विवेकानंद को मिला था गुरु का आशीर्वाद

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नरेन्द्र बीए के बाद बीएल करना चाहते थे, पर पिता की मृत्यु के बाद उन्हें पता चला कि वे भारी कर्ज छोड़ गए हैं, जो उनके चाचा कालीप्रसाद की ही देन है।

अपने भाई विश्वनाथ दत्त की मृत्यु के बाद काली बाबू ने उनके परिवार को घर से निकाल दिया। नरेन्द्र नौकरी की तलाश में दर-दर ठोकरें खाने लगे। हालांकि वे तब तक स्वामी के संपर्क में आ चुके थे।

नरेन्द्र को ब्रह्म समाज वाले भी बहुत चाहते थे। ब्रह्म समाज के एक स्कूल में अध्यापक का एक पद रिक्त था, पर वहां के प्रमुख शिवनाथ शास्त्री ने उन्हें रामकृष्ण परमहंस का भक्त मान नौकरी देने से मना कर दिया।



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