पुष्‍य नक्षत्र में किए जाते हैं ये 8 फलदायक कार्य

Pushya nakshatra
अनिरुद्ध जोशी| Last Updated: शुक्रवार, 18 अक्टूबर 2019 (12:40 IST)
ऋग्वेद में को मंगलकर्ता भी कहा गया है। इसीलिए पुष्य नक्षत्र को खरीदारी के लिए विशेष माना जाता है। कहते हैं कि इस मुहूर्त में खरीदी गई कोई भी वस्तु अधिक समय तक उपयोगी, शुभ फल देने वाली और अक्षय होती है। आओ जानते हैं इस नक्षत्र में कौनसे 8 खास कार्य किए जाते हैं।
1.पुष्य नक्षत्र किसी भी महीने में आए, त्योहार हो ना हो पर फिर भी इस दिन कोई भी शुभ कार्य किए जा सकते हैं या किसी भी प्रकार की खरीददारी की जा सकती है।

2.पीपल के पेड़ को पुष्य नक्षत्र का प्रतीक माना जाता है इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले लोग अपने घर के खाली हिस्से में पीपल का वृक्ष लगाकर उसकी पूजा करते हैं जिससे उनके जीवन में हमेशा सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है।
3.पुष्य नक्षत्र में स्वर्ण खरीदने का प्रचलन इसलिए हैं, क्योंकि इसे शुद्ध, पवित्र और अक्षय धातु के रूप में माना जाता है और पुष्य नक्षत्र पर इसकी खरीदी अत्यधिक शुभ होती है। दीपावली के पूर्व आने वाला पुष्य नक्षत्र विशेष होता है, क्योंकि यह मुहूर्त खासतौर से खरीदारी के लिए शुभ माना जाता है।

4.इस नक्षत्र में वाहन, भवन, भूमि और बहीखाते खरीदना भी शुभ होता है। इस दिन मंदिर निर्माण, घर निर्माण आदि काम भी प्रारंभ करना शुभ हैं।

5.इस दिन पूजा या उपवास करने से जीवन के हर एक क्षेत्र में सफलता की प्राप्ति होती है। सर्वप्रथम अपने घरों में सूर्योदय एवं सूर्यास्त के समय मां लक्ष्मी के सामने घी से दीपक जलाएं। किसी नए मंत्र की जाप की शुरुआत करें।

6.इस दिन दाल, खिचड़ी, चावल, बेसन, कड़ी, बूंदी की लड्डू आदि का सेवन भी किय जाता है और यथाशक्ति दान भी कर सकते हैं।

7.इस नक्षत्र में शिल्प, चित्रकला और पुस्तक खरीदना उत्तम माना जाता है। इस दिन से नए कार्यों की शुरुआत करें, जैसे ज्ञान या विद्या आरम्भ करना, कुछ नया सीखना, दुकान खोलना, लेखक हैं तो कुछ नया लिखना आदि।
8.इसके अलावा पुष्य नक्षत्र में दिव्य औषधियों को लाकर उनकी सिद्धि की जाती है। इस दिन कुंडली में विद्यमान दूषित सूर्य के दुष्प्रभाव को घटाया जा सकता है।

यदि पुष्य नक्षत्र सोमवार को आए तो उसे सोम पुष्‍य, मंगलवार को आए तो उसे भौम पुष्य, बुधवार को आए तो बुध पुष्य, गुरुवार को आए तो गुरु पुष्य, शुक्र को आए तो शुक्र पुष्‍य, शनि को आए तो शनि पुष्‍य और रवि को आए तो रवि पुष्‍य नक्षत्र कहते हैं। इनमें से गुरु पुष्‍य, शनि पुष्‍य और रवि पुष्य नक्षत्र सबसे उत्तम बताए गए हैं। सभी का फल अलग-अलग होता है।

 

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