तेनालीराम की कहानियां : तेनालीराम की घोषणा

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हर मुनादी में की चर्चा हर जगह होती थी। तेनालीराम की चर्चा की बात मंत्री, सेनापति और पुरोहित के कानों में भी पहुंची।

वे तीनों बड़े चिंतित हो गए, कहने लगे, ‘तेनालीराम ने सारी बाजी ही उलटकर रख दी। जनता समझ रही है कि वे दरबार में सबसे प्रमुख हैं। वह जानबूझकर हमें बदनाम कर रहा है।’

दूसरे ही दिन जब राजा दरबार में थे तो मंत्री ने कहा, ‘महाराज, हमारा संविधान कहता है कि राजकाज की समस्त बातें गोपनीय होती हैं, उन बातों को जनता या प्रजा को बताना ठीक नहीं।’
तभी तेनालीराम बोल पड़ा, ‘बहुत अच्छे मंत्रीजी, आपको शायद उस दिन यह बात याद नहीं थी। आपको भी तभी याद आया, जब आपके नाम का ढोल पिट गया।’

यह सुनकर सारे दरबारी हंस पड़े। बेचारे मंत्रीजी की शक्ल देखने लायक थी। राजा कृष्णदेव राय भी सारी बात समझ गए। वे मन ही मन तेनालीराम की सराहना कर रहे थे।



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