समाज में कुछ चीजें ऐसी होती हैं जो आस्था और अंधविश्वास की महीन रेखा पर टिकी होती हैं। इन्हीं में से एक है- 'बंदर छाप सिक्का'। प्राचीन काल से ही इस सिक्के को लेकर कई तरह की रहस्यमयी कहानियां प्रचलित हैं। माना जाता है कि जिसके पास यह असली सिक्का होता है, उसकी किस्मत रातोंरात बदल जाती है और वह व्यक्ति कुबेर के समान धनी हो जाता है।
रहस्य की उत्पत्ति: कहाँ से आया यह सिक्का?
बंदर छाप सिक्के का इतिहास आज भी एक पहेली बना हुआ है। जानकारों का मानना है कि ये सिक्के भारत के रियासत काल में ठोस तांबे से बनाए गए थे। कहा जाता है कि ये कोई आम मुद्रा नहीं थी, बल्कि किसी विशेष सिद्धि या अनुष्ठान के द्वारा बेहद कम संख्या (गिनती के) में तैयार किए गए थे। प्राचीन समय में ये सिक्के अक्सर पुराने मंदिरों, रहस्यमयी गुफाओं और जंगलों में रहने वाले आदिवासियों के पास देखे गए थे।
सिर्फ सिक्का नहीं, एक 'गुप्त कोड'!
भारत से लेकर एशिया के अन्य देशों तक इस सिक्के की चर्चा है। इसके पीछे कई थ्योरीज दी जाती हैं:
खजाने का कोड: कुछ लोग मानते हैं कि इन सिक्कों के डिजाइन में प्राचीन खजानों के नक्शे या कोड छिपे हुए हैं।
गुप्त संदेश: कहा जाता है कि इनका प्रयोग जासूसी करने या गुप्त समाजों के बीच संदेश भेजने के लिए किया जाता था।
अलौकिक शक्ति: एक प्राचीन मान्यता यह भी है कि इन सिक्कों को हाथ में लेते ही व्यक्ति को अद्भुत मानसिक शक्तियां महसूस होने लगती थीं।
नोट: अक्सर लोग इसे रतलाम रियासत के 'हनुमान सिक्के' से जोड़ देते हैं, लेकिन रहस्यमयी 'बंदर छाप' सिक्का उससे भिन्न और अधिक दुर्लभ माना जाता है। मुगल काल में बादशाह जहांगीर ने भी इस तरह के सिक्के बनाए थे।
पहचान: तीन तरह के विशिष्ट सिक्के
इस रहस्यमयी सिक्के की बनावट ही इसका सबसे बड़ा प्रमाण मानी जाती है। मुख्य रूप से यह तीन रूपों में पाया जाता है:
न्याय का प्रतीक: वह सिक्का जिसमें बंदर का एक हाथ उचित स्थान पर होता है और दूसरा हाथ तराजू को पकड़े हुए होता है। इस पर "सच बोल, पूरा तोल" अंकित होता है।
विलक्षण आकृति: इसमें बंदर का हाथ एक अलग (अनुचित) जगह पर होता है और सिक्के पर बंदर के आसपास बिल्लियां बैठी दिखाई देती हैं।
चेहरा और कोड: तीसरे प्रकार के सिक्के में केवल बंदर का चेहरा होता है। हर सिक्के की आकृति और प्रिंट में मामूली अंतर होता है, जिसे एक खास 'कोड' माना जाता है।
अद्भुत चमत्कार और मान्यताएं
अक्षय धन: माना जाता है कि यदि इसे सिद्ध करके तिजोरी या जेब में रखा जाए, तो यह धन को कई गुना बढ़ा देता है। जितना धन खर्च होता है, उससे अधिक वापस आ जाता है।
नकारात्मकता से सुरक्षा: इसे घर में रखने या इसके जल का छिड़काव करने से नकारात्मक शक्तियां और तांत्रिक बाधाएं दूर रहती हैं।
सफलता का ताबीज: जो लोग राजनीति या व्यापार में उच्च पद की कामना रखते हैं, उनके लिए यह सिक्का किसी वरदान से कम नहीं माना जाता।
साधना में सहायक: आध्यात्मिक साधक इसे अपनी एकाग्रता और साधना की उन्नति के लिए पास रखते थे।
बाजार में कीमत:
चूंकि ये सिक्के अत्यंत दुर्लभ हैं, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार और एंटीक संग्रहकर्ताओं (Antique Collectors) के बीच इनकी कीमत लाखों में हो सकती है। यदि किसी के पास सच में 'असली' और सिद्ध सिक्का है, तो वह इसे बेचकर भी रातोंरात मालामाल बन सकता है।
डिस्क्लेमर: बंदर छाप सिक्का महज एक धातु का टुकड़ा है या चमत्कारिक चाबी, यह आज भी चर्चा का विषय है। लेकिन इतना तय है कि इस सिक्के ने सदियों से इंसान की कल्पनाओं और किस्मत बदलने की उम्मीदों को जीवित रखा है। हालांकि इस सिक्के के नाम पर कई लोग ठगी भी करते हैं। इसलिए लोगों को अपने विवेक का उपयोग करना चाहिए। बाजार में नकली सिक्के ही पाए जाते हैं।