जोखिम न लेना सबसे बड़ा जोखिम
बीबीसी एक मुलाकात में सबीर भाटिया
सबीर भाटिया ने बिजनेस की दुनिया में काफी नाम कमाया है। उनका मानना है कि व्यक्ति को सपने देखना नहीं छोड़ना चाहिए। जो कुछ भी करते हैं उसके बारे में सपना जरूर देखें। हमेशा कोशिश करते रहें और जोखिम लेते रहें क्योंकि जिंदगी में जोखिम न लेना ही सबसे बड़ा जोखिम है।
अपने बचपन के बारे में बताएँ?
मेरा बचपन तो काफी शानदार गुजरा। मैं पैदा तो चंडीगढ़ में हुआ था, लेकिन उसके बाद पुणे और बंगलोर में बड़ा हुआ हूँ। दोनों जगहों का मौसम बहुत अच्छा है और एजुकेशन भी काफी अच्छी थी। मैं शुरुआत से ही इंजीनियर बनना चाहता था क्योंकि मैथ्स और फिजिक्स काफी अच्छा था।
मतलब शुरुआत से होशियार बच्चे थे?
नहीं, मैथ्स और फिजिक्स में दिमाग काफी काम करता था, लेकिन दूसरे विषयों इतिहास और भूगोल में दिमाग वैसा नहीं चलता था। इसलिए मुझे बचपन में ही पता चल गया था कि बड़ा होकर इंजीनियर और वैज्ञानिक ही बनना चाहता हूँ।
क्या कभी सोचा था कि बाद में अपनी कंपनी खोलेंगे?
सोचा तो नहीं था, लेकिन परिस्थितियाँ ऐसी बन गईं। मैं जब पिलानी में पढ़ रहा था तो कैलटेक यानी कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी का एंट्रेंस देने का मौका मिला और वहाँ मुझे 100 प्रतिशत स्कॉलरशिप मिल गया। कैलटेक एक ऐसा इंस्टीट्यूट है जिसने सबसे अधिक वैज्ञानिक तैयार किए हैं।
जब ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद मैं कैलटेक से ही मास्टर्स और पीएचडी करना चाहता था तो मुझे मेरे प्रोफेसर ने कहा कि आप अब दूसरे इंस्टीट्यूट में जाएँ क्योंकि आपको यहाँ से जो मिलना था वो मिल चुका है। अगर वहाँ आपको पसंद न आए तो फिर वापस आ जाना। इसके बाद मैंने उनकी सलाह मानते हुए स्टैनफर्ड में जाकर मास्टर्स और पीएचडी का कार्यक्रम शुरू कर दिया।
स्टैनफर्ड में मास्टर्स करने के दौरान मैंने बिजनेस फॉर इलेक्ट्रिकल इंजीनियर्स कोर्स शुरू कर दिया। इसी कोर्स के द्वारा मेरी मुलाकात कई उद्यमियों से हुई जैसे एप्पल कंप्यूटर शुरू करने वाले स्टीव जॉब्स, सन को शुरू करने वाले विनोद खोसला हैं। मैं जब इन लोगों से मिला तो मुझे लगा कि ये सब भी आपकी और मेरी तरह ही आदमी हैं।
अपनी पसंद का एक गाना बताइए?
ताल से ताल मिला... सुना दीजिए।
ऐश्वर्या राय बहुत पसंद है आपको?
नहीं नहीं, गाना काफी अच्छा है और फिल्म बहुत पसंद है।
मुझे बताया गया है कि जब आप अमेरिका गए और अपना काम शुरू करने की सोची तो आपकी जेब में सिर्फ 250 डॉलर थे। क्या ये सही बात है?
बिल्कुल सही बात है क्योंकि उस समय विदेशी मुद्रा अधिनियम के तहत आप देश से अधिकतम 250 डॉलर लेकर ही जा सकते थे और मुझे कैलटेक से पूरी स्कॉलरशिप मिली था, तो मैं सिर्फ इतने ही पैसे लेकर गया था।
कोर्स करने के बाद सीधे अपनी कंपनी डालने की सोची या फिर कहीं नौकरी की?
मैंने स्टैनर्फ से मास्टर्स करने के बाद मैंने तय कर लिया कि पीएचडी नहीं करूँगा और एप्पल कंप्यूटर में डिजाइनर की नौकरी करने लगा। लैपटॉप के ‘ब्रेन’ यानी चिप्स को डिजाइन किया और यहाँ दो साल नौकरी की। इसके बाद एक छोटी-सी कंपनी फायर पावर सिस्टम्स में नौकरी शुरू की। यहाँ भी दो साल नौकरी की, उसके बाद जब ये कंपनी बंद होने लगी तो सोचने लगा कि मैं अपने लिए क्या कर सकता हूँ।
ये कब की बात है?
