मैं गया वक़्त नहीं हूँ
महरबाँ होके बुलालो मुझे चाहो जिसदम
मैं गया वक़्त नहीं हूँ के फिर आ भी न सकूँ ----- ग़ालिब
मैं गया वक़्त नहीं हूँ के फिर आ भी न सकूँ ----- ग़ालिब
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