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हिन्दी कविता : निशा
निशा कि दर्शाई हुई नई दिशा कि ओर ख्वाबों के खातिर आंखे मींंचकर चलने लगा ख्वाहिशों के घने जंगलों से गुजरता हुआ -
हिन्दी कविता : शब्दावली
शब्दों की बस्ती में दुनिया अपनी, शब्दावली का शागिर्द हूंं, मैंं शिक्षार्थी शांति से शब्दों को निहारूंं, शब्दों के ... -
हिन्दी कविता : किताब
घुंघट उठाकर देखा सृष्टि यूहीं खोलकर किताब ज्ञान हुआ, पन्ने पलट-पलटकर हौले-हौले विद्वान हुआ...