ये सन 1995 की बात है। तब मैं सोचने लगा कि क्या कर सकता हूँ। इंटरनेट उन दिनों में शुरू ही हो रहा था और काफी कम लोग इस्तेमाल कर रहे थे तकरीबन डेढ़-दो करोड़ लोग। मुझे आभास हो गया कि एक दिन यह बहुत बड़ा रूप लेगा और सब लोग इसका इस्तेमाल करेंगे।
आभास हो गया था या सपना देखा? आप भविष्य को देख सके यही तो कमाल है?
नहीं, वास्तव में मैं भविष्य तो नहीं देख सकता था, लेकिन कुछ ऐसी चीजें थीं जिसका आभास हुआ। सूचना को अलग-अगल कंप्यूटर से इकट्ठा करना काफी कठिन था, लेकिन वेब के जरिये यह काफी आसान था। इससे मुझे लगा कि भविष्य में हर कोई इसका उपयोग करेगा और सोचने लगा कि इस क्षेत्र में मैं क्या कर सकता हूँ, जो अब तक नहीं हुआ है। इसी सोच से ‘हॉटमेल’ का जन्म हुआ।
हॉटमेल बनाने तक का सफर कैसे पूरा किया?
मैंने एक कंपनी जाबा सॉफ्ट शुरू कर दी थी जो व्यक्तिगत जानकारी इंटरनेट पर स्टोर करके किसी भी कंप्यूटर द्वारा पाई जा सकती थी। इसके बाद मैंने इसका बिजनेस प्लान बनाया और अपने पार्टनर जैक स्मिथ को दिखाया। जब हम इसका बिजनेस मॉड्यूल विकसित कर रहे थे, तो जिनकी कंपनी में काम कर रहे थे तो वो भी फायर पावर में काम कर चुके थे।
उन्होंने कंपनी के इंटरनल नेटवर्क में फायर वॉल लगा दिया जिससे हम ऑफिस में रहते हुए अपना पर्सनल ई-मेल नहीं चेक कर सके। इसके बाद हमें विचार आया कि क्यों न ई-मेल को भी वेब पर डाल दें ताकि इसे किसी भी कंप्यूटर पर और कहीं भी देखा जा सके। इसी विचार से हॉटमेल का जन्म हुआ। हॉटमेल को करीब आज 30 करोड़ लोग इस्तेमाल कर रहे हैं, जो इंटरनेट के उपयोगकर्ताओं की एक-तिहाई है।
हॉटमेल से पहले इस तरह का कोई ई-मेल एकाउंट नहीं था, जिसे किसी भी कंप्यूटर से और कही से भी जाँचा जा सके?
बिल्कुल नहीं।
इसका नाम हॉटमेल ही क्यों रखा?
जो तकनीक हम इस्तेमाल कर रहे थे उसका नाम था एचटीएमएल, इसी के आधार पर हमने हॉटमेल नाम रखा।
अच्छा, लोगों ने तो सोचा था कि आप अपना भी प्रचार कर रहे हैं?
मैं ‘हॉटमेल’ तो हॉटमेल खोलने के बाद बना, उससे पहले कहाँ था।
आपने नए विचार पर कंपनी खोली, लेकिन कितने दिन चलाई?
कंपनी शुरू हुई 14 फरवरी, 1996 और 30 दिसंबर, 1997 में बेच दी। दो साल से भी कम चलाई कंपनी।
इस दो साल के दौरान बेचने को लेकर कब बातचीत शुरू हुई?
अक्टूबर 1997 में बातचीत शुरू हो गई थी। जब सौद हुआ तो मेरी उम्र केवल 28 साल थी। मुझे विश्वास ही नहीं हुआ कि इतने कम समय में एक कंपनी इतनी बड़ी हो गई।
बातचीत के दौरान बिल गेट्स से मुलाक़ात हुई थी?
13 अक्टूबर 1997 को पहली बार बिल गेट्स से मिला था।
जब बिल गेट्स से मिले तो कैसे लगे?
पहले तो मैं काफी डर गया कि बिल गेट्स से मिलना है कि दुनिया के सबसे अमीर आदमी हैं और सॉफ्टवेयर की दुनिया के बादशाह हैं। पहले तो मैं बहुत नर्वस था, लेकिन 15 मिनट बाद सब कुछ सामान्य हो गया, जैसा कि मैंने पहले भी कहा कि बड़े और सफल लोग भी हमारी और आपकी तरह ही होते हैं। उसके बाद हमारी काफी बातें हुईं और बाद में दोस्ती भी हो गई।
बिल गेट्स में ऐसी कोई बात दिखी जिससे लगा कि इसलिए ही वो दुनिया के सबसे धनी व्यक्ति हैं?
