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Last Updated :नई दिल्ली , बुधवार, 24 दिसंबर 2025 (15:53 IST)

2025 में देशों ने जमकर खरीदा सोना, 12 माह में 70 फीसदी रिटर्न, निवेशक मालामाल

gold
Gold Return 2025 : 2025 में चांदी के साथ ही सोने ने भी निवेशकों को जबरदस्त रिटर्न दिया है। दोनों ही बेशकीमती धातुओं ने ना सिर्फ अपने ऑल टाइम हाई को टच किया बल्कि अपनी तेज चाल से सभी को हैरान कर दिया। देश में सोने की नेट असेट वेल्यू 30 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंच चुकी है। इस वर्ष चांदी की चमकदार चाल के सामने भले ही सोने का रिटर्न थोड़ा कम हो लेकिन मात्र एक साल 74 हजार से 1.36 लाख रुपए तक का सफर किसी परिकथा से कम नहीं है।
 
इंडियन बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के मुताबिक 2025 की शुरुआत में सोना 74 हजार रुपए पर था। हालांकि साल खत्म होते होते यह 62 हजार रुपए प्रति 10 ग्राम बढ़ गया। इस वर्ष इसने निवेशकों को 70 फीसदी का रिटर्न दिया है। दिवाली के बाद से अब तक यह 7.6 फीसदी बढ़ चुका है। 23 दिसंबर को यह 1.36 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के पार पहुंच गया।

वैसे 1923 में 10 ग्राम सोने की कीमत मात्र 18.35 रुपए प्रति 10 ग्राम (तोला) थी। अगर उस समय आपके पूर्वजों ने मात्र 10 ग्राम भी सोना खरीदकर सहेज लिया होता तो आज आपको इसके 1,36,000 रुपए मिलते। ALSO READ: 2025 में चांदी की चाल ने चौंकाया, मात्र 9 माह में तय किया 1 से 2 लाख तक सफर, असेट वैल्यू भी 3 ट्रिलियन पार
 
क्यों बढ़े सोने के दाम : ट्रंप के टैरिफ वार के साथ ही, दुनिया के कई देशों में भड़के युद्ध, डॉलर के मुकाबले रुपए की कमजोरी और वैश्विक स्तर पर अस्थिरता ने सोने के दाम तेजी से बढ़ाए। सेफ हैवन होने की वजह से इस वर्ष चांदी की तरह ही इस वर्ष दुनियाभर में सोने की मांग काफी ज्यादा थी। हालांकि उसके सप्लाय कम होने की वजह से इसके दाम आसमान पर पहुंच गए।
 
सराफा बाजार विशेषज्ञ सीए मयंक मारू का कहना है कि दुनिया भर के देशों में इस वर्ष सोना खरीदी के लिए होड़ मची हुई थी। अमेरिका और चीन अपने गोल्ड रिजर्व को बढ़ाकर अपनी करेंसी को मजबूती देना चाहते हैं। अन्य सभी देश भी अपना गोल्ड रिजर्व बढ़ाने का यशासंभव प्रयास कर रहे हैं। अभी भले ही अमेरिका के पास सबसे ज्यादा सोना हो लेकिन पिछले 2 सालों में चीन ने जमकर सोना खरीदा है। वह सोने के दम पर अमेरिका से आगे निकलने का प्रयास कर रहा है। उनका कहना है कि बाजार में फिलहाल सोने की मांग ज्यादा नहीं है। चांदी की तरह इसकी इंडस्ट्रीयल मांग भी नहीं है। लेकिन बड़े देशों की मांग ने सोने को आसमान पर पहुंचा दिया है।
 
वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक हालातों को देखते हुए निवेशक फिलहाल जोखिम लेने से बच रहे हैं, जिसका सीधा फायदा सोने की कीमतों को मिल रहा है। इस वर्ष देश में डिजिटल गोल्ड की मांग भी काफी बढ़ी है। निवेशकों को ईटीएफ में निवेश करना भी रास आ रह है। ALSO READ: Maruti Suzuki की 2026 में धमाकेदार वापसी, 2 इलेक्ट्रिक कारें, एक फ्लेक्स-फ्यूल SUV और Brezza Facelift होगी लॉन्च
 
