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पिता छत है, पिता है आकाश : फादर्स डे पर विशेष आलेख
पिता! एक निश्चिंतता का नाम है पिता। पिता छत है, पिता आकाश है। पिता वह सुरक्षा कवच भी है, जो अपनी छाती पर तूफान झेलकर ... -
बेटा मैं तुम्हें गले लगाना चाहता हूं : फादर्स डे पर विशेष आलेख
पिता छत है, पिता आकाश है। पिता वह सुरक्षा कवच भी है, जो अपनी छाती पर तूफान झेलकर संतान की रक्षा करता है। -
क्या होगा गणेश विसर्जन के बाद, कल कहीं सूंड, कहीं कान...
आज जिन्हें मंगलमूर्ति कहते हुए लोग पूजा कर रहे थे, कल उनकी दुर्दशा। बाद में नालों में बहती टूटी-फूटी मूर्तियां और ... -
महिला दिवस : हैवानियत का दौर
उनमें मनुष्य का दिल और नैतिकता की भावना का तो सवाल ही कहां है। मगर हमारा समाज भी अजीब है, ऐसी घटनाएं होने पर अक्सर ... -
कोमल कल्पना की मीठी बतिया
बारिश के दिन थे। बरामदे में बैठी दादी अपने नन्हे पोते से बात कर रही थी। बस ऐसी ही मासूम बातें जैसे कि बारिश संग धूप ... -
क्या ऐसे विदा करेंगे हम श्री गणेश को....?
कई पूजाओं में तो पूजा के संग मूर्तिकला को भी महत्व दिया गया है। मिट्टी के बने गोगादेव हों या मां पार्वती, पुरानी ... -
तुम्हारी कब्र में मैं दफन हूं
एक इतालवी फिल्म है 'लाइफ इज ब्यूटीफुल'। फिल्म एक पिता के महान त्याग और बलिदान की कहानी है। नाजी यातना शिविर में एक पिता ... -
यह बगावत नहीं यौन ऊर्जा है
स्वप्न विश्लेषक मधु टंडन ने एक अद्भुत किताब लिखी है, ड्रीम्स एंड बियॉन्ड। यह पुस्तक सपनों की बायलॉजी, दुनियाभर की हर ... -
ऐसा भोजन करें जो मन को शांति दे!
क्या हमारे खाने का संबंध हमारे मन के शांत रहने या व्यग्र रहने से है? तो जवाब है- हां है। भारतीय परंपरा में सदा से ये ... -
यह जो नाम का चक्कर है...
नामों का भी एक जमाना होता है। किसी एक समय में एक तरह के नाम चलते हैं, जमाना बदलने के साथ ही नामों के चलन में भी फर्क आ ... -
खोने न देना आनंदघर का मैजिक बॉक्स
भारतीय रसोई रस और रसायनों से भरपूर है। जी हां रसायन, आप भारत के किसी रसोईघर में प्रवेश कीजिए तो आपको वह किसी लैबोरेटरी ... -
महिला दिवस : पराई नहीं हैं बेटियां
एक कॉलोनी की एक गर्भवती स्त्री एक दूसरी स्त्री के पैर छूने आई। जिसके पैर छूने आई थी उसने पूछा- मेरे ही पैर क्यों छूना ... -
रिश्ता चौबीस कैरेट का
कभी-कभी ऐसे रिश्ते भी बनते हैं जिनका संबंध न खून से होता है, न दुनियादारी से। ये रिश्ते मुंहबोले हों या अनकहे इनमें अलग ... -
शिक्षा हो कला-साहित्य-खेल का संगम
भारतीय माँ-बाप और शिक्षक यहाँ तक कि भारतीय स्कूल- कॉलेजों के प्रबंधक भी पाठ्येतर गतिविधियों को बहुत कम महत्व देते हैं। ... -
रंग भरे मौसम से रंग चुरा कर....
ब्रितानी लेखिका व पत्रकार ऐंजेला हथ ने स्वयं के बारे में एक दिलचस्प बात बताई है। वे कहती हैं कि वे दिनों और महीनों को ... -
ब्यूटीफुल एंड बॉल्ड बार्बी
इस दौड़ती दुनिया में लोगों ने अपने बच्चों को भी सिर्फ और सिर्फ भौतिक सुख-सौंदर्य की ओर भागने में लगा दिया है। ऐसे में ... -
अच्छा पाठक बनना भी एक कला
जयपुर। 'अच्छा लेखक बनने की पहली शर्त है अच्छा पाठक बनना। लेखन की कला के साथ ही पढ़ने की कला भी विकसित की जानी चाहिए ताकि ... -
खूब जम रहा है साहित्य का कुंभ उत्सव
जयपुर। साहित्य का कुंभ उत्सव। जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में आकर यही प्रतीत होता है। साहित्य और किताबों की दुनिया को अक्सर ... -
गुनगुनी धूप का आशीर्वाद
सुहानी धूप के दिनों में एक पुराने मोहल्ले की एक पुरानी दादी मां याद आती हैं। यह धूप घड़ी पढ़ने वाली दादी मां थीं। धूप ... -
मंगलमूर्ति को यूं ना करें विदा...
मूर्तियों पर रसायनयुक्त रंग चढ़ने लगे और देवों की मूर्तियां दैत्याकार बनने लगीं! फिर हर साल नई मूर्ति का चलन! इसके चलते ...