नहीं, देखने से ऐसा कुछ भी नहीं लगता है। ये है कि दिमाग उनका काफी तेज था और उन्होंने हॉटमेल के बारे में कई रोचक सवाल पूछे।
अच्छा तो ये बताइए जब हॉटमेल को बेचने को लेकर जब बात चल रही थी तो क्या आप बहुत सख्त तोल-मोल करने वाले साबित हुए या फिर नुकसान ही हुआ?
मुझे ये पता था कि माइक्रोसॉफ्ट के एमएसएन में एक विश्वस्त वेब मेल नहीं था और वे एक ऐसी कंपनी ढूँढ रहे थे, जिनके पास ये हो। हम वेब मेल के क्षेत्र में सबसे आगे थे और हमें यही पता लगाना था कि हमारी सबसे आगे वाली इस स्थिति का उनके लिए क्या महत्व था। फिर एक सीमा होती है जिसके आगे वो देने के लिए तैयार नहीं होते।
उन्होंने जब शुरुआत की तो 160 मिलियन डॉलर से की तो मुझे लगा कि ओपनिंग ऑफर के रूप में काफी कम है। इसके बाद मैंने काउंटर ऑफर 750 डॉलर मिलियन का किया। हालाँकि ये मुझे भी पता था और उन्हें भी पता था कि ये बहुत ज्यादा था। फिर एक समयसीमा भी थी कि उस साल के बाद ये सौदा नहीं हो सकता था। इसलिए आखिर में हम भी कुछ नीचे आए और कुछ वो आगे बढ़े। मेरा मानना है कि 400 मिलियन डॉलर से ज्यादा तक इस सौदे को कोई भी नहीं ले जा सकता था।
जब इसमें से आपके हिस्से का पैसा एकाउंट में आया तो आपने क्या-क्या योजना बनाई?
थोड़े दिनों तक उत्साहित था। दो-तीन महीने तक मैं सोचता रहा कि जो चाहूँ वो मेरी पहुँच में है। मैंने तीन दिनों में तीन गाड़ियाँ बीएमडब्ल्यू, फेरारी और पोर्श पोर्श खरीदी। अपने माता-पिता के लिए बंगलोर में एक बढ़िया घर खरीदा। अपने लिए सैन फ्रांसिस्को में एक शानदार पेंटहाउस फ्लैट खरीदा, जहाँ से आप पूरा शहर देख सकें गोल्डन गेट से बे ब्रिज तक। लेकिन ये सब ज्यादा दिनों तक नहीं रहा क्योंकि मुझे महसूस हो गया कि पैसा हर चीज नहीं होता। अब वैसे भी मेरी प्राथमिकताएँ बदल गई हैं और भौतिक चीजें खुशी नहीं देतीं।
हवाई जहाज नहीं खरीदा?
इस साल एक छोटा-सा खरीदा है। चार सीटों का है। मैं फ्लाइंग सीखना चाहता हूँ।
हॉटमेल बेचने के बाद से ही आप चर्चा मे आ गए और सैलीब्रिटी बन गए। यह सब कैसा लगता है?
जब मैं भारत आता हूँ तो मुझे सैलीब्रिटी का दर्जा मिलता है। कभी-कभी इससे दिक्कत भी होती है, लेकिन मैं एक-दो हफ्ते बाद ही वापस अमेरिका चला जाता हूँ। अमेरिका में मुझे भारतीय समुदाय के लोगों को छोड़ कोई नहीं जानता। इसलिए वहाँ दिक्कत नहीं होती। दोनों को अगर जोड़कर देखा जाए तो ठीक ही रहता है। अमेरिका में मैं बिना परेशानी के घूम सकता हूँ और भारत आकर सैलीब्रिटी का दर्जा भी हासिल कर लेता हूँ।
अपनी कामयाबी को नियति मानते हैं या मेहनत का नतीजा?
मैं मानता हूँ कि इस जीवन में जो प्रतिभा और क्षमता मिली हैं उनके हिसाब से लोगों को काम करना चाहिए। मैंने अमेरिका में देखा है कि लोग अपनी क्षमताओं का पूरा इस्तेमाल करते हैं। हमारे देश में ऐसा नहीं होता। हम काम चोरी करते हैं और अपनी प्रतिभा का पूरा इस्तेमाल नहीं करते। इसकी सबसे बड़ी वजह है परिस्थितियाँ। मेरा एक दोस्त था जो खेल में अच्छा था लेकिन वो पढ़ाई में लग गया। उन पर घर का दबाव था। सोच सकने की यह आजादी सभी को नहीं मिलती। मैंने इस आजादी को अमेरिका में जाकर देखा, जहाँ लोग अपनी प्रतिभा को पूरी तरह से इस्तेमाल करते हैं।
आपके बारे में कहा जाता है कि आप जितना डटकर काम करते हैं, उतनी ही पार्टियाँ भी करते हैं?
