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स्थिरता शक्ति योग

स्थिरता शक्ति योग
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शरह की भागदौड़ भरी जिंदगी के चलते शरीर और मन में अस्थि‍रता अपने चरम पर है। इसी कारण रोग, शोक और संताप बढ़ गए हैं। वैश्विक शांति के लिए स्थिरता शक्ति योग की बहुत आवश्यकता है। प्रत्येक कार्य में चित्त का स्थिर और शरीर का सेहतमंद रहना जरूरी है, लेकिन व्यक्ति के पास ध्यान, योग या कसरत करने के लिए समय नहीं है। इसी को देखते हुए योग के विभूतिपाद से हमने निकाला है 'स्थिरता शक्ति योग।'

कैसे होगा यह संभव?
शरीर और मन-मस्तिष्क को तेजी से स्थिर करने के दो तरीके हैं:- पहला केवली कुंभक प्राणायाम और दूसरा कूर्मनाड़ी में संयम करना। उठते-बैठते, चलते-फिरते कहीं पर भी केवली प्राणायाम कर सकते हैं। इसकी सीधी-सी विधि है श्वास और जीभ को हिलने से रोक देना। वैसे प्रदूषण भरे माहौल में आप यह करते ही रहते हैं। स्वयं को स्टॉप कर देने की क्रिया है केवली। श्वास बाहर है तो बाहर ही रोक दें और भीतर है तो भीतर ही रहने दें।

दूसरा कूर्मनाड़ी में संयम करने पर स्थिरता होती है। कंठ कूप में कच्छप आकृति की एक नाड़ी है। उसको कूर्मनाड़ी कहते हैं। कंठ के छिद्र जिसके माध्यम से पेट में वायु और आहार आदि जाते हैं उसे कंठकूप कहते हैं। इस कंठ के कूप में संयम प्राप्त करने के लिए शुरुआत में प्रतिदिन प्राणायाम और भौतिक उपवास का अभ्यास करना जरूरी है। इससे धीरे-धीरे संकल्प और संयम जाग्रत होने लगेगा।

इसका लाभ : योग में कहा गया है कि सिद्धियों के लिए शरीर और चित्त की स्थिरता आवश्यक है। इसका अभ्यास करने से सिद्धियों का मार्ग खुलता है। यदि आपको सिद्धियों से मतलब नहीं है तो जब शरीर स्थिर होगा तो रोग, शोक और संताप जाते रहेंगे तथा मन में शांति का जन्म होगा। आप ऐसा नहीं सोचेगे जिससे चिंता होती है, ऐसा नहीं खाएंगे जिससे रोग होता है और ऐसा नहीं करेंगे जिससे मुसिबत का जन्म होता हो। यह योग हर हाल में फाइदेमंद साबित होगा।- AJ
लेखक के बारे में
अनिरुद्ध जोशी 'शतायु'
पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों से साहित्य, धर्म, योग, ज्योतिष, करंट अफेयर्स और अन्य विषयों पर लिख रहे हैं। वर्तमान में विश्‍व के पहले हिंदी पोर्टल वेबदुनिया में सह-संपादक के पद पर कार्यरत हैं। दर्शनशास्त्र एवं ज्योतिष: मास्टर डिग्री (Gold Medalist), पत्रकारिता: डिप्लोमा। योग, धर्म और ज्योतिष में विशेषज्ञता।.... और पढ़ें