भारत के पास कितना सोना : भारत हर साल करीबन 600 - 700 टन सोना आयात करता है। यहां हमेशा से सोने को एक सुरक्षित निवेश माना गया है। यहां शादी ब्याह और त्योहारों के सीजन में सोने की आभूषणों की मांग काफी बढ़ जाती है। युद्ध और अनिश्चतता की स्थिति में तो गोल्ड के अलावा किसी को कुछ नहीं दिखता है। RBI का स्वर्ण भंडार सितंबर तक 880 टन के पार पहुंंच गया था। मार्गन स्टेनली की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के घरों में करीब 34,600 टन सोना रखे होने का अनुमान है। वर्तमान में इस सोने का मूल्य बढ़कर 3.8 ट्रिलियन डॉलर हो गया है। यह भारत के जीडीपी का करीब 88 प्रतिशत है।
 
डिमांड और सप्लाय में अंतर : दुनिया में सोने की सबसे ज्यादा खदानें ऑस्ट्रेलिया में हैं। चीन, रूस, दक्षिण अफ्रीका और कनाडा में भी बड़ी संख्या में सोने की खदानें हैं। भारत में कर्नाटक राज्य की कंमली और अन्य छोटी खदानें सोने का उत्पादन करती हैं, हालांकि अब इनका उत्पादन पहले जैसा नहीं है।गोल्ड और सिल्वर में डिमांड और सप्लाय में अंतर काफी ज्यादा है। बड़े देशों में मची होड़ की वजह से मांग ज्यादा है लेकिन सप्लाय बहुत कम है। 
 
रिजर्व बैंक का बड़ा फैसला : रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने सॉवरेन गोल्ड बांड 2020-21 सीरीज-1 से बगैर मैच्योरिटी के भी पैसे निकालने की अनुमति दे दी। इसके तहत निवेशकों को गोल्ड बॉन्ड को 28 अक्टूबर 2025 से समय से पहले रिडीम करने का विकल्प दिया गया। जब यह सीरीज लॉन्च हुई थी, तब ऑनलाइन आवेदन करने वाले निवेशकों ने 4,589 रुपए प्रति ग्राम की दर से बॉन्ड खरीदे थे। वहीं, ऑफलाइन खरीदारों के लिए कीमत 4,639 रुपए प्रति ग्राम थी। इससे ऑनलाइन निवेशकों को करीब 166% का एब्सोल्यूट रिटर्न मिला।
 
2026 में कैसी रहेगी सोने की चाल : मयंक मारू ने बताया कि 2025 की तरह है 2026 में भी सोने के दाम तेजी से बढ़ने की संभावना है। उन्होंने कहा कि 2026 की शुरुआती 3 माह में डॉलर के मुकाबले रुपया और कमजोर होगा। यह मार्च तक 100 रुपए के पार पहुंच सकता है। इससे सोने के दाम भी तेजी से बढ़ेंगे। चांदी 2025 में ही 2,00,000 लाख रुपए प्रति किलो हो गई तो सोना 2026 में 2 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के आंकड़े को छू सकता है। दीपावली तक इसके 2.10 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम तक पहुंचने की संभावना है। 
 
सराफा कारोबारी संजय अग्रवाल के अनुसार, आने वाले वर्ष में भी स्थितियों में कोई बड़ा बदलाव नहीं दिखाई दे रहा है। टैरिफ और युद्ध जैसी समस्याएं बनी हुई है। जापान की अर्थव्यवस्‍था भी डगमगा रही है। रुपए की कमजोरी ने भी भारत के लिए सोना महंगा कर दिया है। इससे 2026 में भी सोने की रफ्तार तेज रहेगी। उन्होंने कहा कि हर वर्ष की तरह इसमें 10 से 12 प्रतिशत तेजी आ सकती है।
अस्वीकरण : यह लेख केवल सूचना के उद्देश्य से है। यह कोई निवेश सलाह नहीं है। किसी भी निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श जरूर लें।