बिल्कुल। एक समय था जब मैं बहुत पार्टियाँ करता था। आजकल काम अधिक हो गया है, पार्टियाँ कम हो गईं हैं।
आप शादी क्यों नहीं कर रहे हैं। आपको कैसी लड़की चाहिए?
कैसे बताऊँ? इतनी आसानी से नहीं बता सकता। शादी ऐसे ही नहीं होनी चाहिए। उसमें रोमांस होना चाहिए। शादी में रोमांच होना चाहिए। कभी कोई तो मिलेगी। लेकिन पता नहीं कैसे और कहाँ मिलेगी। हाँ, लेकिन इतना ज़रूर है कि उसके और मेरे विचार मिलने चाहिए। लड़की बुद्धिमान भी होनी चाहिए। सुंदरता कुछ ही समय रहती है, लेकिन समझदारी और बुद्धिमानी हमेशा के लिए होती है।
आपको कौन से खेल पसंद रहे हैं?
आँखों और हाथ के इस्तेमाल वाला कोई भी खेल खिलवा लो। पहले मैं टेबल टेनिस और बैडमिंटन खेला करता था। आजकल टेनिस और गोल्फ खेलता हूँ। मैं इंटरनेट के माध्यम से अमेरिका में भी क्रिकेट देखा करता हूँ। पिछले 10 सालों से मैं स्कीइंग भी करने लगा हूँ। बहुत रोमांच पैदा करने वाला खेल है यह।
आपने कहा कि स्टैनफर्ड और कैलिफोर्निया काफी बड़े-बड़े लोग मिले थे, आप सबसे ज्यादा किससे प्रेरित हुए?
स्टीव जॉब्स, जिन्होंने एप्पल कंप्यूटर शुरू किया था। उन्होंने जब हम लोगों को संबोधित किया तो मंत्रमुग्ध हो गए और उन्होंने हम लोगों से ये मनवा लिया कि वो जो कर रहे हैं काफी महत्वपूर्ण कर रहे हैं।
और निजी जीवन में?
महात्मा गाँधी। सच पर गाँधी जी के जो विचार हैं मैं उस पर काफी विश्वास करता हूँ कि हम जो कुछ भी करें सच्चाई से करें और सच बोलें। झूठ बोलने लगते हैं तो उसके परिणाम सबके लिए बुरे होते हैं। मुझे लगता है कि निजी जीवन में आदर्श ज्यादा आध्यात्मिक होना चाहिए, धार्मिक नहीं। उन्होंने जो कहा उसके लिए अडिग रहे, इन सिद्धांतों को लेकर उनके लिए मेरे मन में काफी सम्मान है।
हॉटमेल के समय के भारत और आज के भारत में क्या बदलाव पाते हैं?
भारत बहुत बदला है। पहला, भारत में जो प्रतिभा मौजूद हैं उनका इस्तेमाल करते हुए मैं दुनिया के लिए कुछ नया उत्पाद बनाना चाहता हूँ। दूसरा, भारत का बाजार अभी शैशवावस्था में है और अगले 10-20 सालों में बहुत बड़ा हो जाएगा। मैं समझता हूँ कि उस दिशा में मैं भारत केंद्रित निवेश भी कर रहा हूँ। मेरा मानना है कि जो उत्पाद और चीजें अमेरिका और यूरोप में सफल रही हैं वो एक दिन भारत में भी होंगी। जैसे कि न्यूज सर्विस में बाते करें तो मैंने ‘अपना सर्किल’ में निवेश किया है, जो भारत एक सोशल नेटवर्किंग साइट है, जैसे फेसबुक अमेरिका की है। मैं सोचता हूँ कि बाद में ये काफी बड़ी हो जाएगी।
हॉटमेल से मिले पैसे से जो निवेश आपने किया उसका क्या नतीजा रहा?
देखिए, मैं जिस दुनिया में रहता हूँ वहाँ 10 में से नौ निवेश डूब जाते हैं। एक जो चल जाता है वो नौ खराब निवेश से कहीं ज्यादा फायदा दे जाते हैं।
जो लोग आपको आदर्श मानते हों उनके लिए क्या संदेश है?
मैं कहना चाहूँगा कि सपना देखना न छोड़ें। जो कुछ भी करते हैं उसके बारे में सपना देखें। कोई विचार आए तो उसके लिए जोखिम जरूर उठाएँ अगर असफल हो गए तो भी कुछ सीखेंगे। आपको पता है कि जिन्होंने हर्शी चॉकलेट बनाई उन्होंने पहले 14 धंधों में हाथ आजमाया, लेकिन असफल हो गए। बाद में उनकी चॉकलेट बहुत मशहूर हुई। हमेशा कोशिश करते रहें और जोखिम लेते रहें। जिंदगी में जोखिम न लेना ही सबसे बड़ा जोखिम है।
अपने बचपन के बारे में बताएँ?
