दूर नहीं हो रही बिजली कटौती की पीड़ा

मंदसौर | Naidunia| पुनः संशोधित शुक्रवार, 16 दिसंबर 2011 (22:46 IST)
ग्रामीण अंचल में 11 से रहने से दिनचर्या बुरी तरह प्रभावित हो रही है। पिछले दो-तीन दिनों से शहर के बाशिंदे इस पीड़ा को नहीं भुगत रहे हैं, जबकि में 2 घंटे कटौती हो रही है। इसके विपरित तहसील मुख्यालयों पर रहने वाले लोगों की परेशानी दूर होने का नाम नहीं ले रही है। बिजली के अभाव में किसानों को सिंचाई कार्य में मुश्किलें आ रही हैं।


मंदसौर शहर में पिछले दो-तीन दिनों से 24 घंटे बिजली मिल रही है। इससे पूर्व करीब 2 घंटे बिजली गुल रह रही थी। इसके अलावा जिले के तहसील मुख्यालय दलौदा, सीतामऊ, सुवासरा, गरोठ, शामगढ़, भानपुरा और मल्हारगढ़ में 11 से 12 घंटे बिजली कटौती हो रही है, जबकि घोषित रूप से यहाँ 8 घंटे कटौती तय है।


सीतामऊ प्रतिनिधि के अनुसार यहाँ सुबह 6 से 9, दोपहर 2 से 4 तथा इसके बाद शाम 6 से 9 बजे तक घोषित रूप से बिजली कटौती होती है। इसके अलावा भी बिजली की आँख-मिचौनी चलती रहती है। शाम को बिजली कटौती होने से गृहिणियाँ, व्यापारी वर्ग, काश्तकारों के साथ आमजन भी त्रस्त हैं। विद्यार्थियों की भी पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है।

भानपुरा प्रतिनिधि के अनुसार यहाँ सुबह 6 से 9, दोपहर 12 से 2 तथा शाम 4 से 6 फिर रात 10 से 12 बजे तक घोषित रूप से कटौती होती है। इसके अलावा 3-4 घंटे कटौती होती है। घंटों बिजली कटौती होने से बिजली आधारित व्यवसाय बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। विशेषकर आटा चक्की बंद होने से अनाज पिसाने में दिक्कतें आती है। कई मर्तबा रात को आटा चक्की चलाना पड़ती है।

शामगढ़ प्रतिनिधि के अनुसार सुबह 6 से 9, दोपहर 12 से 4, शाम 6 से 9 तथा फिर रात 12 से 3 बजे तक घोषित रूप से कटौती होती है। इसके अलावा अघोषित रूप से चाहे जब बिजली गुल हो जाती है। इससे नगर पंचायत को जलप्रदाय व्यवस्था सुचारु रखने के लिए बड़ी मशक्कत करना पड़ रही है। उसे जनरेटरों का सहारा लेना पड़ रहा है। सुबह बिजली नहीं होने से गृहिणियों को घरेलू कामकाज में बड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। विद्यार्थियों की पढाई भी नहीं हो पा रही है। व्यापार-व्यवसाय भी प्रभावित हो रहा है।

फसलों पर प्रतिकूल असर

नीमच प्रतिनिधि के अनुसार क्षेत्र में विद्युत विभाग द्वारा घोषित शेड्यूल के मुताबिक विद्युत आपूर्ति नहीं हो रही है। सभी स्थानों पर तय समय से कम बिजली मिल रही है। शहरी क्षेत्र में फिर भी इतनी परेशानी नहीं है परंतु ग्रामों में किसानों और ग्रामीणों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सिंचाई के वक्त बिजली कटौती होने से किसानों की फसलें प्रभावित हो रही है।

विद्युत विभाग के अधीक्षण यंत्री टीपी सिंह ने बताया कि जिला मुख्यालय पर 24 घंटे, तहसील मुख्यालयों पर 14 घंटे, विशेष तहसील मुख्यालयों पर 20 घंटे तथा ग्रामीण स्तर पर साढ़े नौ घंटे विद्युत आपूर्ति की जा रही है। जबकि ग्रामीण एवं तहसील संवाददाताओं के अनुसार घोषित सीमा से कम बिजली मिल रही है। तहसील मुख्यालयों पर 14 के स्थान पर 12 घंटे, विशेष तहसील मुख्यालयों पर 20 के स्थान पर 17-18 घंटे और ग्रामीण स्तर पर साढ़े नौ घंटे की बजाय 7 घंटे ही बिजली मिल रही है। इसी प्रकार जिला मुख्यालय पर 24 घंटे के स्थान पर 22 घंटे ही बिजली मिल रही है।

गौरतलब है कि जिला मुख्यालय पर शतप्रतिशत वसूली के कारण 24 घंटे बिजली आपूर्ति एवं तहसील मुख्यालयों पर 20 घंटे विद्युत आपूर्ति की योजना विद्युत वितरण कंपनी ने घोषित की थी। जावद और मनासा को इसी आधार पर विशेष तहसील मुख्यालयों का दर्जा दिया गया है। जबकि जीरन, सिंगोली, रतनगढ़, रामपुरा और कुकड़ेश्वर को एक वर्ष पूर्व ही तहसील के रूप में दर्जा मिला है। यहाँ विशेष तहसीलों की तरह विद्युत आपूर्ति की योजना नहीं है।



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