''अप्पन समाचार'' की धूम
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अप्पन समाचार (हमारा समाचार) नामक इस समाचार कार्यक्रम को इसी महीने यानी दिसंबर 2007 के शुरू में पहली बार टेलीविजन पर दिखाया गया था और तभी से ये मुजफ्फरपुर जिले के एक दर्जन से अधिक गाँवों में काफी लोकप्रिय हो गया है।
इसे कभी प्रोजेक्टर पर और कभी किराए के वीडियो प्लेयर और एक बड़े टेलीविजन सेट पर दर्शकों के सामने पेश किया जाता है।
निर्माण : कार्यक्रम का निर्माण गंडक नदी के किनारे स्थित रामलीला गाची गाँव के एक अँधेरे से कमरे में किया जाता है जिसमे एक मेज, दो कुर्सियाँ, एक पुराना टेलीविजन मौजूद है और फर्श पर तारों का जाल बिछा है।
गाँव में पिछले चार साल से बिजली नहीं है और यहाँ अभी तक केबल टेलीविजन और लैंडलाइन फोन नहीं पहुँचे हैं। रामलीला गाची में मोबाइल फोन आए हुए भी केवल एक वर्ष ही हुआ है।
गाँव से सबसे निकट का अस्पताल 62 किलोमीटर दूर है और सबसे नजदीकी पुलिस थाना 20 किलोमीटर की दूरी पर है। गाँव के लोग डकैतों और अपहर्ताओं से अपनी सुरक्षा के लिए अवैध हथियार अपने पास रखते हैं।
गाँव की तीन लड़कियाँ और एक नवविवाहिता समाचार एकत्र कर करने के लिए साइकिल पर निकलती हैं और इनके पास एक सस्ता हैंडीकैम यानी वीडियो कैमरा, एक ट्रायपॉड और एक माइक्रोफोन रहता है।
टीम : खुशबू कुमारी केवल 15 वर्ष की हैं लेकिन 45 मिनट के समाचार वो एक सधे हुए एंकर की तरह पढ़ती हैं। अनीता कुमारी उम्र में कुछ बड़ी हैं लेकिन अपने मोहक व्यक्तित्व की वजह से इलाके में काफी मशहूर हैं।
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इसी तरह कैमरा संभालने वाली रूबी कुमारी और नवविवाहित स्क्रिप्ट लेखिका रूमा देवी भी अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाती हैं।
इन दोनों ने बताया कि वे प्रतिदिन ऐसे विषय खोजती हैं जो ग्रामीणों को प्रभावित करते हैं और फिर इन पर प्रत्येक कोण को ध्यान में रखकर काम किया जाता है और फिर इन्हें प्रदर्शित किया जाता है। इस अनोखे कार्यक्रम की योजना एक सामाजिक कार्यकर्ता संतोष सारंग की देन है।
इस कार्यक्रम के पहले संस्करण में महिलाओं के सशक्तिकरण, निर्धनता और कृषि की समस्याओं से संबंधित समाचार दिखाए गए थे।
गाँव में बिजली नहीं होने की वजह से 'अप्पन समाचार' ने प्रोजेक्टर और अन्य उपकरणों को बिजली की आपूर्ति के लिए जेनरेटर किराए पर लिया है। संतोष सारंग ने बताया कि जल्द ही इस कार्यक्रम को प्रत्येक सप्ताह दिखाया जाएगा।
गाँव के लोग इस बात से काफी खुश हैं कि उनकी समस्याओं को टेलीविजन पर दिखाया जा रहा है और इलाके के सभी लोग उनकी आवाज सुन रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि उनकी आवाज सरकारी लोगों के कानों तक भी पहुँचेगी।