मेरा बचपन तो काफी शानदार गुजरा। मैं पैदा तो चंडीगढ़ में हुआ था, लेकिन उसके बाद पुणे और बंगलोर में बड़ा हुआ हूँ। दोनों जगहों का मौसम बहुत अच्छा है और एजुकेशन भी काफी अच्छी थी। मैं शुरुआत से ही इंजीनियर बनना चाहता था क्योंकि मैथ्स और फिजिक्स काफी अच्छा था।
मतलब शुरुआत से होशियार बच्चे थे?
नहीं, मैथ्स और फिजिक्स में दिमाग काफी काम करता था, लेकिन दूसरे विषयों इतिहास और भूगोल में दिमाग वैसा नहीं चलता था। इसलिए मुझे बचपन में ही पता चल गया था कि बड़ा होकर इंजीनियर और वैज्ञानिक ही बनना चाहता हूँ।
क्या कभी सोचा था कि बाद में अपनी कंपनी खोलेंगे?
सोचा तो नहीं था, लेकिन परिस्थितियाँ ऐसी बन गईं। मैं जब पिलानी में पढ़ रहा था तो कैलटेक यानी कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी का एंट्रेंस देने का मौका मिला और वहाँ मुझे 100 प्रतिशत स्कॉलरशिप मिल गया। कैलटेक एक ऐसा इंस्टीट्यूट है जिसने सबसे अधिक वैज्ञानिक तैयार किए हैं।
जब ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद मैं कैलटेक से ही मास्टर्स और पीएचडी करना चाहता था तो मुझे मेरे प्रोफेसर ने कहा कि आप अब दूसरे इंस्टीट्यूट में जाएँ क्योंकि आपको यहाँ से जो मिलना था वो मिल चुका है। अगर वहाँ आपको पसंद न आए तो फिर वापस आ जाना। इसके बाद मैंने उनकी सलाह मानते हुए स्टैनफर्ड में जाकर मास्टर्स और पीएचडी का कार्यक्रम शुरू कर दिया।
स्टैनफर्ड में मास्टर्स करने के दौरान मैंने बिजनेस फॉर इलेक्ट्रिकल इंजीनियर्स कोर्स शुरू कर दिया। इसी कोर्स के द्वारा मेरी मुलाकात कई उद्यमियों से हुई जैसे एप्पल कंप्यूटर शुरू करने वाले स्टीव जॉब्स, सन को शुरू करने वाले विनोद खोसला हैं। मैं जब इन लोगों से मिला तो मुझे लगा कि ये सब भी आपकी और मेरी तरह ही आदमी हैं।
अपनी पसंद का एक गाना बताइए?
ताल से ताल मिला... सुना दीजिए।
ऐश्वर्या राय बहुत पसंद है आपको?
नहीं नहीं, गाना काफी अच्छा है और फिल्म बहुत पसंद है।
मुझे बताया गया है कि जब आप अमेरिका गए और अपना काम शुरू करने की सोची तो आपकी जेब में सिर्फ 250 डॉलर थे। क्या ये सही बात है?
बिल्कुल सही बात है क्योंकि उस समय विदेशी मुद्रा अधिनियम के तहत आप देश से अधिकतम 250 डॉलर लेकर ही जा सकते थे और मुझे कैलटेक से पूरी स्कॉलरशिप मिली था, तो मैं सिर्फ इतने ही पैसे लेकर गया था।
कोर्स करने के बाद सीधे अपनी कंपनी डालने की सोची या फिर कहीं नौकरी की?
मैंने स्टैनर्फ से मास्टर्स करने के बाद मैंने तय कर लिया कि पीएचडी नहीं करूँगा और एप्पल कंप्यूटर में डिजाइनर की नौकरी करने लगा। लैपटॉप के ‘ब्रेन’ यानी चिप्स को डिजाइन किया और यहाँ दो साल नौकरी की। इसके बाद एक छोटी-सी कंपनी फायर पावर सिस्टम्स में नौकरी शुरू की। यहाँ भी दो साल नौकरी की, उसके बाद जब ये कंपनी बंद होने लगी तो सोचने लगा कि मैं अपने लिए क्या कर सकता हूँ।
ये कब की बात है?
