सुषमा स्वराज को मोदी कैबिनेट में क्यों नहीं शामिल किया गया?-सोशल

पुनः संशोधित शुक्रवार, 31 मई 2019 (12:44 IST)
30 मई की शाम जब नरेंद्र मोदी का शपथ ग्रहण समारोह धीरे-धीरे परवान चढ़ रहा था, तब ज़्यादातर लोगों की निगाहें दो चेहरों पर टिकी थीं। एक अमित शाह और दूसरी सुषमा स्वराज। गुजरात बीजेपी अध्यक्ष जीतू वघाणी के और फिर राष्ट्रपति भवन के मंच पर अमित शाह की मौजूदगी ने ये साफ़ किया कि मोदी के सेनापति कहे जाने वाले अमित शाह सरकार में शामिल होंगे।

अब निगाहें पर टिकीं थीं। तभी कैमरों में सुषमा स्वराज सभी का अभिवादन करते हुईं दिखीं। कुछ लोगों को लगा कि सुषमा उस मंच पर जाकर बैठेंगी, जिनमें सरकार में शामिल होने वाले मंत्रियों को बैठना है। लेकिन जब सुषमा स्वराज अभिवादन करते हुए दर्शक दीर्घा में बैठीं तो ये साफ़ हो गया कि वो मोदी सरकार-2 का हिस्सा नहीं होंगी।
शपथ के बाद सुषमा स्वराज ने ट्वीट कर कहा, ''प्रधानमंत्री जी, आपने मुझे पांच साल तक बतौर विदेशमंत्री देश की सेवा का मौक़ा दिया। सम्मान दिया। आपकी आभारी हूं।'' सुषमा स्वराज भले ही खुद को सरकार में शामिल नहीं किए जाने को सहजता से ले रही हों लेकिन उनके प्रशंसक इस बात से नाखुश हैं।

सुषमा क्यों नहीं हुईं शामिल?
सुषमा स्वराज को लेकर सोशल मीडिया पर काफी लोग लिख रहे हैं। गुरुवार शाम सुषमा स्वराज ट्विटर पर टॉप ट्रेंडस में भी रही थीं। आइए आपको पढ़वाते हैं कि सुषमा को लेकर लोग सोशल मीडिया पर क्या कुछ लिख रहे हैं।
मोहम्मद अंसार शेख ने लिखा, ''सुषमा ने बहुत कमाल का काम किया। हमें उनका शुक्रिया अदा करना चाहिए। सुषमा जी, आपकी दरियादिली को याद रखा जाएगा।''

यशवर्धन ने लिखा, ''पिछली सरकार की वो सबसे अच्छी मंत्री थीं। भगवान आपका भला करे।''

मार्क लिखते हैं, ''वो अपनी सेहत का बहुत अच्छे से ख्याल नहीं रख पा रही थीं। ये सुषमा का फ़ैसला था। हमें इसका सम्मान करना चाहिए।''
केएल शर्मा ने लिखा, ''सुषमा एक शक्तिशाली और बहादुर नेता हैं। संसद में सुषमा की जगह कोई नहीं ले सकता। हम सुषमा की सेहत के लिए दुआएं करते हैं।''


पूनम शर्मा लिखती हैं, ''सुषमा स्वराज ने विषम परिस्थितियों में भी भारत का मान बढ़ाया है। सब व्यर्थ। आडवाणी जी के शुभचिंतक होने की कीमत सुषमा को चुकानी पड़ी।''

ज़ाकिर अली त्यागी ने लिखा, ''मंत्रालय संभाल चुके नेताओं में सुषमा जी एक ऐसी नेता रहीं, जिन्होंने पीड़ितों की ओर से आधी रात में भी किए ट्वीट पर एक्शन लिया। विदेशों में फंसे उनके रिश्तेदारों को पीड़ितों से मिलाया। तमाम उम्र याद रहेंगी। आपके न होने की कमी खलेगी। कई परिवारों को बेटों से मिलाया।''
रोयन लिखते हैं, ''सुषमा स्वराज कमाल की विदेश मंत्री थीं। आपको सलाम।''

शांता प्रकाश ने लिखा, ''सेहत की वजह से हम सुषमा को कैबिनेट में शामिल करने की जबरदस्ती नहीं कर सकते।''

