सकें।
गाँव की लड़की प्रीत (श्रेया सरन) भी नंदू को शेखर समझकर प्यार करने लगती है। इसी बीच नंदू को पकड़ने का जिम्मा सीबीआई इंसपेक्टर राने (नाना पाटेकर) को दिया जाता है। राने अत्यंत ही होशियार व्यक्ति है।
क्या राने नंदू को पकड़ पाएगा?
क्या नंदू शेखर के परिवार को उसकी मौत के बारे में बता पाएगा?
क्या नंदू असली हत्यारे को पकड़ पाएगा?
प्रीत का क्या होगा जब उसे पता चलेगा कि जिसे वह शेखर समझ रही थी, वह शेखर नहीं नंदू है?
इन सारे सवालों का जवाब मिलेगा ‘एक - द पॉवर ऑफ वन’ में।
