जानिए, परम सिद्ध नौ नाथों को

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जालंधर (जालिंदरनाथ) नाथ : इनके गुरु दत्तात्रेय थे। एक समय की बात है हस्तिनापुर में ब्रिहद्रव नाम के राजा सोमयज्ञ कर रहे थे। अंतरिक्षनारायण ने यज्ञ के भीतर प्रवेश किया। यज्ञ की समाप्ति के बाद एक तेजस्वी बालक की प्राप्ति हुई। यही बालक जालंधर कहलाया।

राजस्थान के जालौर के पास आथूणी दिस में उसका तपस्या स्थल है। यहां पर मारवाड़ के महाराजा मानसिंह ने एक मंदिर बनवाया है। जोधपुर में महाराजा मानसिंह पुस्तक प्रकाश संग्रहालय में अनेक हस्तलिखित ग्रंथ हैं जिसमें जालंधर का जीवन और उनके कनकाचल में पधारने का जिक्र है। चचंद्रकूप सूरजकुंड कपाली नामक यह स्थान प्रसिद्ध है। जालंधर के तीन तपस्या स्थल हैं- गिरनार पर्वत, कनकाचल और रक्ताचल।
उनके होने संबंधी दस्तावेजों के मुताबिक वे विक्रम संवत 1451 में राजस्थान में पधारे थे।

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