ये सन 1995 की बात है। तब मैं सोचने लगा कि क्या कर सकता हूँ। इंटरनेट उन दिनों में शुरू ही हो रहा था और काफी कम लोग इस्तेमाल कर रहे थे तकरीबन डेढ़-दो करोड़ लोग। मुझे आभास हो गया कि एक दिन यह बहुत बड़ा रूप लेगा और सब लोग इसका इस्तेमाल करेंगे।
आभास हो गया था या सपना देखा? आप भविष्य को देख सके यही तो कमाल है?
नहीं, वास्तव में मैं भविष्य तो नहीं देख सकता था, लेकिन कुछ ऐसी चीजें थीं जिसका आभास हुआ। सूचना को अलग-अगल कंप्यूटर से इकट्ठा करना काफी कठिन था, लेकिन वेब के जरिये यह काफी आसान था। इससे मुझे लगा कि भविष्य में हर कोई इसका उपयोग करेगा और सोचने लगा कि इस क्षेत्र में मैं क्या कर सकता हूँ, जो अब तक नहीं हुआ है। इसी सोच से ‘हॉटमेल’ का जन्म हुआ।
हॉटमेल बनाने तक का सफर कैसे पूरा किया?
मैंने एक कंपनी जाबा सॉफ्ट शुरू कर दी थी जो व्यक्तिगत जानकारी इंटरनेट पर स्टोर करके किसी भी कंप्यूटर द्वारा पाई जा सकती थी। इसके बाद मैंने इसका बिजनेस प्लान बनाया और अपने पार्टनर जैक स्मिथ को दिखाया। जब हम इसका बिजनेस मॉड्यूल विकसित कर रहे थे, तो जिनकी कंपनी में काम कर रहे थे तो वो भी फायर पावर में काम कर चुके थे।
उन्होंने कंपनी के इंटरनल नेटवर्क में फायर वॉल लगा दिया जिससे हम ऑफिस में रहते हुए अपना पर्सनल ई-मेल नहीं चेक कर सके। इसके बाद हमें विचार आया कि क्यों न ई-मेल को भी वेब पर डाल दें ताकि इसे किसी भी कंप्यूटर पर और कहीं भी देखा जा सके। इसी विचार से हॉटमेल का जन्म हुआ। हॉटमेल को करीब आज 30 करोड़ लोग इस्तेमाल कर रहे हैं, जो इंटरनेट के उपयोगकर्ताओं की एक-तिहाई है।
हॉटमेल से पहले इस तरह का कोई ई-मेल एकाउंट नहीं था, जिसे किसी भी कंप्यूटर से और कही से भी जाँचा जा सके?
बिल्कुल नहीं।
इसका नाम हॉटमेल ही क्यों रखा?
जो तकनीक हम इस्तेमाल कर रहे थे उसका नाम था एचटीएमएल, इसी के आधार पर हमने हॉटमेल नाम रखा।
अच्छा, लोगों ने तो सोचा था कि आप अपना भी प्रचार कर रहे हैं?
मैं ‘हॉटमेल’ तो हॉटमेल खोलने के बाद बना, उससे पहले कहाँ था।
आपने नए विचार पर कंपनी खोली, लेकिन कितने दिन चलाई?
कंपनी शुरू हुई 14 फरवरी, 1996 और 30 दिसंबर, 1997 में बेच दी। दो साल से भी कम चलाई कंपनी।
इस दो साल के दौरान बेचने को लेकर कब बातचीत शुरू हुई?
अक्टूबर 1997 में बातचीत शुरू हो गई थी। जब सौद हुआ तो मेरी उम्र केवल 28 साल थी। मुझे विश्वास ही नहीं हुआ कि इतने कम समय में एक कंपनी इतनी बड़ी हो गई।
बातचीत के दौरान बिल गेट्स से मुलाक़ात हुई थी?
13 अक्टूबर 1997 को पहली बार बिल गेट्स से मिला था।
जब बिल गेट्स से मिले तो कैसे लगे?
पहले तो मैं काफी डर गया कि बिल गेट्स से मिलना है कि दुनिया के सबसे अमीर आदमी हैं और सॉफ्टवेयर की दुनिया के बादशाह हैं। पहले तो मैं बहुत नर्वस था, लेकिन 15 मिनट बाद सब कुछ सामान्य हो गया, जैसा कि मैंने पहले भी कहा कि बड़े और सफल लोग भी हमारी और आपकी तरह ही होते हैं। उसके बाद हमारी काफी बातें हुईं और बाद में दोस्ती भी हो गई।
बिल गेट्स में ऐसी कोई बात दिखी जिससे लगा कि इसलिए ही वो दुनिया के सबसे धनी व्यक्ति हैं?
नहीं, देखने से ऐसा कुछ भी नहीं लगता है। ये है कि दिमाग उनका काफी तेज था और उन्होंने हॉटमेल के बारे में कई रोचक सवाल पूछे।
अच्छा तो ये बताइए जब हॉटमेल को बेचने को लेकर जब बात चल रही थी तो क्या आप बहुत सख्त तोल-मोल करने वाले साबित हुए या फिर नुकसान ही हुआ?