विवेक लिखते हैं, ''इसका मतलब साफ़ है कि सुषमा स्वराज को नई ज़िम्मेदारी दी जाएगी।''

सुषमा के ट्वीट पर भी हज़ारों लोगों की प्रतिक्रियाएं आईं।

आलिया भट्ट की मां एक्ट्रेस सोनी राज़दान ने लिखा, ''मैडम आपने बहुत कुछ किया। आपने जिनकी हेल्प की वो आपको कभी नहीं भूलेंगे।''
आकाश सिंह ने ट्वीट किया, ''ज़रूरी नहीं कि सुषमा स्वराज जी सरकार में हों, तभी काम कर कर सकती हैं। और भी लोग हैं बीजेपी में उनको भी मौक़ा मिलना चाहिए मंत्री बनकर काम करने का ताकि पता चले कौन कितना योग्य है।''

छाया गुप्ता ने लिखा, ''आपके आत्मविश्वास से भरे शब्द कानों में गूँजते हैं।"

सागर लिखते हैं, अब पासपोर्ट की समस्या होगी तो किसे टैग करेंगे।''

कहानी सुषमा स्वराज की...
नवंबर 2018 में सुषमा स्वराज ने ये ऐलान किया था कि वो 2019 का चुनाव नहीं लड़ेंगी। इस घोषणा के बाद सुषमा के पति और पूर्व राज्यपाल स्वराज कौशल ने कहा था, ''एक समय के बाद मिल्खा सिंह ने भी दौड़ना बंद कर दिया था। आप तो पिछले 41 साल से चुनाव लड़ रही हैं।''


66 साल की सुषमा राजनीति में 25 बरस की उम्र में आईं थीं। सुषमा के राजनीतिक गुरु लालकृष्ण आडवाणी रहे हैं। सुषमा स्वराज एक प्रखर और ओजस्वी वक्ता, प्रभावी पार्लियामेंटेरियन और कुशल प्रशासक मानी जाती हैं।

एक वक़्त था जब बीजेपी में अटलबिहारी वाजपेयी के बाद सुषमा और प्रमोद महाजन सबसे लोकप्रिय वक्ता थे। फिर बात संसद की हो या सड़क की। सुषमा स्वराज की गिनती भाजपा के डी (दिल्ली)-फ़ोर में होती थी। बीते चार दशकों में वे 11 चुनाव लड़ीं, जिसमें तीन बार विधानसभा का चुनाव लड़ीं और जीतीं। सुषमा सात बार सांसद रह चुकी हैं।


तस्वीरों से प्रचार करने वालीं सुषमा
इमरजेंसी के दिनों में बड़ौदा डायनामाइट केस में फंसे जार्ज फ़र्नांडिस ने जेल में ही रहकर मुज़फ़्फरपुर से चुनाव लड़ने का फ़ैसला किया था। तब सुषमा स्वराज ने हथकड़ियों में जकड़ी उनकी तस्वीर दिखा कर ही पूरे क्षेत्र में प्रचार किया। जब चुनाव परिणाम आया तो जॉर्ज दिल्ली के तिहाड़ जेल में बंद थे।

राजनीतिक विश्लेषक बताते हैं कि साल 2013 में नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री का उम्मीदवार बनने से रोकने की लाल कृष्ण आडवाणी की मुहिम में वे आडवाणी के साथ थीं। इस मुहिम में उन्होंने आखिर तक आडवाणी का साथ दिया। पर 2014 में मोदी की जीत के बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।


जानकारों और मोदी के आलोचकों का मानना था कि इस अपराध की सज़ा सुषमा को भविष्य में मिलेगी। इंदिरा गांधी के बाद सुषमा स्वराज दूसरी ऐसी महिला थीं, जिन्होंने विदेश मंत्री का पद संभाला था। बतौर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ट्विटर पर काफ़ी सक्रिय रहती थीं। फिर चाहे विदेश में फँसे लोगों की मदद करना हो या लोगों का पासपोर्ट बनवाना। कुछ मौक़ों पर छोटी बातों पर मदद मांगते लोगों को सुषमा ने मज़ाकिया अंदाज़ में डांट भी लगाई थी।


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