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'जिंदगी ना मिलेगी दोबारा' के 15 साल: जानिए कैसे एक फिल्म बन गई लोगों के जीने का तरीका!

Zindagi Na Milegi Dobara 15 Years
बहुत ही कम ऐसी फिल्में होती हैं जो न सिर्फ किसी इंसान पर, बल्कि उसके जीने के तरीके पर भी गहरा असर छोड़ती हैं। फिर कुछ ऐसी फिल्में आती हैं जो इससे भी आगे निकलकर जीने का एक तरीका सिखा जाती हैं, और 'जिंदगी ना मिलेगी दोबारा' ने बिल्कुल यही काम किया। 
 
यह फिल्म न केवल एक ट्रेंडसेटर बनकर उभरी, बल्कि जिंदगी जीने का एक ऐसा जरिया बन गई जो आज भी लोगों को बहुत पसंद आता है। अपनी कहानी से लेकर डायलॉग्स तक, यह फिल्म एक ऐसी दीवानगी बन गई जिसने पूरी एक पीढ़ी को इंस्पायर किया। आज, अपनी रिलीज के 15 साल पूरे होने पर भी 'जिंदगी ना मिलेगी दोबारा' उतनी ही फ्रेश और खास लगती है।

 
साल 2011 में रिलीज हुई 'जिंदगी ना मिलेगी दोबारा' सिर्फ एक फिल्म नहीं थी, बल्कि एक कमाल का एक्सपीरियंस थी। दोस्ती, प्यार, एडवेंचर, घूमना-फिरना, परिवार, बाप-बेटे का रिश्ता, रोड ट्रिप्स, आजादी या जिंदगी को देखने का नजरिया—ZNMD उन बहुत कम फिल्मों में से एक है जिसने फुल एंटरटेनमेंट देने के साथ-साथ दिल पर एक कभी न मिटने वाली छाप छोड़ी। 
 
यह फिल्म अर्जुन, कबीर और इमरान नाम के बचपन के तीन दोस्तों की कहानी है, जो कबीर की बैचलर पार्टी के लिए स्पेन में तीन हफ्ते के रोड ट्रिप पर निकलते हैं। उन्हें जरा भी अंदाजा नहीं था कि यह सफर न केवल उनकी अपनी जिंदगी बदल देगा, बल्कि लाखों देखने वालों के दिलों को भी गहराई से छू जाएगा। अपनी इस बेहद प्यारी कहानी के जरिए इस फिल्म ने जिंदगी की उन बातों को दिखाया जिन्हें हममें से कई लोग अक्सर अनदेखा कर देते हैं या समझ नहीं पाते। सही मायनों में, इसने दर्शकों को सिखाया कि बिना किसी डर या पछतावे के असल में खुलकर जीने का क्या मतलब होता है।
ZNMD एक ऐसी लीक से हटकर फिल्म साबित हुई जिसने लोगों को जिंदगी जीने का एक बिल्कुल नया नजरिया दिया। दुनिया घूमना, एडवेंचर को गले लगाना, रिस्क लेना, अपनी भावनाओं को खुलकर जाहिर करना और अपने अंदर सुकून ढूंढना—फिल्म ने खुद को पहचानने के हर एक पहलू को इतनी खूबसूरती से दिखाया कि यह सीधे दर्शकों के दिलों में उतर गई। 
 
रितिक रोशन, अभय देओल, फरहान अख्तर, कैटरीना कैफ और कल्कि कोचलिन जैसे शानदार कलाकारों से सजी इस फिल्म ने हर पीढ़ी के दर्शकों के दिलों को छुआ। दमदार फिल्में बनाने के लिए मशहूर एक्सेल एंटरटेनमेंट के बैनर तले बनी 'जिंदगी ना मिलेगी दोबारा' उनके सबसे बेहतरीन कामों में से एक है।
 
जोया अख्तर के डायरेक्शन में बनी इस फिल्म में कुछ बेहद कमाल के डायलॉग्स और शायरी थी, जिन्हें जावेद अख्तर ने लिखा था। उनके लिखे शब्दों ने जिंदगी के असली मायने को बहुत ही खूबसूरती से समेटा है। यह फिल्म कई आइकॉनिक डायलॉग्स और कभी न भूलने वाली कविताओं से भरी हुई थी। 
 
"Seize the day, my friend. पहले इस दिन को पूरी तरह जियो, फिर 40 के बारे में सोचना।"
 
या फिर
 
"दिलों में तुम अपनी बेताबियां लेके चल रहे हो तो ज़िंदा हो तुम। नज़र में ख्वाबों की बिजलियां लेके चल रहे हो तो ज़िंदा हो तुम।"
 
फिल्म का म्यूजिक एल्बम भी इसके सबसे बड़े प्लस पॉइंट्स में से एक था, जिसमें 'दिल धड़कने दो', 'इक जूनूनपेंट इट रेड)', 'ख्वाबों के परिंदे', 'सेनोरिटा' और 'सूरज की बाहों में' जैसे ब्लॉकबस्टर गाने शामिल थे। यहाँ तक कि 59वें नेशनल फिल्म अवार्ड्स में इस फिल्म ने दो अवॉर्ड्स भी अपने नाम किए थे— बेस्ट कोरियोग्राफी ('सेनोरिटा' गाने के लिए बॉस्को-सीज़र) और बेस्ट ऑडियोग्राफी (बेलन फोंसेका)।
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