तेनालीराम की कहानियां : मूर्खों का साथ हमेशा दुखदायी

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इन प्रश्नों को सुनकर गांव वालों को लगा कि वे लोग अवश्य ही राज्य के कोई अधिकारीगण हैं।

वे बोले, ‘महाशय, हमारे गांव में खूब शांति है, चैन है। सब लोग सुखी हैं। दिनभर कडी़ मेहनत करके अपना कामकाज करते हैं और रात को सुख की नींद सोते हैं। किसी को कोई दुख नहीं है।

राजा कृष्णदेव राय अपनी प्रजा को अपनी संतान की तरह प्यार करते हैं इसलिए राजा से असंतुष्ट होने का सवाल ही नहीं पैदा होता।

‘इस गांव के लोग राजा को कैसा समझते हैं?’ राजा ने एक और प्रश्न किया।
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