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10 मिनट, 107 डंडे और 'ऑन-द-स्पॉट इंसाफ' : भावनगर में लिव-इन पार्टनर के हत्यारे की पिटाई के वीडियो पर बवाल

Bhavnagar News
Bhavnagar Police Video Viral: गुजरात के भावनगर में लिव-इन पार्टनर की नृशंस हत्या के आरोपी पर पुलिस का ऑन-द-स्पॉट 'इंसाफ' चर्चा और विवाद का विषय बन गया है। 70 वर्षीय महिला की बेटी काजलबेन की बेरहमी से हत्या करने वाले आरोपी फैसल को जब नीलमबाग पुलिस स्टेशन के पीआई डीपी उंडडकट क्राइम सीन रीक्रिएशन के लिए ले गए, तो महज 10 मिनट के भीतर उस पर 107 डंडे बरसा दिए। जहां पीआई ने इस कदम को अपराधियों में खौफ पैदा करने वाला बताया, वहीं सुप्रीम कोर्ट और डीजीपी के निर्देशों का उल्लंघन होने के कारण अब पुलिसिया कार्रवाई के इस तरीके पर संवैधानिक सवाल खड़े हो रहे हैं।

लिव-इन पार्टनर की नृशंस हत्या की पूरी कहानी

भावनगर के कुंभारवाड़ा की रहने वाली 70 वर्षीय भगूबेन बारैया की 40 वर्षीय बेटी काजलबेन पिछले आठ वर्षों से एसटी बस स्टैंड के पास फुटपाथ पर रहने वाले 20 वर्षीय फैसल उर्फ खटकी रफीकभाई लखानी के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रह रही थी।
 
3 सितंबर की दोपहर, हाल ही में जेल से छूटकर आया फैसल बस स्टैंड पहुंचा। वहां उसने काजलबेन को अपने परिचित रवि उर्फ बाड़ो गोहिल के साथ बात करते देखा। रिश्ते को लेकर हुए विवाद में गुस्से में आकर फैसल ने दोनों को लात मारी। इसके बाद उसने काजलबेन के बाल पकड़कर उसका सिर, गर्दन और चेहरा जमीन पर लगी टाइल्स पर बार-बार दे मारा।
 
गंभीर चोटों के कारण काजलबेन बेहोश हो गई। फैसल उसे एम्बुलेंस से सर टी. अस्पताल ले गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

पुलिस का एक्शन और 10 मिनट में 107 डंडे

घटना के बाद पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर फैसल को गिरफ्तार कर लिया। 5 सितंबर को नीलमबाग पुलिस स्टेशन के पुलिस निरीक्षक (PI) डीपी उंडडकट आरोपी को अपराध स्थल (क्राइम सीन रीक्रिएशन) पर लेकर आए।
 
इस दौरान पीआई उंडडकट ने आरोपी फैसल को रस्सी से बांधकर सार्वजनिक रूप से सड़क पर घुमाया और महज 10 मिनट के भीतर उस पर 107 डंडे बरसाए। यह पूरी घटना कैमरों में कैद हो गई और इसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।

पीआई उंडडकट का तर्क : दूसरों को सबक मिले

इस कार्रवाई के बाद जब नीलमबाग पुलिस स्टेशन के पीआई डीपी उंडडकट से संपर्क किया गया, तो उन्होंने ऑन-रिकॉर्ड अपने कृत्य का बचाव किया। उन्होंने कहा कि उसे सार्वजनिक रूप से इसलिए सजा दी गई ताकि भविष्य में कोई अन्य व्यक्ति किसी महिला के साथ ऐसी दरिंदगी करने की हिम्मत न करे।

सर्वोच्च न्यायालय और डीजीपी के आदेशों का उल्लंघन?

पीआई के इस कदम ने कानूनी गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है। आलोचकों का मानना है कि यह कृत्य सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक दिशा-निर्देशों और गुजरात पुलिस के अपने सर्कुलर का सीधा उल्लंघन है:
  • डीजीपी के सख्त निर्देश : गुजरात के पूर्व प्रभारी डीजीपी डॉ. केएलएन राव ने लिखित आदेश जारी कर स्पष्ट किया था कि किसी भी आरोपी का सार्वजनिक रूप से जुलूस निकालना (परेड कराना) या उनके साथ अपमानजनक व्यवहार करना अवैध है और ऐसा करने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
  • कानून का शासन बनाम त्वरित न्याय : भारतीय संविधान के तहत आरोपी को अदालत के समक्ष प्रस्तुत कर निष्पक्ष सुनवाई (Fair Trial) का अधिकार प्राप्त है। पुलिस का काम साक्ष्य जुटाना और अदालत के समक्ष प्रस्तुत करना है, ऑन-द-स्पॉट सजा देना नहीं।
भावनगर की यह घटना दो बेहद संवेदनशील पहलुओं को सामने लाती है। एक ओर जहां महिलाओं के खिलाफ बढ़ते जघन्य अपराधों पर सख्त कार्रवाई और त्वरित न्याय की सामाजिक मांग है, वहीं दूसरी ओर यदि रक्षक ही स्वयं जज बनकर सड़क पर सजा सुनाने लगेंगे, तो संवैधानिक न्याय प्रणाली का महत्व समाप्त हो जाएगा।

यह मामला अब गुजरात पुलिस प्रशासन के लिए एक बड़ी परीक्षा बन गया है कि वह आरोपी को कड़ी से कड़ी न्यायिक सजा दिलाने के साथ-साथ पुलिस अधिकारियों द्वारा कानून सीमा से बाहर जाकर किए गए कार्यों पर क्या रुख अपनाता है।
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