एआर रहमान पर लगा शास्त्रीय संगीत चोरी का आरोप, सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई
फेमस म्यूजिक कंपजोर एआर रहमान एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बर रहमान पर गाना चोरी का आरोप लगा है। भारतीय शास्त्रीय गायक उस्ताद फैय्याज वासिफुद्दीन डायर ने रहमान पर यह आरोप लगाया है। उन्होंने कंपोजर के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दायर की है।
फैय्याज वासिफुद्दीन डागर ने आरोप लगाया है कि एआर रहमान ने 'पोन्नियिन सेल्वन 2' के लोकप्रिय गाने 'वीरा राजा वीरा' में उनके परिवार की पुरानी रचना 'शिव स्तुति' का कुछ हिस्सा चुराया था। डागर परिवार का दावा है कि इस रचना की धुन और लय उनके परिवार की विरासत है, जिसका उपयोग बिना अनुमति के व्यावसायिक रूप से किया गया।
अप्रैल 2025 में दिल्ली हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने गानों में समानता पाते हुए रहमान को 2 करोड़ रुपए जमा करने और डागर भाइयों को क्रेडिट देने का आदेश दिया था। सितंबर 2025 में हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने इस आदेश को यह कहते हुए रद्द कर दिया कि 'परफॉरमेंस' (गायन) का मतलब 'ऑथरशिप' नहीं होता।
अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉय माल्य बागची की बेंच ने इस केस की सुनवाई की। कोर्ट ने हाईकोर्ट के 2 करोड़ जमा करने के निर्देश को बहाल रखा है और रहमान से कहा है कि वे शास्त्रीय संगीत परंपरा को उचित सम्मान और क्रेडिट देने पर विचार करें।
सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा, यदि इन घरानों ने शास्त्रीय संगीत में योगदान नहीं दिया होता, तो क्या आपको लगता है कि आधुनिक गायक टिक पाते? कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यद्यपि कॉपीराइट के कानूनी पहलू ट्रायल में तय होंगे, लेकिन भारत की सांस्कृतिक धरोहर और शास्त्रीय गुरुओं का सम्मान सर्वोपरि है।
जस्टिस बागची ने कहा, हम ये जांचना चाहते हैं कि असली लेखक कौन हैं। पहले गाना गा देने से लेखन नहीं बन जाते। आपको ये साबित करना होगा कि ऐसी धुन पहले किसी और के पास नहीं थ। आप मान चुके हैं कि प्रतिवादी डागर परंपरा का हिस्सा है। अगर डागर परिवार ने भारतीय संगीत में इतना बड़ा योगदान ना दिया होता, तो क्या आज के मॉर्डन गायक बाजार में टिक पाते?