महिला दिवस : हैवानियत का दौर
पिछले दिनों बेटमा में दो लड़कियों के साथ सामूहिक बलात्कार की खबर जिसने सुनी सन्न रह गया। अभी इस शॉक से जनता उबरी भी न थी कि इसी किस्म की और-और दुर्घटनाओं की खबरें आने लगीं। अपराधी प्रवृत्ति वाले लोगों का दुस्साहस कितना बढ़ गया है। लगता है न उन्हें कानून का खौफ है, न सजा का डर।
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Kaptan ND |
उनमें मनुष्य का दिल और नैतिकता की भावना का तो सवाल ही कहां है। मगर हमारा समाज भी अजीब है, ऐसी घटनाएं होने पर अक्सर हैवानियत की निंदा करने के स्थान पर लड़कियों को ही दोष देने लगता है। भारतीय समाज में बलात्कार के प्रति ऐसी मानसिकता है कि इसमें जो शिकार हुई वह मुंह छुपाती है और बलात्कारी निडर घूमता है।
बड़े-बड़े अपराधी जेलों से चुनाव लड़ रहे हैं। जिस व्यवस्था में पुलिस पकड़ ले तो नेता छुड़ा ले जाते हैं। यानी रक्षक ही भक्षक हैं। जहां गवाहों को धमकियां मिलती हैं, जहां गवाह और वादी की सुरक्षा के लिए कोई प्रबंध नहीं है, वहां दिनदहाड़े अपराध करने का असामाजिक तत्वों का हौसला बढ़ेगा ही। देश और समाज में स्त्रियों के लिए सुरक्षित माहौल बने, इसके लिए समाज में नैतिकता और राजनीति में शुचिता की दरकार है।

