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खूब भगाया चिंपाजी ने...

चिंपाजी कोलकाता
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चिंपाजी को आम तौर पर इन्सानों का दोस्त कहा जाता है, लेकिन तभी तक जब तक यह विशाल जीव पिंजरे के भीतर रहे। इसके पिंजड़े से बाहर आ जाने पर कितना हंगामा हो सकता है इसका नजारा बुधवार की शाम को कोलकाता के अलीपुर चिड़ियाघर में देखने को मिला।

कोलकाता के अलीपुर चिड़ियाघर में आए दर्शकों ने इस बात की कल्पना तक नहीं की होगी कि उनको इतनी बड़ी मुसीबत का सामना करना पड़ेगा।

वहाँ रानी व बाबू नामक दो चिंपाजी बुधवार शाम अचानक अपने पिंजड़े से बाहर निकल आए। उन्होंने दो महिला दर्शकों को पंजा मारने का भी प्रयास किया। उन विशालकाय जीवों को देखते ही चिड़ियाघर परिसर में भगदड़ मच गई और लोग वहाँ से भागने लगे।

चिंपाजी ने लात मारकर गिराया : चिड़ियाघर के निदेशक सुबीर चौधरी कहते हैं कि चिंपाजी दंपति के पिंजड़े में लगा ताला पुराना था। वे उसे तोड़कर बाहर निकल आए। लेकिन बाहर आने के बाद लोगों की चीख-पुकार सुनकर वे घबरा गए और फिर अपने पिंजरे में घुस गए।

चौधरी कहते हैं कि अब पिंजरे में एक नया ताला लगाया जाएगा और इस मामले में किसी की गलती नहीं है। प्रबंध समिति की बैठक में भी इस मामले पर विचार किया जाएगा। चौधरी चाहे जो भी दलील दें, जाड़े की दोपहरी में चिड़ियाघर घूमने के बाद बाघ के पिंजरे के बाहर आराम कर रहे दास परिवार को यह अनुभव जीवन भर याद रहेगा।

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परिवार की बुजुर्ग महिला कानन दास अब भी उसे याद कर सिहर उठती हैं। वे कहती हैं कि हम लोग घूमने के बाद कुछ देर के लिए आराम करने बैठे थे। अचानक वह विशाल जानवर मेरे कंधे पकड़कर हिलाने लगा और लात से मारकर मुझे गिरा दिया। यह देखकर मेरी पुत्रवधू पंपादेवी ने चिंपाजी को मुक्के से मारा। इस पर चिंपाजी ने उसे भी एक लात मार दी, जिससे वे नीचे गिर गईं।

रानी तो सुरक्षा कर्मचारियों के शोरगुल से जल्दी ही पिंजरे में लौट गई, लेकिन बाबू को पकड़ने में चिड़ियाघर के कर्मचारियों के पसीने छूट गए। वह पूरे इलाके में काफी देर तक भागता रहा और इस दौरान चिड़ियाघर में आतंक व अफरातफरी का माहौल रहा।

अफरातफरी : चिड़ियाघर में बुधवार को कोई आठ हजार दर्शक पहुँचे थे। बाबू के पिंजरे में लौटने के बाद उन लोगों ने चैन की साँस ली, लेकिन इस घटना के घंटों बाद भी इसका आतंक उनके चेहरों पर साफ नजर आ रहा था।

हावड़ा के शिक्षक सुकुमार घोष अपने दो बच्चों व पत्नी के साथ घूमने आए थे। वे कहते हैं कि अचानक शोरगुल मचा और लोग बेतहाशा भागने लगे। पहले तो कुछ समझ में ही नहीं आया। फिर देखा कि एक चिंपाजी दो लोगों को खदेड़ रहा है। उस समय दिमाग ही काम नहीं कर रहा था छोटे बच्चों को लेकर कहाँ जाए। फिर हम वहीं एक पेड़ की आड़ में छिप गए।

एक अन्य दर्शक रूमा पाल तो जान बचाने के लिए अपने पति के साथ एक रेस्तराँ की रसोई में घुस गई। एक पेड़ के नीचे बैठकर नाश्ता कर रहे दो मित्र खगेन व अभिजीत तो चिंपाजी को अपनी ओर लपकते देख टिफिन वहीं छोड़कर सिर पर पाँव रखकर भागने लगे। बाद में उन्होंने एक रेस्तराँ के भीतर घुसकर पीछा छुड़ाया।

अब इस घटना के बाद चिड़ियाघर की प्रबंधन समिति ने विभिन्न जानवरों के पिंजरों की नए सिरे से जाँच करने व खामियों को दूर करने का फैसला किया है ताकि दोबारा ऐसा कोई घटना नहीं हो।