''इंदिराजी पहली और आखिरी पसंद''
'एक मुलाकात' में मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद
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बचपन की कुछ खास यादें?
हमारा घर व्यापार, कृषि, राजनीति और शिक्षा का संगम रहा है। मेरे दादाजी अच्छे शिकारी थे और बहुत अच्छे पहलवान भी। वो छह फुट चार इंच लंबे थे और अच्छे किसान भी थे। मेरे पिता बिजनेसमैन थे और जम्मू-कश्मीर के प्रमुख ठेकेदारों में से एक थे। मैं समझता हूँ कि बचपन में मैंने जितना पैसा देखा है, उतना कांग्रेस पार्टी के जनरल सेक्रेटरी के रूप में मैंने बाँटा जरूर होगा, लेकिन मेरे पास नहीं रहा।
आपको सुनकर हैरानी होगी कि शायद मैं हिंदुस्तान का पहला आदमी होऊँगा जिसने तीन साल की उम्र में वोट डाला है। फर्जी नहीं, दरअसल मेरे पिता करीब 20-25 साल तक नेशनल कॉन्फ्रेंस के तहसील अध्यक्ष भी रहे। एक बार जब मैं उनके साथ वोट डालने के लिए गया मैंने बक्से में वोट डालने की जिद की। जब उन्होंने नहीं दिया तो मैं रोने लगा। फिर वहाँ मौजूद एजेंटों ने कहा इनको ही डालने दीजिए।
आपका सबसे पसंदीदा खेल कौन-सा है, क्रिकेट या टेनिस?
बदकिस्मती से क्रिकेट से मैं कभी भी प्रभावित नहीं हुआ। एक नफरत तो ये है कि जब मैं छठी क्लास में था तो बैटिंग कर रहा था और बॉल सीधे मेरी नाक में आ लगी। फिर नाक से इतना खून बहा कि 18 दिन के बाद बिस्तर से उठा। बचपन में खेलते हुए जब कभी धक्का लगता था तब भी खून निकलता था और कभी-कभी आज भी मुझे तकलीफ होती है।
और दूसरी नफरत ये है जब सारी दुनिया काम कर रही होती है तो यहाँ लोग छुट्टी कर लेते हैं। क्रिकेट ने पूरी दुनिया को पागल बना दिया है। हजारों करोड़ों रुपयों का काम इसकी वजह से रुक जाता है।
पसंदीदा महिला राजनीतिक हस्ती कौन हैं?
ये कहने में मुझे एक सेकंड भी नहीं लगेगा। इंदिरा गाँधी ही पहली और आखिरी पसंद हैं। मुझे लगता है वो एक नेता थीं, एक माँ थीं और एक दोस्त थीं। वे बहुत खयाल रखती थीं।
जब कांग्रेस महासचिव था तो मैं उनके साथ राज्य स्तरीय सम्मेलन में हिस्सा लेने सीतापुर चला गया। उनके लिए कमलापति त्रिपाठी वगैरह ने खाना रखा था ऊपर कमरे में और मैं प्रतिनिधियों के साथ मैदान में खाना खा रहा था। तो इतने में राजेंद्र कुमारी बाजपेयी ढूँढते-ढूँढते वहाँ आईं और कहा कि मिसेजज गाँधी बुला रही हैं। मैने पूछा कि क्यों बुला रही हैं तो उन्होंने बताया कि क्योंकि मुझे चावल पसंद हैं इसलिए मुझे बुलाया है।
मैं कई और प्रधानमंत्रियों के साथ भी केंद्रीय मंत्रियों के रूप में रहा, लेकिन कई तो ये परवाह भी नहीं करते कि हम खा भी रहे हैं कि नहीं। एक प्रधानमंत्री का जिक्र मैं करूँगा, नाम नहीं लूँगा। मैं और वो एक साथ हेलिकॉप्टर से चुनाव प्रचार के लिए गए और फिर अलग-अलग गाड़ियों में प्रचार किया। मुझे और दो दिन रुकना था। एयरपोर्ट पर जब मैं उन्हें छोड़ने गया तो वो मुझसे पूछने लगे कि मैं वहाँ कितने दिनों से हूँ। यानी उन्हें ये भी मालूम नहीं था कि हम सुबह एक साथ ही दिल्ली से आए हैं।
जिंदगी का सबसे भावुक क्षण कौन-सा रहा?
