'इंडियावाली मां' में केसर बा का रोल निभा रहीं अपरा मेहता बोलीं- लॉकडाउन मेरे लिए एक आशीर्वाद की तरह रहा

Last Updated: सोमवार, 21 दिसंबर 2020 (18:34 IST)
कोरोनावायरस आउटब्रेक के बीच कई नए सीरियल्स छोटे पर्दे पर दस्तक दे चुके हैं। नए शोज की इस लिस्ट में सोनी टीवी के सीरियल 'इंडियावाली मां' का नाम भी शामिल है। इस टीवी शो में टीवी की जानीमानी अदाकारा सुचिता त्रिवेदी अहम किरदार में नजर आ रही हैं। सुचिता त्रिवेदी के अलावा इस शो में 'क्योंकि सास भी कभी बहू' में नजर आ चुकी अदाकारा अपरा मेहता भी नजर आ रही हैं। हाल ही में अपरा मेहता ने इस शो को लेकर खास बात की।

आप इंडियावाली मां में केसर बा का महत्वपूर्ण रोल निभा रही हैं। अपने किरदार के बारे में कुछ बताएं?
मैं इंडियावाली मां में केसर बा का रोल निभाने को लेकर बेहद उत्साहित हूं। मेरा किरदार केसर बा काकू की मासी हैं, जो गुजरात के भुज से आई हैं। उन्हें हैंडलूम्स एवं प्रिंटिंग की अच्छी समझ है। वे वहां पर एक छोटा-सा बिजनेस चलाती हैं। जब काकू को उनकी मदद की जरूरत होती है, तो वो खुद उनकी मदद के लिए चली आती हैं।
जब उन्हें काकू के बेटे और बहू की स्थिति के बारे में पता चलता है, तो वो उन दोनों को मिलाने में मदद करने का फैसला करती है। यह बड़ा मजेदार रोल है। केसर बा बड़ी खुशमिजाज इंसान हैं। वो अपनी समझ का इस्तेमाल करते हुए अपने ढंग से आगे बढ़ती हैं। वो एक छोटे शहर या गांव की रहने वाली इंसान हैं, जो खुद अपने तरीके से शिक्षित हुई हैं। तो हां, यह एक दिलचस्प किरदार है।

आप इस शो में सुचिता त्रिवेदी की मासी का रोल निभा रही हैं। उनके साथ आपका किस तरह का तालमेल है?
हम लोग साल 1997 से साथ में काम कर रहे हैं, जब हमने सोनी टीवी के पहले डेली शो 'एक महल हो सपनों का' में साथ काम किया था। तब से ही हम दोनों साथ में काम कर रहे हैं। बीते कुछ वर्षों में हमने एक दूसरे को आगे बढ़ते हुए देखा है। सुचिता बहुत स्वीट इंसान हैं और एक अच्छी लड़की हैं। हम हमेशा अच्छे दोस्त रहे हैं।
जब आप कई सालों तक एक दूसरे के साथ काम करते हैं और फिर आपकी दोबारा मुलाकात होती है, तो आप वहीं से ही शुरू करते हैं, जहां आपने इसे खत्म किया था। इस बीच भी हमारी काफी मुलाकातें हुई हैं। सुचिता भी गुजराती हैं और उन्होंने गुजराती थिएटर भी किया है। इस बीच हम दोनों के बीच काफी बातचीत हुई हैं। सुचिता की मासी का रोल निभाना मेरे लिए बड़ा आसान रहा। वो एक बढ़िया एक्टर हैं और उनके साथ काम करना बड़ा मजेदार होता है।
इस शो के सेट से जुड़ी कोई खास घटना बताना चाहेंगी?
मैंने पहले भी जय मेहता प्रोडक्शन्स के साथ काम किया है, इसलिए मैं इसके हेयर, मेकअप, स्पॉट दादा से लेकर डायरेक्टर, टेक्नीशियन, कैमरापर्सन, फोटोग्राफी डायरेक्टर आदि से पहले भी मिल चुकी हूं और उनके साथ कभी ना कभी काम किया है। अक्सर वो मुझे याद दिलाते रहते हैं कि ‘हमने फलां सीरियल में आपके साथ काम किया है। इसलिए यह मेरे लिए घर वापसी के जैसा है।

