तेनालीराम की कहानियां : तपस्या का सच

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विजयनगर राज्य में बड़ी जोरदार ठंड पड़ रही थी। राजा कृष्णदेव राय के दरबार में इस ठंड की बहुत चर्चा हुई।

पुरोहित ने महाराज को सुझाया, ‘महाराज, यदि इन दिनों यज्ञ किया जाए तो उसका फल उत्तम होगा। दूर-दूर तक उठता यज्ञ का धुआं सारे वातावरण को स्वच्छ और पवित्र कर देगा।’

दरबारियों ने एक स्वर में कहा, ‘बहुत उत्तम सुझाव है पुरोहितजी का। महाराज को यह सुझाव अवश्य पसंद आया होगा


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