मुझे ये पता था कि माइक्रोसॉफ्ट के एमएसएन में एक विश्वस्त वेब मेल नहीं था और वे एक ऐसी कंपनी ढूँढ रहे थे, जिनके पास ये हो। हम वेब मेल के क्षेत्र में सबसे आगे थे और हमें यही पता लगाना था कि हमारी सबसे आगे वाली इस स्थिति का उनके लिए क्या महत्व था। फिर एक सीमा होती है जिसके आगे वो देने के लिए तैयार नहीं होते।
उन्होंने जब शुरुआत की तो 160 मिलियन डॉलर से की तो मुझे लगा कि ओपनिंग ऑफर के रूप में काफी कम है। इसके बाद मैंने काउंटर ऑफर 750 डॉलर मिलियन का किया। हालाँकि ये मुझे भी पता था और उन्हें भी पता था कि ये बहुत ज्यादा था। फिर एक समयसीमा भी थी कि उस साल के बाद ये सौदा नहीं हो सकता था। इसलिए आखिर में हम भी कुछ नीचे आए और कुछ वो आगे बढ़े। मेरा मानना है कि 400 मिलियन डॉलर से ज्यादा तक इस सौदे को कोई भी नहीं ले जा सकता था।
जब इसमें से आपके हिस्से का पैसा एकाउंट में आया तो आपने क्या-क्या योजना बनाई?
थोड़े दिनों तक उत्साहित था। दो-तीन महीने तक मैं सोचता रहा कि जो चाहूँ वो मेरी पहुँच में है। मैंने तीन दिनों में तीन गाड़ियाँ बीएमडब्ल्यू, फेरारी और पोर्श पोर्श खरीदी। अपने माता-पिता के लिए बंगलोर में एक बढ़िया घर खरीदा। अपने लिए सैन फ्रांसिस्को में एक शानदार पेंटहाउस फ्लैट खरीदा, जहाँ से आप पूरा शहर देख सकें गोल्डन गेट से बे ब्रिज तक। लेकिन ये सब ज्यादा दिनों तक नहीं रहा क्योंकि मुझे महसूस हो गया कि पैसा हर चीज नहीं होता। अब वैसे भी मेरी प्राथमिकताएँ बदल गई हैं और भौतिक चीजें खुशी नहीं देतीं।
हवाई जहाज नहीं खरीदा?
इस साल एक छोटा-सा खरीदा है। चार सीटों का है। मैं फ्लाइंग सीखना चाहता हूँ।
हॉटमेल बेचने के बाद से ही आप चर्चा मे आ गए और सैलीब्रिटी बन गए। यह सब कैसा लगता है?
जब मैं भारत आता हूँ तो मुझे सैलीब्रिटी का दर्जा मिलता है। कभी-कभी इससे दिक्कत भी होती है, लेकिन मैं एक-दो हफ्ते बाद ही वापस अमेरिका चला जाता हूँ। अमेरिका में मुझे भारतीय समुदाय के लोगों को छोड़ कोई नहीं जानता। इसलिए वहाँ दिक्कत नहीं होती। दोनों को अगर जोड़कर देखा जाए तो ठीक ही रहता है। अमेरिका में मैं बिना परेशानी के घूम सकता हूँ और भारत आकर सैलीब्रिटी का दर्जा भी हासिल कर लेता हूँ।
अपनी कामयाबी को नियति मानते हैं या मेहनत का नतीजा?
मैं मानता हूँ कि इस जीवन में जो प्रतिभा और क्षमता मिली हैं उनके हिसाब से लोगों को काम करना चाहिए। मैंने अमेरिका में देखा है कि लोग अपनी क्षमताओं का पूरा इस्तेमाल करते हैं। हमारे देश में ऐसा नहीं होता। हम काम चोरी करते हैं और अपनी प्रतिभा का पूरा इस्तेमाल नहीं करते। इसकी सबसे बड़ी वजह है परिस्थितियाँ। मेरा एक दोस्त था जो खेल में अच्छा था लेकिन वो पढ़ाई में लग गया। उन पर घर का दबाव था। सोच सकने की यह आजादी सभी को नहीं मिलती। मैंने इस आजादी को अमेरिका में जाकर देखा, जहाँ लोग अपनी प्रतिभा को पूरी तरह से इस्तेमाल करते हैं।
आपके बारे में कहा जाता है कि आप जितना डटकर काम करते हैं, उतनी ही पार्टियाँ भी करते हैं?