यह मेरा 32वां डेली शो है, इसलिए डेली शो करना मेरे लिए बड़ा आसान होता है। यह मेरा कम्फर्ट ज़ोन है। इंडियावाली मां में काम करने का मतलब है ऐसी जगह काम करना, जिसे आप हमेशा से जानते हैं। यह घर जैसा है, जहां आप जानते हैं कि कौन-सी चीज कहां है। भले ही बिजली चली जाए, आपको पता होता है कि आपको अपनी चीज कहां मिलेगी। जय मेहता प्रोडक्शन्स में काम करना मेरे लिए ऐसा ही होता है।
इतने वर्षों में टेलीविजन इंडस्ट्री के अपने सफर को किस तरह देखती हैं? क्या कोई ऐसी चीज है जो आपने अपने सफर की शुरुआत से कुछ अलग तरह से की होती?
टेलीविजन में मेरा सफर बहुत लंबा रहा है। मैं पहले डेली सीरियल एक महल हो सपनों का का हिस्सा रही हूं जिसका प्रसारण भी सोनी टीवी पर हुआ था। यह सैटेलाइट चैनल पर अपनी तरह का पहला डेली सीरियल था, जिसका प्रसारण 1997 में हुआ था। एक महल हो सपनों का हिंदी और गुजराती दोनों भाषाओं में शूट किया गया था। तो तब से ही मैं राष्ट्रीय स्तर पर काम कर रही हूं। लेकिन उसके पहले मैंने क्षेत्रीय टीवी में भी काफी काम किया था, जो अहमदाबाद दूरदर्शन के लिए था और जिसके धारावाहिक मुंबई में शूट हुए थे।
मैं 1984-85 से टीवी का हिस्सा रही हूं और मैंने क्षेत्रीय भाषाओं में भी कुछ बढ़िया काम किया है। मैं उस समय छोटी थी, तो उस समय मुझे कुछ अच्छे फीमेल किरदार मिले। फिर कुछ वर्षों बाद साल 2000 में क्योंकि सास भी कभी बहू थी आया, जिसने भारतीय टेलीविजन का इतिहास बदल दिया और तब से ही मैं टीवी की हर गतिविधि का हिस्सा रही हूं। मैंने तब से लेकर अब तक, टीवी में कई बदलाव देखे हैं। मैं कमर्शियल टीवी में यकीन रखती हूं और मुझे गर्व है कि मैं कमर्शियल गुजराती थिएटर एक्टर और एक कमर्शियल टीवी एक्टर रही हूं।
इंडिया वाली मां एक अनोखा शो है। इसमें एक ऐसी मां का सफर है, जो अपने बेटे की दोबारा परवरिश करना चाहती है। क्या आपका भी अपनी बेटी के साथ कोई खास रिश्ता है?
असल में परवरिश करना इतना आसान नहीं है, लेकिन यदि आप गौर से समझें तो यह काफी आसान भी है। इसमें आपको एक बढ़िया संतुलन बनाना पड़ता है, जिस तरह से इंडियावाली मां की काकू अपने बच्चे की दोबारा परवरिश करने का फैसला करती हैं। जहां तक मेरा और मेरी बेटी का सवाल है, तो जब से वो छोटी बच्ची थी, तब से ही मैंने उसे अपने काम के बारे में समझाया और उसे यह एहसास दिलाया कि उसकी मां एक कामकाजी महिला है, जिस पर वो गर्व कर सकती है। मैं उसे अपने गुजराती नाटकों में और शोज़ में अपने साथ ले जाती थी और फिर मैं उसे अपने टीवी सीरियल्स के सेट पर भी साथ ले जाती थी।
जब बच्चे देखते हैं कि उनके पैरेंट्स कहां और कैसे काम कर रहे हैं, तो वो आपके काम की कद्र करते हैं और इस बात को समझते हैं कि उस काम में कितनी मेहनत लगती है। मां-बाप और बच्चों के बीच बातचीत सबसे जरूरी चीज है। ऐसी कोई भी चीज नहीं होनी चाहिए जो आपका बच्चा आपसे कहने में डरे। भले ही उसने कोई गलती की हो, वो आसानी से हर बात बता सके। इसमें कोई सजा या ऐसी कोई सख्ती नहीं होनी चाहिए। आप उनके रोल मॉडल होते हैं इसलिए आपको एक जिम्मेदार इंसान बनना पड़ेगा।
क्या अपने किरदार के लिए आपको कोई खास तरह की तैयारी करनी पड़ी?
जब केसर बा के रोल के लिए मुझसे संपर्क किया गया तो मुझे इस भाषा की प्रैक्टिस शुरू करनी पड़ी। मैं इंग्लिश, हिंदी, गुजराती और मराठी बहुत स्पष्ट बोल लेती हूं। ऐसे में जब आपको कोई ऐसा रोल करना हो, जहां आपको इसकी बोली को विश्वसनीय तरीके से बोलना हो तो आपको इसकी प्रैक्टिस करनी होती है। मैंने भी अपने दिमाग में अपना होमवर्क किया। मैं इसे किसी कैरीकेचर की तरह नहीं दिखाना चाहती थी। मैं इसे बिल्कुल सामान्य दिखाना चाहती थी जैसे कि गुजरात में गुजराती लोग किस तरह हिंदी बोलते हैं। मैं इसे फनी तरीके से नहीं करना चाहती थी।
यह एक एक्टर की जिम्मेदारी है कि वो उस भाषा में सोचे, जिस भाषा का वो किरदार निभा रहे हैं। आप इंग्लिश में सोचते हुए गुजराती-हिंदी बोली नहीं बोल सकते या फिर मराठी-हिंदी या हरियाणवी नहीं बोल सकते। आपको उस भाषा में सोचना ही पड़ेगा। तो हां यह एक एक्टर का होमवर्क है और मुझे लगता है कि मैंने इसे अपने आप किया है।

