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Written By अनिरुद्ध जोशी 'शतायु'
Last Updated : बुधवार, 1 अक्टूबर 2014 (14:56 IST)

योग और भूत-प्रेत

भूत प्रेत
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पहले ब्रिटेन में योग को हिंदुओं का विज्ञान कहकर ईसाइयों को योग से दूर रहने की हिदायत दी गई थी। फिर मलेशिया की शीर्ष इस्लामिक परिषद ने योग के खिलाफ फतवा जारी कर मुसलमानों को इससे दूर रहने को कहा और अब अमेरिका में योग के खिलाफ ईसाई धर्मगुरुओं ने आवाज उठाई है।

अमेरिका के एक पादरी ने यह कहकर नई बहस छेड़ दी है कि योग ईसाई धर्म के खिलाफ है। मार्स हिल चर्च के मार्क ड्रिस्कोल ने इस साल की शुरुआत में कहा था कि योग अभ्यास की जड़ें भूत-प्रेतों की दुनिया तक फैली हैं, जिसे ‘पूर्णत: मूर्तिपूजा’ करार दिया जा सकता है।

ड्रिस्कोल के हवाले से एक अखबार ने कहा कि क्या ईसाई धर्म के अनुयायियों को योग से इसलिए दूर रहना चाहिए क्योंकि इसकी जड़ें भूत-प्रेत तक जाती हैं? बिलकुल। योग भूत-प्रेतों से जुड़ा है। अगर आप योग कक्षाओं में जाना शुरू कर रहे हैं तो इसका तात्पर्य है कि आप भूत-प्रेत से जुड़ी कक्षाओं में जा रहे हैं।

पादरी के समर्थन में साउथन बैपटिस्ट थिओलोजिकल सेमिनरी के अध्यक्ष आर. अलबर्ट मोहलर जूनियर ने कहा कि योग ईसाई धर्म के विपरीत है।

अब सवाल यह उठता है कि स्वस्थ रहने के अभ्यास या कसरत करने से कोई कैसे भूत-प्रेत से जुड़ सकता है और समझ में नहीं आता कि इसे ‍कैसे 'पूर्णत: मूर्तिपूजा' करार दिया जा सकता है? उक्त वक्तव्य से लगता है कि यह योग को जाने बगैर दिया गया बयान है या फिर योग के प्रचार-प्रसार से पादरी डर गए हैं।

यह बात ऐसी ही है कि मैं आपसे कहूँ कि आयुर्वेदिक दवा खाने से आप भारतीय या हिंदू बन सकते हैं या आयुर्वेद की जड़ें भूत-प्रेतों की दुनिया तक फैली हैं।

लगभग चार हजार ईसा पूर्व जब योग का जन्म हो रहा था तब मानव जाति के मन में यह खयाल ही नहीं था कि कौन हिंदू, कौन बौद्ध, कौन ईसाई और कौन मुसलमान। योग के ईश्वर की बात करें तो वह जगत का कर्ता-धर्ता, संहर्ता या नियंता नहीं है। जब वह ऐसा नहीं है तो उसकी मूर्ति बनाकर उसे पूजना गुनाह है।

अब सवाल कि योग अभ्यास की जड़ें भूत-प्रेतों की दुनिया तक फैली हैं ऐसा ईसाई पादरी का कहना है तो जरा यह भी जान लें की योग की जड़ें क्या हैं।

योग- इस शब्द का अर्थ होता है जोड़ और जोड़ना। क्या जोड़, क्या जोड़ना? स्वयं को स्वयं से जोड़ और स्वयं को प्रकृति-ईश्वर से जोड़ना ही योग का लक्ष्य है। योगाभ्यास की जड़ है यम और नियम। दुनिया के सारे धर्म यम और नियम पर ही टिके हैं और यही योग की जड़ है।

यम पाँच हैं- अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह। नियम भी पाँच होते हैं- शौच, संतोष, तप, स्वाध्याय और ईश्वर प्राणिधान। अब आप बताएँ ये यम-नियम कैसे भूत प्रेत की दुनिया तक फैले हैं? यम, नियम के बाद ही आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा और ध्यान का नंबर आता है। क्या आसन और प्राणायाम द्वारा शारीर को स्वस्थ्य रखने से कोई भूतों से जुड़ जाएगा?

ईसाई पादरी ने सही कहा कि जरा यह भी जान लें की योग की जड़ें क्या हैं। हम भी कहते हैं कि योग की जड़ें जाने बगैर योग ना करें वर्ना भूत-प्रेत आपको परेशान कर सकते हैं क्योंकि योग तो ऐसा अभ्यास है जो दवा का काम भी करता है और दुआ का भी।

योग विशुद्ध रूप से शरीर और मन का विज्ञान है। योग के दर्शन को हिंदू ही नहीं दुनिया के प्रत्येक धर्म ने अपनाया है। ध्यान और योग का कोई धर्म नहीं। दोनों ही धर्मनिरपेक्ष और वैज्ञानिक हैं, जिसके माध्यम से शरीर और मस्तिष्क को पूर्ण स्वस्थ्य रखा जाता है।

योग के माध्यम से आज दुनिया के लाखों लोग शारीरिक और मानसिक बीमारियों से छुटकारा पाकर स्वस्थ होकर अपना जीवन खुशी से जी रहे हैं। सभी जानते हैं कि धर्म का धंधा तो दुख, भय और लालच पर ही खड़ा है।

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लेखक के बारे में
अनिरुद्ध जोशी 'शतायु'
पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों से साहित्य, धर्म, योग, ज्योतिष, करंट अफेयर्स और अन्य विषयों पर लिख रहे हैं। वर्तमान में विश्‍व के पहले हिंदी पोर्टल वेबदुनिया में सह-संपादक के पद पर कार्यरत हैं। दर्शनशास्त्र एवं ज्योतिष: मास्टर डिग्री (Gold Medalist), पत्रकारिता: डिप्लोमा। योग, धर्म और ज्योतिष में विशेषज्ञता।.... और पढ़ें