बिल्कुल। एक समय था जब मैं बहुत पार्टियाँ करता था। आजकल काम अधिक हो गया है, पार्टियाँ कम हो गईं हैं।
आप शादी क्यों नहीं कर रहे हैं। आपको कैसी लड़की चाहिए?
कैसे बताऊँ? इतनी आसानी से नहीं बता सकता। शादी ऐसे ही नहीं होनी चाहिए। उसमें रोमांस होना चाहिए। शादी में रोमांच होना चाहिए। कभी कोई तो मिलेगी। लेकिन पता नहीं कैसे और कहाँ मिलेगी। हाँ, लेकिन इतना ज़रूर है कि उसके और मेरे विचार मिलने चाहिए। लड़की बुद्धिमान भी होनी चाहिए। सुंदरता कुछ ही समय रहती है, लेकिन समझदारी और बुद्धिमानी हमेशा के लिए होती है।
आपको कौन से खेल पसंद रहे हैं?
आँखों और हाथ के इस्तेमाल वाला कोई भी खेल खिलवा लो। पहले मैं टेबल टेनिस और बैडमिंटन खेला करता था। आजकल टेनिस और गोल्फ खेलता हूँ। मैं इंटरनेट के माध्यम से अमेरिका में भी क्रिकेट देखा करता हूँ। पिछले 10 सालों से मैं स्कीइंग भी करने लगा हूँ। बहुत रोमांच पैदा करने वाला खेल है यह।
आपने कहा कि स्टैनफर्ड और कैलिफोर्निया काफी बड़े-बड़े लोग मिले थे, आप सबसे ज्यादा किससे प्रेरित हुए?
स्टीव जॉब्स, जिन्होंने एप्पल कंप्यूटर शुरू किया था। उन्होंने जब हम लोगों को संबोधित किया तो मंत्रमुग्ध हो गए और उन्होंने हम लोगों से ये मनवा लिया कि वो जो कर रहे हैं काफी महत्वपूर्ण कर रहे हैं।
और निजी जीवन में?
महात्मा गाँधी। सच पर गाँधी जी के जो विचार हैं मैं उस पर काफी विश्वास करता हूँ कि हम जो कुछ भी करें सच्चाई से करें और सच बोलें। झूठ बोलने लगते हैं तो उसके परिणाम सबके लिए बुरे होते हैं। मुझे लगता है कि निजी जीवन में आदर्श ज्यादा आध्यात्मिक होना चाहिए, धार्मिक नहीं। उन्होंने जो कहा उसके लिए अडिग रहे, इन सिद्धांतों को लेकर उनके लिए मेरे मन में काफी सम्मान है।
हॉटमेल के समय के भारत और आज के भारत में क्या बदलाव पाते हैं?
भारत बहुत बदला है। पहला, भारत में जो प्रतिभा मौजूद हैं उनका इस्तेमाल करते हुए मैं दुनिया के लिए कुछ नया उत्पाद बनाना चाहता हूँ। दूसरा, भारत का बाजार अभी शैशवावस्था में है और अगले 10-20 सालों में बहुत बड़ा हो जाएगा। मैं समझता हूँ कि उस दिशा में मैं भारत केंद्रित निवेश भी कर रहा हूँ। मेरा मानना है कि जो उत्पाद और चीजें अमेरिका और यूरोप में सफल रही हैं वो एक दिन भारत में भी होंगी। जैसे कि न्यूज सर्विस में बाते करें तो मैंने ‘अपना सर्किल’ में निवेश किया है, जो भारत एक सोशल नेटवर्किंग साइट है, जैसे फेसबुक अमेरिका की है। मैं सोचता हूँ कि बाद में ये काफी बड़ी हो जाएगी।
हॉटमेल से मिले पैसे से जो निवेश आपने किया उसका क्या नतीजा रहा?
देखिए, मैं जिस दुनिया में रहता हूँ वहाँ 10 में से नौ निवेश डूब जाते हैं। एक जो चल जाता है वो नौ खराब निवेश से कहीं ज्यादा फायदा दे जाते हैं।
जो लोग आपको आदर्श मानते हों उनके लिए क्या संदेश है?
मैं कहना चाहूँगा कि सपना देखना न छोड़ें। जो कुछ भी करते हैं उसके बारे में सपना देखें। कोई विचार आए तो उसके लिए जोखिम जरूर उठाएँ अगर असफल हो गए तो भी कुछ सीखेंगे। आपको पता है कि जिन्होंने हर्शी चॉकलेट बनाई उन्होंने पहले 14 धंधों में हाथ आजमाया, लेकिन असफल हो गए। बाद में उनकी चॉकलेट बहुत मशहूर हुई। हमेशा कोशिश करते रहें और जोखिम लेते रहें। जिंदगी में जोखिम न लेना ही सबसे बड़ा जोखिम है।
