आज तक नहीं लगे ट्रैफिक सिग्नल

नीमच | Naidunia| पुनः संशोधित शनिवार, 7 जनवरी 2012 (00:49 IST)
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शहर में बेहतर केवल विचार-विमर्श का विषय बनकर रह गया है। कभी आवागमन बेहतर बनाने की, कभी अतिक्रमण हटाने की, तो कभी के लिए योजना बनाई जाती है, जो कागजों से बाहर आ ही नहीं पाती हैं। कई बार ऐलान कर दिया गया लेकिन आज तक शहर में सिग्नल ही नहीं लग पाए हैं। इधर शहर की आबादी के साथ ही वाहनों की तादाद भी बढ़ती जा रही है और शहर का यातायात बेतरतीब होता जा रहा है।


शहर की आबादी साल दर साल बढ़ रही है। वर्तमान में शहर की आबादी लगभग 1 लाख 50 हजार से अधिक है। आबादी के साथ वाहनों की तादाद भी बढ़ी है। व्यवस्थित यातायात के लिए शहर के चार प्रमुख चौराहों को ट्रैफिक सिग्नल लगाने के लिए चुना गया था, लेकिन हाल यह हैं कि आज तक एक भी सिग्नल नहीं लग पाया है। जबकि पूर्व में यातायात पुलिस का हर नया अधिकारी इसे अपनी प्राथमिकताओं में गिनाता रहा है।


बनना थी पार्किंग, जम गई गुमटियाँ


शहर के बीचोंबीच टैगोर मार्ग के दोनों ओर बाजार है। मास्टर प्लान में टैगोर मार्ग पर कमलचौक से लगाकर फोरजीरो तिराहे तक एक पूरी पट्टी को पार्किंग के लिए चुना गया था। पार्किंग तो नहीं बनी, लेकिन खाली स्थान पर गुमटियाँ जरूर बन गईं। कई बार गुमटियों को स्थानांतरित करने की योजनाएँ बनी, लेकिन बात वोटों पर आकर टिक गई।

मनमाना किराया वसूलते हैं

शहर के स्टेशन से गंतव्य स्थान पर पहुँचने के लिए यात्रियों को ऑटो रिक्शा चालकों की मनमानी झेलना पड़ती है। यदि कोई यात्री रात्रि में स्टेशन से शहर के किसी भी स्थान पर जाता है, तो ऑटो रिक्शा चालक 70 रुपए से कम किराया बताता ही नहीं है, जबकि 50 रुपए में यात्री इंदौर से नीमच तक ट्रेन में सफर कर लेता है। नागरिक पिछले कई वर्षों से यहाँ ठगे जा रहे हैं। पूर्व में स्टेशन पर प्री-पेड बूथ लगाया गया था, लेकिन वह भी थोड़े दिन तक ही रहा। यह मुद्दा भी हर बार यातायात समिति की बैठक में उठता है, लेकिन यातायात पुलिस अमले की कमी को आड़े ले ही आती है।

प्रतिबंध कागजों पर

शहर में भारी वाहनों के प्रवेश पर प्रातः 9 से रात्रि 9 बजे तक प्रतिबंध है। इसके बावजूद कई स्थानों पर ट्रांसपोर्ट नगर जैसा नजारा दिखाई देता है। भारी वाहनों के कारण जवाहर नगर, शिक्षक कॉलोनी, आम्बेडकर मार्ग, विकास नगर, हेमू कालानी चौराहा, वीर पार्क रोड आदि क्षेत्रों के रहवासी परेशान हैं।

सड़कों पर पहुँची दुकान

घंटाघर, तिलक मार्ग, नायका ओली, बोहरा गली आदि बाजारों में पैदल चलने तक में कठिनाई होती है। अधिकांश दुकानदारों द्वारा दुकानों के बाहर सामान रखकर सड़क को सँकरा कर दिया जाता है। टैगोर मार्ग, काटजू मार्केट क्षेत्र में भी ज्यादातर दुकानदारों ने फुटपाथ के स्थान को सामान रखकर सीमित कर दिया है। -निप्र



पहले चौराहे व्यवस्थित तो हों

-कुछ चौराहों पर ट्रैफिक सिग्नल लगाए जा सकते हैं। आम्बेडकर चौराहे पर पाँच रास्ते मिलते हैं, लेकिन सबसे बड़ी परेशानी है कि चौराहे व्यवस्थित नहीं बने हुए हैं। पहले चौराहे ठीक करने होंगे। पार्किंग के मामले पर सड़क सुरक्षा एवं यातायात समिति की बैठक में कलेक्टर द्वारा नपा को बाजार क्षेत्र से गुमटियाँ हटाने के निर्देश दिए हैं। गुमटियों को व्यवस्थित स्थान देने और पार्किंग स्थल खाली कराने की जिम्मेदारी नपा की है। भारी वाहनों के प्रवेश पर कार्रवाई करते हैं। रेलवे स्टेशन पर प्री-पेड बूथ की योजना शीघ्र अमल में लाई जाएगी। -जगदीश पाटिल, सूबेदार, यातायात पुलिस, नीमच



सड़कें चौड़ी हों

-सड़कों पर जगह नहीं बची है। कई बार बसों के खड़े होने पर आपत्ति ली जाती है। सडकें व्यवस्थित और चौड़ी होंगी तो दिक्कत कम होगी। -रवि वधवा, बस ऑपरेटर, नीमच



ट्रांसपोर्ट नगर बनाएँ

-भारी वाहनों की आवाजाही शहर में होती है तो दिक्कत खड़ी कर दी जाती है। कई बार ट्रक आदि भी सुधरने के लिए महू रोड या शहर के मैकेनिकों के पास आते हैं। इसमें भी आपत्ति होती है। ट्रांसपोर्ट नगर के लिए वर्षों से माँग की जा रही है। इसका निराकरण होना चाहिए। - मुन्ना दुर्रानी, ट्रक ऑपरेटर



मनमर्जी से चलते हैं

-शहर की सड़कों पर लोग मनमर्जी से चलते हैं। जहाँ पर यातायात पुलिस का जवान खड़ा रहता है, वहाँ स्थिति थोड़ी ठीक रहती है, लेकिन अधिकांश चौराहों पर जवान तैनात नहीं रहते हैं। - संजय नागदा, दुपहिया वाहन चालक



जागरूकता जरूरी

-यातायात को लेकर लोगों को जागरूक होना चाहिए। यातायात पुलिस पर हर बात के लिए निर्भर रहना ठीक नहीं है। - आयुष कोठारी, कार चालक




साइकलवालों की आफत
-साइकलवालों को शहर में संभल कर चलना पड़ता है। अन्य वाहनों का दबाव लगातार बढ़ रहा है। साइकल चालकों को वैसे ही सड़क पर तुच्छ समझा जाता है। साइकल चालकों से ज्यादा बड़े वाहन चालकों को यातायात के नियम सिखाना जरूरी है। -बालू सेन, साइकल चालक




फुटपाथ भी नहीं छोड़ा
-पैदल चलने के लिए नीमच में कोई अलग से फुटपाथ नहीं है, जहाँ है वहाँ पर दुकानदारों ने कब्जा जमा रखा है। पैदल चलने वालों की तो मुसीबत ही है। -सुनील सोलंकी




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