लॉकडाउन के बाद आपकी टीवी पर वापसी कैसी रही?
लॉकडाउन मेरे लिए एक आशीर्वाद की तरह रहा, क्योंकि मैंने अपनी जिंदगी के कई साल सुबह से रात तक काम किया था। यह अपने घर को एक बार फिर से जानने के बारे में था, एक मां, एक बेटी और एक पत्नी होने के बारे में था और यह सबकुछ एक बार फिर हो रहा था। पहले 21 दिन तो हम घर पर ही रहे, घर पर कोई डोरबेल नहीं बजाता था, कामवाली नहीं आती थी, कोई कुक नहीं आता था, कुछ भी नहीं होता था। इसलिए एक परिवार के रूप में हमने अपने घर के काम आपस में बांट लिए थे। मैं एक अच्छी कुक हूं, लेकिन मुझे कभी खाना बनाने का मौका ही नहीं मिला था और ऐसे में मुझे यह सब करने को मिला। इस दौरान हमने अपने घर में काम करने वाले लोगों की अहमियत समझी।

जब आप झाड़ू पोछा करते हैं, तो जिस घर को आप छोटा समझ रहे थे, वो अचानक बड़ा लगने लगता है। मैं दिन भर आराम करती थी, घर के काम करती थी और घर का बना खाना खाती थी। मैंने अपना वजन भी बहुत घटा लिया। मेरे परिवार में सभी का वजन काफी कम हो गया। लॉकडाउन की जो बात मुझे सबसे अच्छी लगी, वो यह कि आपको किसी के घर या किसी पार्टी में नहीं जाना होता था। आप एक परिवार के रूप में तरोताजा हुए और अचानक आप एक दूसरे के साथ बातें करने लगे। लंबे समय बाद हमने साथ मिलकर लंच किया, डिनर किया, साथ मिलकर नाश्ता किया और साथ में सुबह की चाय पी। मुझे लगता है कि यह जिंदगी में बहुत जरूरी होता है। तो मैंने इसे सकारात्मक ढंग से लिया।
जब मैं काम पर लौटी तो मैं खुद में तरोताजा महसूस कर रही थी। मैंने उन सभी चीजों के बारे में सोचा जो मैं इतने सालों से कर रही थी, और मैं और ज्यादा काम करना चाह रही थी। इस दौरान मुझे अपने सभी सवालों के जवाब मिले। ऐसे में जब यह सीरियल मुझे मिला तो मैंने इसे अपना लिया क्योंकि यह डेढ़ महीने का एक कैमियो रोल है। तो ऐसे में मैं कहूंगी कि लॉकडाउन ने मुझे शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से काफी संभाला और मेरी मदद की। यह एक तरह से अच्छा ही था।



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