लव, सेक्स और गुस्सा हत्या के तीन बड़े कारण

नई दिल्ली। | ND| पुनः संशोधित शनिवार, 7 जनवरी 2012 (12:49 IST)
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राजधानी की कानून व्यवस्था के तीन बड़े नासूर हैं-"लव, और गुस्सा"। इनके कारण पिछले साल भी राजधानी में खून के छींटे उड़ते रहे। सैकड़ों बच्चे अनाथ हो गए। बूढ़े मां-बाप के जवान बच्चे छीन गए। कितनी महिलाओं का सुहाग उजड़ा। लोग कलेजा पीट-पीटकर रोए। विभिन्न इलाकों में मातम पसरता रहा।

पुलिस आकड़ों के अनुसार, वर्ष 2011 में 543 हत्याएं हुईं। इनके पीछे सबसे बड़ी वजह बना राजधानी वालों का गुस्सा। उदाहरण के तौर पर पिछले साल एक हत्या तो आवारा कुत्तों के झगड़े के पीछे हुई। दिल्ली में आम आदमी ही नहीं, पुलिस वाले भी आपा खो रहे हैं। कुछ सप्ताह पहले उत्तर पूर्वी जिले में कूड़ा डालने के झगड़े के चलते एक एएसआई ने एक सिपाही पर अंधाधुंध फायर कर दिए।

पुलिस विश्लेषण के अनुसार, पिछले साल 543 कत्ल में से 19 फीसदी हत्याएं प्यार, धोखा और अवैध संबंधों के चलते हुईं। अवैध संबंध हमेशा से हत्याओं की बड़ी वजह रहे हैं, लेकिन अब लोगों का गुस्सा उससे भी ज्यादा खतरनाक साबित हो रहा है। पिछले साल 17 फीसदी कत्ल अचानक गुस्सा आने के कारण हुए हैं। इनमें भी रोडरेज व पार्किंग विवाद बड़ी वजह रहीं। सिर्फ 13 फीसदी हत्याओं के पीछे आपराधिक उद्देश्य रहे। विश्लेषण में चौंकाने वाली बात यह भी सामने आई कि 95 फीसदी मामलों में आरोपियों का कोई पिछला आपराधिक रिकार्ड नहीं था। यानी, मामूली विवाद पर लोगों का संगीन करना कानून व्यवस्था के लिए सबसे अधिक चिंताजनक हो चुका है।

हालांकि वर्ष 2010 के मुकाबले 2011 में हत्या मामलों में कुछ कमी आई है। 2010 में 565 हत्याएं हुई थीं। वहीं दूसरी तरफ 2010 के मुकाबले हत्या के प्रयास की वारदात ज्यादा हुईं। वर्ष 2010 में हत्या के प्रयास के 311 मामले दर्ज हुए थे, पर 2011 में 376 केस दर्ज हुए। इन मामलों के विश्लेषण में भी 28 फीसदी वारदात की वजह गुस्सा था। पिछले साल हत्या के 82 फीसदी मामलों को पुलिस ने सुलझाने का दावा किया है।