शुक्रवार, 9 जनवरी 2026
  1. लाइफ स्‍टाइल
  2. साहित्य
  3. मंच अपना
  4. Paiso ki asli keemat
Written By
Last Modified: मंगलवार, 6 जनवरी 2026 (15:58 IST)

पैसे की असली कीमत

sip
-दीपिका केसकर
लिफ्ट में दो दोस्तों रवि और योगेश की मुलाकात होती है और बातचीत से पता चलता है कि रवि नए iPhone के लिए पैसे जमा कर रहा है, जबकि योगेश उसे समझाता है कि इतनी बड़ी रकम को सिर्फ फोन पर खर्च करने के बजाय वित्तीय योजना बनाकर म्यूचुअल फंड और शेयर बाज़ार में निवेश करना ज़्यादा लाभदायक है। योगेश म्यूचुअल फंड, फंड मैनेजर, अलग–अलग प्रकार के फंड (जैसे लार्ज कैप, मिड कैप, स्मॉल कैप, टैक्स सेविंग फंड), विविधीकरण और जोखिम कम करने जैसी बातें सरल उदाहरणों से समझाता है। रवि मान जाता है कि सिर्फ दिखावे के लिए फोन लेने से अच्छा है कि पहले निवेश और वित्तीय योजना के बारे में सीखकर सही निर्णय लिया जाए।
 
दृश्य 1: ऑफिस की लिफ्ट
रवि: (मोबाइल देखते हुए उत्साहित) यार, नया iPhone लॉन्च हो गया! बस दो–तीन महीने में एडवांस जमा कर दूंगा, सीधा ले लूंगा।
योगेश: वाह, अच्छा है, लेकिन कीमत तो काफी होगी न? कितना खर्च आएगा?
रवि: लगभग पचास–साठ हज़ार तो लग ही जाएंगे। सोचा है बोनस भी आ रहा है, सब मिलाकर फोन ही ले लूं।
योगेश: इतना बड़ा अमाउंट सिर्फ फोन पर लगा दोगे? कभी सोचा है कि यही पैसा अगर निवेश कर दो तो आगे कितना बढ़ सकता है?
 
दृश्य 2: ऑफिस की कैंटीन
रवि: अरे यार, अभी तो कमाई शुरू हुई है, मज़े लेने दो। फोन से ही तो स्टेटस दिखता है।
योगेश: स्टेटस अच्छे फोन से नहीं, मजबूत फाइनेंशियल प्लानिंग से बनता है। ज़रा सोचो, अगर हर साल ऐसा ही खर्च करते रहे तो भविष्य के बड़े लक्ष्य जैसे घर, बच्चों की पढ़ाई, रिटायरमेंट के लिए कैसे बचत होगी?
रवि: मतलब तू कह रहा है कि फोन न लूं? फिर पैसा कहां लगाऊं?
योगेश: पहले वित्तीय लक्ष्य तय करो, फिर म्यूचुअल फंड जैसे साधनों के माध्यम से निवेश शुरू करो। वहां प्रोफेशनल फंड मैनेजर तुम्हारे और हज़ारों निवेशकों का पैसा शेयर, बॉन्ड और दूसरी सिक्योरिटीज में लगाकर लंबी अवधि में बढ़ाने की कोशिश करते हैं।
 
दृश्य 3: पार्क की बेंच
रवि: म्यूचुअल फंड का नाम तो सुना है, पर लगता है कि सब शेयर बाज़ार ही है, रिस्क बहुत होता होगा।
योगेश: रिस्क तो है, लेकिन सब फंड एक जैसे नहीं होते। लार्ज कैप, मिड कैप, स्मॉल कैप, हाइब्रिड, टैक्स सेविंग (ELSS) जैसे अलग–अलग विकल्प होते हैं। अलग–अलग सेक्टर और कंपनियों में पैसा बांटकर पोर्टफोलियो बनाया जाता है, जिससे एक जगह गिरावट हो तो दूसरे निवेश संभाल लें। इसी को विविधीकरण कहते हैं और इससे जोखिम कम होता है।
रवि: अच्छा, तो मैं कौन–सा फंड चुनूं?
योगेश: शुरुआत में फ्लेक्सी–कैप या हाइब्रिड फंड अच्छे रहते हैं, क्योंकि फंड मैनेजर अलग–अलग प्रकार के शेयरों में पैसा फैलाकर लचीलापन और संतुलन बनाए रखते हैं। साथ ही अगर टैक्स बचत का लक्ष्य हो तो ELSS फंड भी देख सकते हो।
 
दृश्य 4: गली का क्रिकेट मैदान
रवि: (बच्चों को क्रिकेट खेलते देखता है) सच कहूं, कल ही भांजे की स्कूल फीस की बात चल रही थी, कितनी महँगी हो गई है।
योगेश: यही तो, आज जो पैसे सिर्फ फोन पर खर्च करने वाले थे, वही अगर सही समय पर निवेश कर दो तो कल इन बच्चों की पढ़ाई, शादी, यहां तक कि अपनी रिटायरमेंट तक में काम आ सकते हैं।
रवि: समझ गया। फोन तो बाद में भी खरीद सकता हूं, पर समय पर निवेश का मौका चला गया तो वापस नहीं आएगा।
योगेश: बिल्कुल, पहले फाइनेंशियल सिक्योरिटी, फिर लक्ज़री। चल, इस वीकेंड एक फाइनेंशियल एडवाइज़र से मिलते हैं या साथ बैठकर कुछ अच्छे फंड रिसर्च करते हैं।
रवि: तय रहा, इस बार बोनस से SIP शुरू करूंगा, फोन का प्लान बाद में देखेंगे।
योगेश: यही सही “मनी कैप्सूल” है – आज थोड़ा सा त्याग, ताकि कल मजबूत भविष्य मिल सके।
ये भी पढ़ें
Swami Vivekananda Essay: स्वामी विवेकानंद पर बेहतरीन निबंध हिन्दी में