मैं फिर कहूँगा, इंदिरा गाँधी, संजय गाँधी और राजीव गाँधी की मौत। और सबसे ज्यादा सदमा इंदिरा गाँधी की मौत से लगा। उनकी मौत से पहले हमारा डिस्कशन कश्मीर पर और इत्तफाक की बात है कि चिनारों के बारे में हुआ। मैं उस वक्त सूचना प्रसारण राज्यमंत्री था। सुबह के चार बजे आरके धवन ने मुझे फोन किया कि इंदिराजी बुला रही हैं। तो मैं सीधे उनके पास पहुँचा गया।
इतने में इंदिराजी अंदर से आ गईं सवा चार बजे और सिर्फ नाइट गाउन में। मैंने पहली बार उन्हें नाइट गाउन में देखा था। उन्होंने कहा कि तुम्हें मालूम है इलेक्शन में जाना है फिर शायद फुरसत न मिले। मैं सोचती हूँ कि दो-तीन दिन छुट्टियों के लिए जाऊँ। उन्होंने कहा कि चिनार के पत्ते उन्हें बचपन से ही अच्छे लगते हैं। उनका रंग बदलना उन्हें माता-पिता के जमाने से ही अच्छा लगता है। उन्होंने दो-तीन दिन वहाँ गुजारे।
मुझे याद है 31 अक्टूबर के दिन मैं बंबई हवाई अड्डे पर विमान की सीढ़ियों से उतर रहा था तो ग्राउंड स्टाफ की एयर होस्टेस ने मुझे बताया कि मि. आजाद बहुत बुरी ख़बर है...वायरलेस पर मैसेज आया है इंदिराजी को गोली मार दी गई है और वे अस्पताल में हैं। वहाँ से मैं सीधे अस्पताल गया तब तक वे मर चुकी थीं। उस वक्त मैं जितना चिल्लाया हूँ। न कभी चिल्लाया था और न कभी चिल्ला पाऊँगा।
पसंदीदा गाने?
फ़िल्म कभी-कभी का गाना ‘कभी-कभी मेरे दिल में खयाल आता है... ’ और ‘मैं जिंदगी का साथ निभाता चला गया, हर फिक्र को धुएँ में उड़ाता चला गया...’ मुझे बहुत पसंद हैं।
हाल ही में कोई पिक्चर देखी?
‘लगे रहो मुन्ना भाई’ बहुत अच्छी लगी। मैं खुद गाँधीजी से बहुत प्रभावित हूँ।
आपके पसंदीदा अभिनेता कौन हैं?
अमिताभ बच्चन। वे एक महान कलाकार हैं। उन्हें नकारा नहीं जा सकता।
और आपकी पसंदीदा अदाकारा?
‘दो कलियां’ में थीं माला सिन्हा वो बहुत अच्छी हैं। मुझे याद है जब मैं जम्मू साइंस कॉलेज में पढ़ता था और जिबल चौक में हमने दोपहर का मैटिनी शो देखा था। मीना कुमारी भी अपने आप में लाजवाब थीं। और आपकी पसंदीदा अदाकारा?
‘दो कलियां’ में थीं माला सिन्हा वो बहुत अच्छी हैं। मुझे याद है जब मैं जम्मू साइंस कॉलेज में पढ़ता था और जिबल चौक में हमने दोपहर का मैटिनी शो देखा था। मीना कुमारी भी अपने आप में लाजवाब थीं।
